RBI ने डॉलर बेचकर संभाला रुपया! महंगा तेल बढ़ा रहा दबाव, बढ़ी महंगाई की चिंता
रुपया बुधवार को एशिया की उन चुनिंदा मुद्राओं में रहा, जो अधिक फ्यूल कीमतों के बावजूद मजबूत हुईं। हालांकि, साल की शुरुआत से यह एशिया की कमजोर प्रदर्शन करने वाली मुद्राओं में शामिल है।

भारतीय रुपया बुधवार को लगभग स्थिर रहा, जबकि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने डॉलर बेचकर भारतीय करेंसी को सहारा दिया। ब्लूमबर्ग ने अपनी रिपोर्ट में कारोबारियों के हवाले से बताया कि RBI ने ऑनशोर फॉरेन एक्सचेंज बाजार में डॉलर बेचे। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण रुपये पर दबाव बढ़ा है। USD/INR मामूली गिरावट के साथ 95.4075 पर कारोबार कर रहा था।
रुपया बुधवार को एशिया की उन चुनिंदा मुद्राओं में रहा, जो अधिक फ्यूल कीमतों के बावजूद मजबूत हुईं। हालांकि, साल की शुरुआत से यह एशिया की कमजोर प्रदर्शन करने वाली मुद्राओं में शामिल है।
RBI लगातार रुपये को सहारा देने के लिए बाजार में हस्तक्षेप कर रहा है। केंद्रीय बैंक के पास अब हस्तक्षेप के लिए ज्यादा गुंजाइश है, क्योंकि डॉलर डिपॉजिट योजना में मजबूत निवेश से उसके विदेशी मुद्रा भंडार को बढ़ावा मिला है।
SBI के चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर सौम्या कांति घोष ने कहा कि मौजूदा अनिश्चित वैश्विक माहौल में RBI की “calibrated policy response” जरूरी है। उनके मुताबिक, समय पर हस्तक्षेप और संतुलित नीतिगत संकेत छोटी अवधि की अस्थिरता को कम करने और वित्तीय स्थिरता बनाए रखने में मदद करेंगे।
महंगा तेल बढ़ा रहा महंगाई का जोखिम
ब्रेंट क्रूड की कीमत लगातार छठे दिन बढ़ी, जिससे भारत में महंगाई की चिंता बढ़ गई है। भारत अपनी ईंधन जरूरतों के बड़े हिस्से के लिए आयात पर निर्भर है। इसका असर बॉन्ड बाजार पर भी दिखा और 10 साल की बॉन्ड यील्ड 1 बेसिस पॉइंट बढ़कर 6.79% हो गई।
एसटीसीआई प्राथमिक डीलर के आदित्य व्यास समेत विश्लेषकों ने 6.75%-6.77% के स्तर को 10 साल की यील्ड के लिए अहम सपोर्ट बताया है। उनके मुताबिक, इस स्तर के नीचे निर्णायक गिरावट आने पर यील्ड 6.70% तक जा सकती है, जबकि ऊपर की तरफ 6.80% अगला स्तर है।
