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मुंबई-दिल्ली भी रह गए पीछे! भारत के इन छोटे शहरों में लोग कर रहे हैं सबसे ज्यादा खर्च

भारत में सबसे ज्यादा खर्च करने वाले शहरों की तस्वीर बदल रही है। बड़े महानगरों के बीच कुछ छोटे शहरों ने अपनी अलग पहचान बनाई है। रिपोर्ट में सामने आया है कि घरेलू खर्च के मामले में कौन से शहर आगे हैं और क्यों बदल रही है देश की खपत की कहानी, जानिए पूरी रिपोर्ट में।

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In Short

  • भारत में प्रति परिवार सबसे ज्यादा खर्च करने वाले शहरों में बड़े महानगर नहीं, बल्कि चंडीगढ़ और तिरुवनंतपुरम जैसे शहर आगे हैं।
  • रिपोर्ट के मुताबिक, अमृतसर, अहमदाबाद और जबलपुर में भी औसत घरेलू खर्च मुंबई से ज्यादा है।
  • मुंबई और दिल्ली जैसे बड़े शहर कुल खपत में आगे हैं, लेकिन छोटे शहरों की खर्च करने की क्षमता तेजी से बढ़ रही है।

भारत में जब भी सबसे बड़े कंज्यूमर मार्केट की बात होती है तो मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों का नाम सबसे पहले आता है। लेकिन अगर बात हर घर के औसत खर्च की करें तो तस्वीर काफी अलग नजर आती है। एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के सबसे ज्यादा खर्च करने वाले शहरों में देश के छह बड़े महानगरों में से एक भी शहर टॉप-5 में शामिल नहीं है।

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PRICE और Tata Sons Research की रिपोर्ट ‘The Many Urban Indias’ के अनुसार, प्रति परिवार औसत खपत के मामले में चंडीगढ़ सबसे आगे है। इसके बाद तिरुवनंतपुरम का नंबर आता है। वहीं अमृतसर, अहमदाबाद और जबलपुर जैसे शहरों में भी प्रति परिवार खर्च मुंबई से ज्यादा है।

चंडीगढ़ में सबसे ज्यादा घरेलू खपत

रिपोर्ट के मुताबिक, चंडीगढ़ भारत का सबसे ज्यादा घरेलू खर्च वाला शहर है। आबादी के लिहाज से इसे Frontier City की श्रेणी में रखा गया है। यहां औसत घरेलू आय करीब 28.3 लाख रुपये सालाना है, जो बेंगलुरु के बराबर है।

तिरुवनंतपुरम भी घरेलू खपत के मामले में दूसरे स्थान पर है। रिपोर्ट में बताया गया है कि इन दोनों शहरों में औसत घरेलू खपत सबसे ज्यादा है। साथ ही यहां लोगों की आर्थिक स्थिति मजबूत है, क्योंकि बचत ज्यादा और कर्ज का स्तर कम है।

अमृतसर, अहमदाबाद और जबलपुर भी ऐसे शहर हैं जहां प्रति परिवार खर्च मुंबई से ज्यादा है। हालांकि रिपोर्ट में इन तीनों शहरों की सटीक रैंकिंग नहीं बताई गई है।

मुंबई बड़ा बाजार, लेकिन खर्च में पीछे

इसका मतलब यह नहीं है कि मुंबई की अहमियत कम हो गई है। मुंबई अभी भी भारत के सबसे बड़े कंज्यूमर मार्केट में शामिल है, क्योंकि यहां आबादी और ज्यादा कमाई करने वाले परिवारों की संख्या काफी बड़ी है।

रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई के एक औसत परिवार की सालाना आय करीब 24.2 लाख रुपये है और खर्च लगभग 14 लाख रुपये सालाना है। लेकिन छोटे शहरों में प्रति परिवार ज्यादा खर्च यह दिखाता है कि भारत की खपत की कहानी अब सिर्फ बड़े महानगरों तक सीमित नहीं है।

प्रतीकात्मक तस्वीर

दिल्ली NCR और बड़े शहरों की ताकत

दिल्ली NCR में करीब 75 लाख परिवार हैं, जबकि मुंबई में 46-47 लाख परिवार हैं। दिल्ली NCR में औसत घरेलू खर्च करीब 15 लाख रुपये सालाना है। इसी वजह से दिल्ली NCR करीब 126 अरब डॉलर का कंज्यूमर मार्केट बनता है।

भारत के छह बड़े शहरों — दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई, कोलकाता और हैदराबाद — मिलकर रिपोर्ट में शामिल 100 शहरों की कुल खपत का करीब 46% हिस्सा रखते हैं।

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सूरत, अहमदाबाद और पुणे भी बन रहे बड़े बाजार

रिपोर्ट में सूरत, अहमदाबाद और पुणे को तेजी से बढ़ते कंज्यूमर मार्केट के तौर पर बताया गया है। इन तीनों शहरों का बाजार करीब 30 अरब डॉलर का है।

सूरत खास तौर पर चर्चा में है। Big Six शहरों के बाहर यह भारत का सबसे बड़ा कंज्यूमर मार्केट है। यहां औसत घरेलू खर्च बेंगलुरु से भी ज्यादा है। रिपोर्ट के मुताबिक, टेक्सटाइल कारोबार, डायमंड इंडस्ट्री और प्रवासी परिवारों की आर्थिक तरक्की ने सूरत की खपत बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई है।

भारत के 100 शहरों में 844 अरब डॉलर की खपत

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के टॉप 100 शहर देश की सिर्फ 19% आबादी रखते हैं, लेकिन ये 35% आय और 31% खपत में योगदान देते हैं। इन शहरों में कुल सालाना खर्च करीब 844 अरब डॉलर है।

रिपोर्ट के अनुसार, अगर इन 100 शहरों को एक देश माना जाए तो यह दुनिया का 14वां सबसे बड़ा कंज्यूमर मार्केट होता।

शहरों में बढ़ती आय और मध्यम वर्ग के विस्तार ने इस बदलाव को तेज किया है। पिछले एक दशक में मध्यम आय वाले परिवारों की हिस्सेदारी 29% से बढ़कर 53% हो गई है। वहीं, ज्यादा आय वाले परिवारों की हिस्सेदारी भी तेजी से बढ़ी है। इससे साफ है कि भारत की खपत अब सिर्फ बड़े महानगरों की कहानी नहीं रह गई है, बल्कि छोटे और मध्यम शहर भी इसमें बड़ी भूमिका निभा रहे हैं।

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