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UPI MDR पर GST का क्या होगा असर? NPCI ने बताया छोटे व्यापारियों के लिए क्या बदलेगा और क्या नहीं

NPCI ने UPI MDR पर GST को लेकर उठ रहे सवालों पर सफाई दी है। आखिर क्यों नहीं बढ़ेगा छोटे व्यापारियों पर बोझ? जानिए कैसे GST सिर्फ MDR शुल्क पर लगेगा और 2,000 रुपये तक के ज्यादातर UPI लेनदेन रहेंगे इससे बाहर। पूरी जानकारी के लिए पढ़ें पूरी खबर।

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In Short

  • NPCI ने साफ किया कि GST UPI लेनदेन की पूरी रकम पर नहीं, बल्कि MDR सेवा शुल्क पर लगेगा।
  • 2,000 रुपये तक के UPI मर्चेंट लेनदेन पर MDR शून्य रहेगा, जिससे ज्यादातर छोटे व्यापारी प्रभावित नहीं होंगे।
  • GST रजिस्टर्ड व्यापारी MDR पर दिए गए GST का इनपुट टैक्स क्रेडिट लेकर अपनी टैक्स देनदारी कम कर सकते हैं।

नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने UPI लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर जारी चिंताओं को स्पष्ट किया है। NPCI ने उन रिपोर्टों को गलत बताया है, जिनमें कहा गया था कि UPI MDR पर GST लगने से छोटे व्यापारियों के लिए डिजिटल पेमेंट महंगा हो जाएगा।

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NPCI के मुताबिक, GST सिर्फ MDR यानी डिजिटल पेमेंट सेवा के लिए लिए जाने वाले शुल्क पर लागू होगा, न कि UPI से होने वाले पूरे लेनदेन की राशि पर।

2000 रुपये से ज्यादा के पेमेंट पर लागू होगा MDR

NPCI के अनुसार, 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से ज्यादा के व्यापारी भुगतान (P2M) पर 0.4% MDR लागू होगा। इसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये तय की गई है। वहीं रेलवे, टेलीकॉम सर्विसेज, बीमा और ईंधन जैसी कैटेगरी में 2,000 रुपये से ज्यादा के लेनदेन पर 5 रुपये का रियायती MDR लागू होगा।

MDR वह शुल्क है जो पेमेंट प्रक्रिया और निपटान सेवाओं के लिए लिया जाता है। इसका भुगतान बड़े व्यापारियों की ओर से किया जाता है। इस सेवा शुल्क पर 18% GST लगेगा।

उदाहरण के तौर पर, अगर 10,000 रुपये के लेनदेन पर 0.4% MDR लगता है तो शुल्क 40 रुपये होगा। ऐसे में 18% GST पूरे 10,000 रुपये पर नहीं, बल्कि सिर्फ 40 रुपये के MDR पर लगेगा।

96% से ज्यादा UPI लेनदेन MDR से बाहर

NPCI ने बताया कि 2,000 रुपये तक के लेनदेन पर MDR शून्य रहेगा और इस पर GST भी लागू नहीं होगा। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, UPI मर्चेंट लेनदेन की कुल संख्या में 96% से ज्यादा लेनदेन इसी श्रेणी में आते हैं।

NPCI ने कहा कि जिन व्यापारियों को UPI के जरिए हर महीने 1 लाख रुपये तक की इनकम मिलती है, उन्हें MDR का भुगतान नहीं करना होगा। इसका मतलब है कि इस सीमा के अंदर आने वाले छोटे व्यापारियों पर MDR से जुड़े GST का असर नहीं पड़ेगा।

प्रतीकात्मक तस्वीर

इनपुट टैक्स क्रेडिट से मिल सकती है राहत

टैक्स एक्सपर्ट्स के अनुसार, GST रजिस्टर्ड व्यापारी MDR पर दिए गए GST का इनपुट टैक्स क्रेडिट ले सकते हैं। इसका इस्तेमाल वे अपनी आउटपुट GST देनदारी को कम करने में कर सकते हैं।

हालांकि, यह सुविधा व्यापारी की टैक्स स्थिति और कारोबार की प्रकृति पर निर्भर करेगी। टैक्स फ्री वस्तुओं या सेवाओं का कारोबार करने वाले व्यापारी इस क्रेडिट का फायदा नहीं उठा पाएंगे और उन्हें MDR पर GST की लागत उठानी पड़ सकती है।

MDR से GST कलेक्शन हजारों करोड़ तक पहुंचने का अनुमान

टैक्स एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि MDR पर GST से सरकार को सालाना कई हजार करोड़ रुपये का राजस्व मिल सकता है। एक अनुमान के मुताबिक, 2,000 रुपये से ज्यादा के मासिक व्यापारी भुगतान और 0.4% MDR के आधार पर संभावित GST कलेक्शन करीब 5,184 करोड़ रुपये सालाना हो सकता है।

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हालांकि, वास्तविक कलेक्शन रियायती MDR दरों, ट्रांजेक्शन लिमिट और व्यापारियों की ओर से लिए जाने वाले इनपुट टैक्स क्रेडिट पर निर्भर करेगा।

NPCI ने कहा कि MDR पर GST लागू होने से छोटे व्यापारियों पर बड़े असर की चिंता सही नहीं है, क्योंकि ज्यादातर UPI लेनदेन और छोटे व्यापारी इस दायरे से बाहर रहेंगे।