scorecardresearch

चीनी की मिठास हो सकती है महंगी, Business Today के शो में कुणाल शाह ने बताया क्यों बढ़ सकते हैं चीनी के दाम?

अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी की कीमतों में आने वाले महीनों में बड़ी तेजी का अनुमान है। Nirmal Bang Securities के कुणाल शाह का कहना है कि El Niño, भारत और ब्राजील में संभावित कम उत्पादन और ethanol की बढ़ती मांग सप्लाई को दबाव में ला सकती है। कीमतें कहां तक जा सकती हैं, जानिए।

Advertisement

In Short

  • अगले 8-9 महीनों में अंतरराष्ट्रीय चीनी कीमतों में करीब 33% उछाल का अनुमान
  • El Niño के कारण भारत और ब्राजील में चीनी उत्पादन पर दबाव बढ़ने की आशंका
  • भारत का E20 programme गन्ने की ethanol demand बढ़ाकर sugar supply को और सीमित कर सकता है

अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी की कीमतों में आने वाले महीनों में बड़ी तेजी देखने को मिल सकती है। बिजनेस टुडे के शो में सीनियर एंकर शैलेंद्र भटनागर के सवालों का Nirmal Bang Securities के Head of Commodities Trading कुणाल शाह ने जवाब देते हुए कहा कि ग्लोबल सप्लाई में कमी और बढ़ती मांग की वजह से चीनी के दाम मौजूदा 17.5-18 सेंट से बढ़कर 24-25 सेंट तक पहुंच सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो अगले आठ से नौ महीनों में कीमतों में करीब 33 फीसदी तक उछाल आ सकता है।

advertisement

El Niño से बढ़ सकता है सप्लाई का संकट

कुणाल शाह के मुताबिक, चीनी की कीमतों के लिए सबसे बड़ा जोखिम मौसम से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि मजबूत El Niño की वजह से आने वाले समय में चीनी के दाम ऊंचे बने रह सकते हैं और इनमें आगे और तेजी आ सकती है।

चीनी ऐसी कृषि कमोडिटी है, जिस पर मौसम का सीधा असर पड़ता है। बारिश के पैटर्न में लंबे समय तक बदलाव होने से गन्ने की पैदावार, उससे निकलने वाली चीनी की मात्रा और एक्सपोर्ट के लिए उपलब्ध स्टॉक प्रभावित हो सकता है। ऐसे समय में जब सप्लाई पहले से दबाव में हो, मौसम की गड़बड़ी कीमतों को तेजी से ऊपर ले जा सकती है।

ब्राजील और भारत में उत्पादन घटने का अनुमान

शाह का अनुमान है कि ब्राजील और भारत दोनों में चीनी का उत्पादन कमजोर पड़ सकता है। ये दोनों देश ग्लोबल शुगर मार्केट के लिए काफी अहम हैं।

ब्राजील को अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक बड़े सप्लायर के तौर पर देखा जाता है। वहीं भारत में उत्पादन का असर घरेलू उपलब्धता के साथ-साथ एक्सपोर्ट से जुड़ी उम्मीदों पर भी पड़ता है। अगर दोनों देशों में एक साथ उत्पादन घटता है तो अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के लिए सप्लाई और सीमित हो सकती है। 

E20 से बढ़ सकती है गन्ने की मांग

चीनी की कीमतों को सपोर्ट मिलने की दूसरी बड़ी वजह भारत का E20 ethanol blending programme हो सकता है। शाह के मुताबिक, E20 mandate की वजह से crushing और मांग दोनों बढ़ेंगी, जबकि सप्लाई पहले ही सीमित है।

गन्ने का ज्यादा हिस्सा ethanol बनाने में इस्तेमाल होने पर खाने के लिए उपलब्ध चीनी की मात्रा कम हो सकती है। ऐसे में कम उत्पादन और बढ़ती industrial demand मिलकर बाजार पर दोहरा दबाव बना सकते हैं।

सरकार की नीतियों पर भी रहेगी नजर

ग्लोबल कीमतों में तेजी के बावजूद भारत में चीनी के दाम सरकारी फैसलों से प्रभावित हो सकते हैं। बाजार की नजर stock release, export control या import से जुड़े किसी भी फैसले पर रहेगी।

advertisement

कुणाल शाह का अनुमान इस ओर इशारा करता है कि अब चीनी की कीमतें सिर्फ सीजन पर निर्भर नहीं हैं। मौसम का जोखिम और ethanol से जुड़ी मांग आने वाले महीनों में इसके दाम तय करने वाले बड़े फैक्टर बन सकते हैं।