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NSE IPO बनाम रिलायंस जियो IPO: इश्यू साइज की तुलना। कौन रचेगा, शेयर बाजार का नया इतिहास?

भारतीय शेयर बाजार में दो सबसे चर्चित NSE और रिलायंस JIO IPO लिस्टिंग की तैयारी में हैं। एक तरफ देश का सबसे बड़ा एक्सचेंज National Stock Exchange है, तो दूसरी तरफ टेलीकॉम दिग्गज Reliance Jio। दोनों इश्यू साइज और वैल्यूएशन के मामले में बाजार में नया रिकॉर्ड बना सकते हैं। पढ़िए पूरी स्टोरी..

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विकल्प व्यापार में मजबूत वृद्धि के कारण अप्रैल 2019 और अप्रैल 2026 के बीच एनएसई का राजस्व दोगुने से अधिक बढ़कर लगभग 18,700 करोड़ रुपये हो गया। चित्र स्रोत: (प्रतिनिधि उद्देश्यों के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता से निर्मित छवि)
विकल्प व्यापार में मजबूत वृद्धि के कारण अप्रैल 2019 और अप्रैल 2026 के बीच एनएसई का राजस्व दोगुने से अधिक बढ़कर लगभग 18,700 करोड़ रुपये हो गया। चित्र स्रोत: (प्रतिनिधि उद्देश्यों के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता से निर्मित छवि)

In Short

  • NSE बनाम Jio IPO की क्यों हो रही है चर्चा?
  • NSE और Jio IPO से हिलेगा बाजार, 2026 में रिकॉर्ड लिस्टिंग की तैयारी
  • कौन बनाएगा शेयर बाजार का नया इतिहास?
  • IPO का महायुद्ध, NSE और Jio की टक्कर

भारतीय बाजार में दो सबसे बड़े और बहुप्रतीक्षित लिस्टिंग—NSE IPO और रिलायंस जियो IPO की चर्चा ज़ोरो पर है। एक तरफ देश का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज National Stock Exchange है, तो दूसरी तरफ भारत की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी Reliance Jio। दोनों ही आईपीओ न सिर्फ साइज के मामले में रिकॉर्ड बनाने की ओर बढ़ रहे हैं, बल्कि भारतीय पूंजी बाजार की दिशा भी तय कर सकते हैं।

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हाल ही में एनएसई ने सेबी के पास डीआरएचपी दाखिल किया है, जिसके बाद इसके आईपीओ का इश्यू साइज करीब 30,000 करोड़ रुपये आंका जा रहा है। अनुमान के मुताबिक इस लिस्टिंग के बाद एनएसई का मार्केट कैप 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है। एनएसई के करीब 1.8 लाख शेयरधारक हैं और अप्रैल 2019 से अप्रैल 2026 के बीच कंपनी का राजस्व 18,700 करोड़ रुपये तक दोगुना हो चुका है। ऑप्शन ट्रेडिंग में मजबूत ग्रोथ इसकी सबसे बड़ी ताकत मानी जा रही है।

वहीं दूसरी ओर रिलायंस जियो का आईपीओ पर भी नज़र टिकी है। इसका संभावित वैल्यूएशन करीब 4 अरब डॉलर यानी करीब 37,776 करोड़ रुपये हो सकता है। हालांकि, अंतिम आंकड़ा बाद में तय होगा। निवेश बैंक जेफरीज ने पिछले साल जियो का वैल्यूएशन 180 अरब डॉलर तक आंका था। 

अगर तुलना करें तो एनएसई आईपीओ इश्यू साइज के हिसाब से जियो से आगे निकल सकता है और भारत का सबसे बड़ा आईपीओ बन सकता है। वहीं, जियो अपने विशाल यूजर बेस और टेलीकॉम मार्केट में दबदबे के कारण निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा।

इसके अलावा बाजार में पहले से आए बड़े आईपीओ—जैसे हुंडई मोटर इंडिया, एलआईसी, पेटीएम और टाटा कैपिटल—ने भी निवेशकों को अलग-अलग अनुभव दिए हैं। कुछ ने मजबूत लिस्टिंग की, जबकि कुछ ने बाजार में दबाव का सामना किया। यह इतिहास आने वाले मेगा आईपीओ के लिए निवेशकों की रणनीति को और महत्वपूर्ण बना देता है।

NSE और JIO IPO का बड़ा डेवलपमेंट

एनएसई ने सेबी के पास डीआरएचपी दाखिल कर दिया है, जिससे इसके 30,000 करोड़ रुपये के आईपीओ की प्रक्रिया तेज हो गई है। वहीं जियो आईपीओ का आकार लगभग 37,776 करोड़ रुपये तक बताया जा रहा है। दोनों ही इश्यू 2026 में बाजार में आ सकते हैं और भारत के सबसे बड़े आईपीओ में शामिल हो सकते हैं।

निवेशकों पर असर और आगे की तस्वीर

National Stock Exchange of India भारतीय इक्विटी और डेरिवेटिव ट्रेडिंग का सबसे बड़ा प्लेटफॉर्म है, जबकि Reliance Jio देश की टेलीकॉम इंडस्ट्री में सबसे बड़ा नाम है। दोनों कंपनियों का प्रभाव सीधे-सीधे निवेश बाजार और रिटेल इन्वेस्टर्स की भागीदारी पर पड़ता है। अगर ये दोनों आईपीओ बाजार में आते हैं, तो भारतीय कैपिटल मार्केट में लिक्विडिटी और रिटेल भागीदारी में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है। साथ ही, इन लिस्टिंग्स के बाद सेक्टर-वार वैल्यूएशन और निवेश रणनीतियों में भी बदलाव संभव है।

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एनएसई की मजबूत ग्रोथ का आधार ऑप्शन ट्रेडिंग और डेरिवेटिव सेगमेंट रहा है, जिससे इसका राजस्व लगातार बढ़ा है। वहीं जियो ने डिजिटल इंडिया और डेटा क्रांति में अहम भूमिका निभाई है। एलआईसी, पेटीएम, हुंडई मोटर इंडिया और टाटा कैपिटल जैसे बड़े आईपीओ ने पिछले कुछ वर्षों में बाजार की दिशा और निवेशकों की धारणा दोनों को प्रभावित किया है।