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TCS इंटर्न से Tata Sons चेयरमैन तक: N Chandrasekaran की प्रेरणादायक कामयाबी की कहानी

एक किसान परिवार से निकलकर देश के सबसे बड़े कारोबारी समूह की कमान संभालने तक N Chandrasekaran का सफर बेहद खास रहा है। TCS में इंटर्न के तौर पर शुरुआत करने वाले चंद्रा आज Tata Sons के चेयरमैन हैं। उनके नेतृत्व में Tata Group ने Air India अधिग्रहण से लेकर सेमीकंडक्टर और हाई-टेक सेक्टर तक विस्तार किया।

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TCS इंटर्न से Tata Group के पहले गैर-पारसी प्रोफेशनल चेयरमैन तक का सफर।
TCS इंटर्न से Tata Group के पहले गैर-पारसी प्रोफेशनल चेयरमैन तक का सफर।

In Short

  • N Chandrasekaran ने 1987 में TCS में इंटर्न के तौर पर शुरू किया था करियर
  • 2017 में बने Tata Group के पहले गैर-पारसी प्रोफेशनल चेयरमैन
  • Air India की Tata Group में वापसी और सेमीकंडक्टर निवेश उनके कार्यकाल की बड़ी उपलब्धियां रहीं

नटराजन चंद्रशेखरन, जिन्हें कॉरपोरेट जगत में चंद्रा के नाम से जाना जाता है, ने एक छोटे शहर से निकलकर भारत के सबसे बड़े कारोबारी समूहों में से एक Tata Group के चेयरमैन बनने तक का लंबा सफर तय किया है। 17 सितंबर को उन्हें Tata Sons के Executive Chairman के तौर पर अगले पांच साल के लिए दोबारा नियुक्त किया गया।

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2 जून 1963 को तमिलनाडु के मोहनूर में जन्मे चंद्रशेखरन एक किसान परिवार से आते हैं। वह छह भाई-बहनों में सबसे छोटे थे। बचपन में वह अपने भाई-बहनों के साथ रोजाना करीब 3 किलोमीटर पैदल चलकर तमिल माध्यम के सरकारी स्कूल जाते थे। इसके बाद उन्होंने उच्च शिक्षा हासिल की।

उन्होंने कोयंबटूर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से एप्लाइड साइंसेज में ग्रेजुएशन किया और बाद में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी तिरुचिरापल्ली से कंप्यूटर एप्लीकेशन में मास्टर डिग्री (MCA) पूरी की।

TCS में इंटर्न से CEO तक का सफर

चंद्रशेखरन ने अपने करियर की शुरुआत 1987 में Tata Consultancy Services (TCS) में इंटर्न के तौर पर की थी। धीरे-धीरे उन्होंने कंपनी में कई जिम्मेदारियां संभालीं और 2009 में TCS के CEO बने।

उनके नेतृत्व में TCS ने तेजी से विकास किया और Tata Group की सबसे मजबूत कंपनियों में शामिल हुई। TCS की सफलता ने चंद्रशेखरन को ग्रुप के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचने में अहम भूमिका निभाई।

Tata Group संकट के बीच संभाली कमान

2017 में चंद्रशेखरन Tata Group के प्रमुख बने। वह Tata Group का नेतृत्व करने वाले पहले गैर-पारसी प्रोफेशनल एग्जीक्यूटिव बने। उनका कार्यकाल ऐसे समय शुरू हुआ जब ग्रुप Cyrus Mistry के हटने के बाद बड़े कॉरपोरेट विवाद से गुजर रहा था।

रतन टाटा ने चंद्रशेखरन को एक प्रोफेशनल लीडर के तौर पर चुना, जो ग्रुप में स्थिरता ला सकें। इस दौरान Tata Sons और Cyrus Mistry के बीच कानूनी लड़ाई भी चली।

मार्च 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने Tata Sons के पक्ष में फैसला सुनाया और NCLAT के उस आदेश को रद्द कर दिया जिसमें Cyrus Mistry की दोबारा नियुक्ति की बात कही गई थी।

चंद्रशेखरन के कार्यकाल की बड़ी उपलब्धियां

चंद्रशेखरन के कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक Air India की Tata Group में वापसी रही। 69 साल बाद 2022 में एयरलाइन दोबारा Tata Group का हिस्सा बनी। Tata Sons ने ₹18,000 करोड़ की बोली लगाकर सरकार से Air India का अधिग्रहण किया।

इसके अलावा उन्होंने Air India, Vistara और AirAsia India के विलय और एकीकरण की प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने Tata Consumer Products के गठन में भी योगदान दिया, जिसमें Tata Tea और Tata Chemicals के कंज्यूमर प्रोडक्ट बिजनेस को जोड़ा गया।

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चंद्रशेखरन के नेतृत्व में Tata Group ने सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग, बैटरी सेल उत्पादन और हाई-टेक इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे नए क्षेत्रों में भी निवेश बढ़ाया।

एक TCS इंटर्न से Tata Sons के चेयरमैन तक का उनका सफर टेक्नोलॉजी, नेतृत्व क्षमता और Tata Group के साथ चार दशक से ज्यादा लंबे जुड़ाव की कहानी है।