
भारत की GDP ग्रोथ पर नई बहस, ₹6 लाख करोड़ के बदलाव ने डेटा और गणना पर खड़े किए सवाल
भारत की 7.8 फीसदी GDP ग्रोथ को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने मौजूदा कीमतों पर GDP अनुमान में करीब 6 लाख करोड़ रुपये के बदलाव पर सवाल उठाए हैं। वहीं गौरव वल्लभ ने इसे नई पद्धति और डेटा कवरेज का असर बताया।

In Short
- सुभाष गर्ग ने 86 लाख करोड़ से 80 लाख करोड़ रुपये हुए GDP अनुमान पर सवाल उठाया
- गौरव वल्लभ ने कहा बेस ईयर बदलने से आर्थिक गतिविधियों की कवरेज भी बदलती है
- GDP से आगे बढ़कर बहस रोजगार और अच्छी गुणवत्ता वाली नौकरियों के मुद्दे तक पहुंची
भारत की 7.8 फीसदी GDP ग्रोथ के आंकड़े को लेकर पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग और प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य गौरव वल्लभ के बीच तीखी बहस देखने को मिली। इंडिया टुडे टीवी की एक चर्चा में गर्ग ने पुराने GDP अनुमानों में बड़े बदलाव पर सवाल उठाए, जबकि वल्लभ ने इसे डेटा कवरेज और कैलकुलेशन के तरीके में हुए बदलाव का नतीजा बताया।
86 लाख करोड़ से 80 लाख करोड़ कैसे हुआ GDP?
सुभाष चंद्र गर्ग ने कहा कि उनकी मुख्य चिंता GDP के डिफ्लेटर या बेस ईयर में बदलाव को लेकर नहीं है। उनका सवाल यह है कि मौजूदा कीमतों पर GDP का आंकड़ा 86 लाख करोड़ रुपये से घटकर करीब 80 लाख करोड़ रुपये कैसे हो गया।
गर्ग के मुताबिक यह करीब 6 लाख करोड़ रुपये की कमी है और इतने बड़े बदलाव पर सरकार को विस्तार से जानकारी देनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि 2023-24 के मौजूदा कीमतों वाले GDP आंकड़े में भी करीब 6 से 6.5 लाख करोड़ रुपये का बदलाव किया गया है। गर्ग ने इसे असामान्य बताते हुए ऐतिहासिक आंकड़ों की जांच की बात कही।
गौरव वल्लभ ने किया आंकड़ों का बचाव
गौरव वल्लभ ने गर्ग की दलील से असहमति जताई। उन्होंने कहा कि बेस ईयर बदलने का असर सिर्फ कीमतों पर नहीं पड़ता, बल्कि पूरी आर्थिक गतिविधियों की कवरेज भी बदलती है।
वल्लभ के मुताबिक नई पद्धति में नए सर्वे, GST रिकॉर्ड, कंपनियों से जुड़ा बेहतर डेटा और सरकारी रिकॉर्ड शामिल किए गए हैं। उन्होंने कहा कि कुछ फैक्ट्रियां नई गणना में शामिल हो सकती हैं और कुछ बाहर हो सकती हैं। इसलिए 86 लाख करोड़ और 80 लाख करोड़ रुपये के आंकड़ों की सीधे तुलना करना सही नहीं होगा।

गर्ग बोले मौजूदा कीमतों की बात अलग
गर्ग ने कहा कि वह मौजूदा कीमतों पर GDP की बात कर रहे हैं, इसलिए इसमें रियल GDP की गणना वाले डिफ्लेटर का सवाल नहीं आता। उन्होंने कहा कि उनका करीब 2.6 फीसदी ग्रोथ का कैलकुलेशन सरकार के पुराने मौजूदा कीमतों वाले GDP आंकड़े पर आधारित था।
वल्लभ ने जवाब दिया कि इस तरह का कैलकुलेशन यह मानकर चलता है कि आर्थिक गतिविधियों की कवरेज में कोई बदलाव नहीं हुआ, जबकि बेस ईयर बदलने के बाद ऐसा मानना सही नहीं है।
रोजगार के मुद्दे पर भी हुई बहस
बहस GDP से आगे रोजगार के आंकड़ों तक पहुंच गई। गौरव वल्लभ ने निजी खपत में 7.1 फीसदी, ग्रॉस फिक्स्ड कैपिटल फॉर्मेशन में 11.9 फीसदी और रियल एक्सपोर्ट में 12 फीसदी की ग्रोथ का हवाला दिया। उन्होंने बेरोजगारी में कमी की बात भी कही।
वहीं गर्ग ने कहा कि रोजगार में बढ़ोतरी का बड़ा हिस्सा परिवार के कारोबार में बिना वेतन काम करने वालों और कृषि रोजगार से जुड़ा है। उनका कहना था कि इसे अच्छी गुणवत्ता वाली नौकरियों की बढ़ोतरी नहीं माना जा सकता। हालांकि वल्लभ ने भी माना कि बेहतर गुणवत्ता वाली नौकरियां पैदा करना अब भी एक चुनौती है।

