स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अनिश्चितता से उछला कच्चा तेल, महंगाई की चिंता बढ़ी, अब अमेरिकी रोजगार आंकड़ों पर नजर
बढ़ती ऊर्जा कीमतों से महंगाई की चिंता बढ़ने के कारण बॉन्ड बाजार में दबाव रहा। ब्लूमबर्ग के रिपोर्ट के मुताबिक अब निवेशकों की नजर अमेरिका के रोजगार आंकड़ों पर है, जिनसे फेडरल रिजर्व की अगली ब्याज दर नीति के संकेत मिल सकते हैं।

In Short
- स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर अनिश्चितता के बीच ब्रेंट क्रूड 1.4% चढ़कर 83.65 डॉलर प्रति बैरल पहुंचा।
- तेल महंगा होने से महंगाई की चिंता बढ़ी, अमेरिकी समेत कई देशों के बॉन्ड बाजार पर दबाव देखने को मिला।
- अब निवेशकों की नजर अमेरिकी NFP (रोजगार) रिपोर्ट पर है, जिससे फेड की ब्याज दरों की अगली दिशा तय हो सकती है।
मध्य पूर्व में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलने को लेकर अनिश्चितता के बीच शुक्रवार को कच्चे तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की गई। वहीं बढ़ती ऊर्जा कीमतों से महंगाई की चिंता बढ़ने के कारण बॉन्ड बाजार में दबाव रहा। ब्लूमबर्ग के रिपोर्ट के मुताबिक अब निवेशकों की नजर अमेरिका के रोजगार आंकड़ों पर है, जिनसे फेडरल रिजर्व की अगली ब्याज दर नीति के संकेत मिल सकते हैं।
ब्रेंट क्रूड में 1.4% की तेजी
वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 1.4 फीसदी चढ़कर 83.65 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। हालांकि, सप्ताह के दौरान यह अभी भी करीब 5 फीसदी नीचे बना हुआ है। इससे पहले अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते की उम्मीद में तेल की कीमतों में गिरावट आई थी। मध्य पूर्व में समझौते को लेकर स्पष्टता नहीं होने से ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बनी हुई है, जिससे तेल की कीमतों को समर्थन मिला।
महंगाई की चिंता से बॉन्ड पर दबाव
ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी ने महंगाई को लेकर चिंता फिर बढ़ा दी है। इसके चलते अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड फ्यूचर्स में गिरावट आई। 10 साल की अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड 4.68 फीसदी पर बनी रही, जो पिछले कारोबारी सत्र में सात बेसिस प्वाइंट बढ़ी थी। जापान, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के 10 वर्षीय सरकारी बॉन्ड भी दबाव में रहे।
रोजगार रिपोर्ट तय करेगी बाजार की दिशा
निवेशकों का फोकस अब आज आने वाली अमेरिकी नॉन-फार्म पेरोल (NFP) रिपोर्ट पर है। ब्लूमबर्ग के सर्वे के अनुसार जुलाई में अमेरिका में 80,000 नई नौकरियां जुड़ने का अनुमान है, जबकि जून में यह आंकड़ा 57,000 रहा था।
अगर रोजगार के आंकड़े उम्मीद से बेहतर आते हैं तो फेडरल रिजर्व के लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरें बनाए रखने की संभावना मजबूत हो सकती है। वहीं कमजोर आंकड़े बॉन्ड बाजार में राहत ला सकते हैं और इस साल के अंत में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद बढ़ा सकते हैं।
