पुराना घर, प्लॉट या सोना बेचने का है प्लान? सरकार के इस फैसले से हजारों नहीं, लाखों का टैक्स बच सकता है
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) की ओर से जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक, पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में CII 376 था। हर साल सरकार महंगाई को ध्यान में रखते हुए इस इंडेक्स को अपडेट करती है। इसका सीधा असर उन लोगों पर पड़ता है, जो पुरानी प्रॉपर्टी, सोना, ज्वेलरी या कुछ दूसरी लॉन्ग-टर्म कैपिटल एसेट्स बेचते हैं।

In Short
- सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए Cost Inflation Index (CII) बढ़ाकर 384 कर दिया है, जो पिछले साल 376 था।
- नए CII की वजह से इंडेक्सेशन का लाभ लेने वाले टैक्सपेयर्स का लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स कम हो सकता है।
- पुराना घर, प्लॉट, सोना और अन्य पात्र लॉन्ग-टर्म एसेट बेचने वालों को टैक्स बचाने का बड़ा फायदा मिल सकता है।
अगर आप इस साल पुराना घर, प्लॉट या सोना बेचने का प्लान कर रहे हैं तो आपकी चांदी होने वाली है। आयकर विभाग ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कॉस्ट इन्फ्लेशन इंडेक्स (CII) बढ़ाकर 384 कर दिया है। इस बदलाव से इंडेक्सेशन का फायदा लेने वाले टैक्सपेयर्स का लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स कम हो सकता है। इस मतलब प्रॉपर्टी बेचने पर अब आप ज्यादा टैक्स बचा सकेंगे।
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) की ओर से जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक, पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में CII 376 था। हर साल सरकार महंगाई को ध्यान में रखते हुए इस इंडेक्स को अपडेट करती है। इसका सीधा असर उन लोगों पर पड़ता है, जो पुरानी प्रॉपर्टी, सोना, ज्वेलरी या कुछ दूसरी लॉन्ग-टर्म कैपिटल एसेट्स बेचते हैं।
आखिर CII होता क्या है?
आसान भाषा में समझें तो Cost Inflation Index आपकी खरीद कीमत को महंगाई के हिसाब से बढ़ाकर दिखाता है। इससे यह पता चलता है कि आपको असल में कितना मुनाफा हुआ है। यानी टैक्स सिर्फ वास्तविक कमाई पर लगता है, सिर्फ इसलिए नहीं कि समय के साथ एसेट की कीमत बढ़ गई।
यही वजह है कि CII बढ़ने पर कई मामलों में टैक्सेबल लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन कम हो जाता है और टैक्स का बोझ भी घट सकता है।
किन एसेट्स पर मिलेगा फायदा?
नया CII उन एसेट्स पर लागू होगा, जहां मौजूदा टैक्स नियमों के तहत इंडेक्सेशन का फायदा मिलता है। इनमें अचल संपत्ति, ज्वेलरी और कुछ सिक्योरिटीज शामिल हैं। इन एसेट्स को बेचते समय खरीद कीमत को महंगाई के हिसाब से एडजस्ट किया जाएगा, जिससे टैक्स की गणना ज्यादा सही तरीके से हो सकेगी।
कब माना जाता है लॉन्ग-टर्म एसेट?
हर एसेट के लिए यह अवधि अलग होती है। अगर आपने कोई घर, फ्लैट, प्लॉट या अन-लिस्टेड शेयर 24 महीने से ज्यादा समय तक अपने पास रखा है, तो उसे लॉन्ग-टर्म एसेट माना जाता है। लिस्टेड सिक्योरिटीज के लिए यह अवधि 12 महीने है, जबकि ज्यादातर दूसरे कैपिटल एसेट्स के लिए कम से कम 36 महीने तक होल्ड करना जरूरी होता है।
टैक्सपेयर्स के लिए क्यों है अहम?
अगर आप इस वित्त वर्ष में कोई योग्य लॉन्ग-टर्म कैपिटल एसेट बेचने वाले हैं, तो कैपिटल गेन निकालते समय नया CII 384 लागू होगा। इससे खरीद कीमत महंगाई के हिसाब से ज्यादा मानी जाएगी और कई मामलों में टैक्सेबल गेन कम निकल सकता है। यानी इंडेक्सेशन का लाभ मिलने पर आपकी टैक्स देनदारी पहले के मुकाबले कम हो सकती है।

