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टाटा संस आईपीओ: शापूर मिस्त्री की 18.4% हिस्सेदारी क्यों है अहम? जानें पूरा मामला

Tata Sons के IPO को लेकर Tata Trusts और अन्य बड़े शेयरधारकों के रुख से मामला चर्चा में है। इसी बीच Shapoorji Pallonji Group के चेयरमैन शापूर मिस्त्री और परिवार की 18.4% हिस्सेदारी अहम हो गई है। अगर कंपनी की लिस्टिंग आगे बढ़ती है, तो इस हिस्सेदारी पर भी बड़ा असर पड़ सकता है।

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AI Generated Image

Tata Sons के आईपीओ को लेकर चल रही खींचतान ने Shapoorji Pallonji Group के चेयरमैन शापूर मिस्त्री की भूमिका को अहम बना दिया है। ब्लूमबर्ग के मुताबिक, मिस्त्री परिवार के पास Tata Sons में 18.4% हिस्सेदारी है। यह कंपनी में किसी अल्पमत शेयरधारक की सबसे बड़ी हिस्सेदारी है।

17 सितंबर को Tata Sons के बोर्ड ने एन चंद्रशेखरन का कार्यकाल पांच साल बढ़ाने और नियामक के निर्देश के मुताबिक कंपनी को शेयर बाजार में लिस्ट कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का फैसला किया। Tata Trusts के चेयरमैन नोएल टाटा ने इन फैसलों का विरोध किया।

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IPO से मिस्त्री परिवार को क्या फायदा?

Shapoorji Pallonji Group के लिए Tata Sons में हिस्सेदारी सबसे कीमती संपत्तियों में है, लेकिन इसे आसानी से कैश में बदलना मुश्किल है। ब्लूमबर्ग के मुताबिक, कंस्ट्रक्शन कारोबार से जुड़े इस समूह पर काफी कर्ज है। ऐसे में Tata Sons की सार्वजनिक लिस्टिंग मिस्त्री परिवार को अपनी हिस्सेदारी का कुछ हिस्सा बेचकर पैसा जुटाने का रास्ता दे सकती है।

मिस्त्री परिवार लंबे समय से Tata Sons को शेयर बाजार में लिस्ट कराने के पक्ष में रहा है। यह मुद्दा तब और महत्वपूर्ण हो गया, जब भारत के बैंकिंग नियामक ने इस महीने Tata Sons को अनिवार्य लिस्टिंग से छूट देने से इनकार कर दिया।

Tata और Mistry परिवारों का पुराना रिश्ता

IPO विवाद सिर्फ कारोबारी हितों तक सीमित नहीं है। Tata और Mistry परिवारों के बीच रिश्ते पुराने और जटिल रहे हैं। नोएल टाटा की पत्नी अलू मिस्त्री, शापूर मिस्त्री की बहन हैं।

हालांकि, 2016 में साइरस मिस्त्री को Tata Sons के चेयरमैन पद से हटाए जाने के बाद दोनों परिवारों के रिश्तों में तनाव बढ़ा। इस फैसले के बाद साइरस मिस्त्री और Tata Group के बीच लंबी कानूनी लड़ाई चली।

18.4% हिस्सेदारी क्यों अहम है?

Tata Trusts के पास Tata Sons की करीब 66% हिस्सेदारी है। इसके मुकाबले मिस्त्री परिवार की 18.4% हिस्सेदारी अल्पमत में होने के बावजूद उसे कंपनी में महत्वपूर्ण प्रभाव देती है।

अगर Tata Sons की लिस्टिंग होती है तो इस हिस्सेदारी को बेचने या इस्तेमाल करने में ज्यादा आसानी हो सकती है। साथ ही, कंपनी के मालिकाना हक और गवर्नेंस में भी बदलाव देखने को मिल सकते हैं। आगे क्या होगा, यह नियामकीय प्रक्रिया, बोर्ड और शेयरधारकों के फैसले और बड़े हिस्सेदारों के रुख पर निर्भर करेगा।