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टाटा ग्रुप में लीडरशिप संकट, चंद्रशेखरन के जाने से क्यों बढ़ी चिंता? समझिए पूरी कहानी

टाटा संस में अचानक बदले हालात ने देश के सबसे बड़े कारोबारी समूहों में से एक के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। एन चंद्रशेखरन के फैसले के बाद अब नजर उत्तराधिकारी, बोर्ड के मतभेद और उन बड़े प्रोजेक्ट्स पर है, जो टाटा ग्रुप के भविष्य से जुड़े हैं।

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AI Generated Image

In Short

  • एन चंद्रशेखरन फरवरी में कार्यकाल खत्म होने के बाद Tata Sons के चेयरमैन पद से हटेंगे
  • बोर्ड में दोबारा नियुक्ति को लेकर महीनों से डेडलॉक बना हुआ था
  • नए चेयरमैन के सामने सेमीकंडक्टर, Air India, TCS और कर्ज जैसे बड़े मुद्दे होंगे

टाटा ग्रुप इस समय ऐसे दौर से गुजर रहा है, जब उसके कई बड़े बिजनेस एक साथ बदलाव और दबाव का सामना कर रहे हैं। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग, एप्पल आईफोन प्रोडक्शन, एयरलाइन, इलेक्ट्रिक व्हीकल और डिजिटल बिजनेस जैसे क्षेत्रों में कंपनी बड़े निवेश कर रही है। इसी बीच टाटा संस के चेयरमैन नटराजन चंद्रशेखरन ने पद छोड़ने का फैसला किया है। ऐसे में अब सवाल सिर्फ नए चेयरमैन का नहीं, बल्कि ग्रुप की आगे की दिशा का भी है।

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फरवरी में खत्म होगा चंद्रशेखरन का कार्यकाल

ब्लूमबर्ग के मुताबिक, नटराजन चंद्रशेखरन ने 12 अगस्त को बताया कि वह फरवरी में अपना कार्यकाल खत्म होने के बाद टाटा संस के चेयरमैन पद से हट जाएंगे। उनका यह फैसला कई महीनों से चल रहे बोर्ड डेडलॉक के बाद आया है। रिपोर्ट के अनुसार, एक डायरेक्टर ने उनके कार्यकाल को बढ़ाने का समर्थन नहीं किया था। इसके साथ ही टाटा संस के कर्ज और कंपनी की पब्लिक लिस्टिंग को लेकर भी मतभेद बने हुए हैं।

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18 अगस्त की बैठक से पहले बढ़ी अनिश्चितता

टाटा संस की एनुअल मीटिंग 18 अगस्त को होनी है, जहां शेयरहोल्डर्स को चंद्रशेखरन की बोर्ड में दोबारा नियुक्ति पर वोट करना था। बोर्ड में बने रहना उनके चेयरमैन बने रहने के लिए कानूनी तौर पर जरूरी था। हालांकि, ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में कहा गया है कि जरूरी कोरम और रेगुलेटरी अप्रूवल से जुड़ी स्थिति के कारण बैठक तय समय पर हो पाएगी या नहीं, इसे लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है।

टाटा ग्रुप का कारोबार कितना बड़ा

करीब 160 साल पहले जमशेदजी टाटा ने टाटा ग्रुप की शुरुआत की थी। आज ग्रुप का कारोबार कार, स्टील, सॉफ्टवेयर, एयरलाइन और होटल समेत कई सेक्टर में फैला हुआ है। मार्च 2026 तक के 12 महीनों में ग्रुप की 32 कंपनियों का कुल रेवेन्यू करीब 170 अरब डॉलर रहा। टाटा ग्रुप की 26 कंपनियां शेयर बाजार में लिस्टेड हैं।

टाटा संस के हाथ में ग्रुप की कमान

टाटा संस पूरे टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी है। इसके तहत टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स, जगुआर लैंड रोवर, एयर इंडिया, बैटरी कंपनी एग्राटास, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और बिगबास्केट चलाने वाली टाटा डिजिटल जैसे बड़े बिजनेस आते हैं।

टाटा संस में करीब 66% हिस्सेदारी 13 चैरिटेबल ट्रस्ट्स के समूह टाटा ट्रस्ट्स के पास है, जबकि करीब 13% हिस्सेदारी टाटा ग्रुप की कंपनियों के पास है। मार्च 2026 तक के 12 महीनों में टाटा संस का रेवेन्यू 423.67 अरब रुपये यानी करीब 4.44 अरब डॉलर रहा।

चंद्रशेखरन के दौर में तेजी से बढ़ा कारोबार

चंद्रशेखरन टाटा परिवार से बाहर के पहले व्यक्ति थे, जिन्होंने टाटा संस की कमान संभाली। इससे पहले उन्होंने टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज में करीब 30 साल काम किया और आठ साल तक सीईओ रहे। उनके कार्यकाल में टाटा ग्रुप ने आईफोन मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रिक व्हीकल, बैटरी और सेमीकंडक्टर जैसे एडवांस्ड टेक्नोलॉजी सेक्टर में तेजी से निवेश बढ़ाया।

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ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के मुताबिक, ग्रुप की 15 सबसे बड़ी लिस्टेड कंपनियों का रेवेन्यू मार्च 2017 में करीब 6 ट्रिलियन रुपये था, जो मार्च 2026 तक बढ़कर 12.3 ट्रिलियन रुपये हो गया। इसी दौरान इन कंपनियों का प्रॉफिट 360% से ज्यादा बढ़कर 1.66 ट्रिलियन रुपये पहुंच गया।

चुनौतियों के बीच होगा नए चेयरमैन का चुनाव

पिछले एक साल में चंद्रशेखरन के सामने एयर इंडिया हादसा, जगुआर लैंड रोवर पर साइबर अटैक, टीसीएस के लिए एआई से बढ़ती चुनौती और भारत की पहली घरेलू सेमीकंडक्टर चिप तैयार करने जैसी बड़ी जिम्मेदारियां रही हैं।

वहीं, टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा टाटा संस की पब्लिक लिस्टिंग का विरोध करते रहे हैं और कंपनी के कर्ज को लेकर भी चिंता जता चुके हैं। ब्लूमबर्ग के मुताबिक, इन मुद्दों ने टाटा संस के बोर्ड और प्रमुख शेयरहोल्डर्स के बीच मतभेद को और बढ़ाया है।

फिलहाल टाटा संस बोर्ड ने किसी उत्तराधिकारी का नाम शॉर्टलिस्ट नहीं किया है। चंद्रशेखरन फरवरी तक पद पर बने रहेंगे, इसलिए बोर्ड के पास नए चेयरमैन के चयन के लिए कुछ महीनों का समय है। जरूरत पड़ने पर इस बीच एक इंटरिम चेयरमैन की नियुक्ति का विकल्प भी अपनाया जा सकता है।

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