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आरबीआई ने ठुकराई Tata Sons की अपील, प्राइवेट कंपनी बनाए रखने की टाटा ट्रस्ट्स की योजना को बड़ा झटका

टाटा संस की शेयर बाजार में लिस्टिंग को लेकर टाटा समूह की मुश्किलें बढ़ गई हैं। भारतीय रिजर्व बैंक ने कंपनी की अनिवार्य लिस्टिंग से छूट की अपील खारिज कर दी है। टाटा ट्रस्ट्स कंपनी को प्राइवेट रखना चाहते हैं, जबकि SP ग्रुप लिस्टिंग का समर्थन कर रहा है। अब आगे क्या होगा?

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AI Generated Image

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने टाटा संस की उस अपील को ठुकरा दिया है, जिसमें उसने शेयर बाजार में लिस्टिंग के अनिवार्य नियम से छूट मांगी थी। ब्लूमबर्ग के रिपोर्ट के मुताबिक 185 अरब डॉलर के विशाल टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस पिछले कई सालों से शेयर बाजार में उतरने से बचती रही है। कंपनी का मानना रहा है कि लिस्ट होने से उस पर नियमों का शिकंजा कस जाएगा और समूह के अंदरूनी कामकाज की जानकारियां सार्वजनिक करनी होंगी।

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RBI ने टाटा संस को अपर-लेयर NBFC के रूप में किया था शामिल

टाटा संस की यह स्थिति तब और मुश्किल हो गई जब आरबीआई ने पिछले कुछ महीनों में नियमों को और सख्त कर दिया। साल 2022 में आरबीआई ने टाटा संस को 'अपर-लेयर' एनबीएफसी यानी शैडो बैंक के रूप में शामिल किया था। इसका मतलब था कि कंपनी का आकार इतना बड़ा है कि फाइनेंशियल सिस्टम पर असर डाल सकता है।

नियमों के मुताबिक, ऐसी कंपनियों को तीन साल के भीतर शेयर बाजार में लिस्ट होना जरूरी है ताकि पारदर्शिता बनी रहे। इस दबाव से बचने के लिए टाटा संस ने साल 2024 में अपना एनबीएफसी लाइसेंस सरेंडर करने और कर्ज चुकाने की पूरी कोशिश की थी, लेकिन आरबीआई के नए नियमों ने रास्ता बंद कर दिया।

टाटा ट्रस्ट्स ने लिस्टिंग से छूट की कोशिश की

नोएल टाटा की अध्यक्षता वाले टाटा ट्रस्ट्स के ट्रस्टीज लगातार यह कोशिश कर रहे थे कि टाटा संस को निजी कंपनी ही बनाए रखा जाए। उनका तर्क था कि कंपनी की वित्तीय स्थिति को मजबूत करने के लिए जो काम किया गया है, उसके आधार पर उसे अनिवार्य लिस्टिंग से छूट मिलनी चाहिए। हालांकि, टाटा संस ने इस मामले पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।

टाटा परिवार प्राइवेट कंपनी क्यों रखना चाहता है?

टाटा परिवार इस कंपनी को प्राइवेट ही क्यों रखना चाहता है, इसकी बड़ी वजह नियंत्रण है। टाटा संस के प्राइवेट रहने से समूह पर परिवार का दबदबा मजबूत रहता है। अगर कंपनी का आईपीओ आता है, तो टाटा ट्रस्ट्स की पकड़ ढीली हो सकती है और बाहरी लोगों के लिए टेकओवर करना आसान हो जाएगा। साथ ही, होल्डिंग कंपनी के शेयर बाजार में आने से उसे अपनी हर финансо डील और कामकाज का खुलासा करना होगा, जिससे यह साफ हो जाएगा कि समूह के भीतर पैसों का लेन-देन कैसे हो रहा है।

दूसरी तरफ, टाटा संस के एक बड़े अल्पसंख्यक शेयरधारक शापूरजी पल्लजी (SP) ग्रुप ने इस लिस्टिंग का जोरदार समर्थन किया है। एसपी ग्रुप अपनी अरबों डॉलर की हिस्सेदारी बेचकर भारी कर्ज चुकाना चाहता है, जिसके लिए टाटा संस का शेयर बाजार में आना बहुत जरूरी है।

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