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Rajesh Exports में LIC की 10.80% हिस्सेदारी! जनता के ₹334 करोड़ पर मडंरा रहा खतरा

मार्च 2026 तिमाही के आंकड़ों के मुताबिक देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी Life Insurance Corporation of India (LIC) के पास Rajesh Exports में 10.80% हिस्सेदारी थी यानी LIC के पास 334 करोड़ रुपये के शेयर हैं। आसान शब्दों में कहें तो LIC ने जनता के 334 करोड़ रुपये इस कंपनी के शेयर में लगा रखा था।

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सोना रिफाइनिंग और ज्वेलरी कारोबार से जुड़ी कंपनी Rajesh Exports पर सेबी की सख्त कार्रवाई के बीच उसके शेयरहोल्डिंग पैटर्न ने भी बाजार का ध्यान खींचा है।

मार्च 2026 तिमाही के आंकड़ों के मुताबिक देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी Life Insurance Corporation of India (LIC) के पास Rajesh Exports में 10.80% हिस्सेदारी थी यानी LIC के पास 334 करोड़ रुपये के शेयर हैं। आसान शब्दों में कहें तो LIC ने जनता के 334 करोड़ रुपये इस कंपनी के शेयर में लगा रखा था।

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शेयरहोल्डिंग डेटा से यह भी पता चलता है कि पिछले तीन साल में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने कंपनी में अपनी हिस्सेदारी लगातार घटाई है। Trendlyne के आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2023 में FIIs की हिस्सेदारी 17.6% थी, जो मार्च 2026 तक घटकर करीब 14.3% रह गई।

किन निवेशकों के पास है हिस्सेदारी?

मार्च 2026 तिमाही के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी निवेशकों में Bridge India Fund के पास 8.46% हिस्सेदारी थी, जबकि Schwab Fundamental Emerging Markets Equity ETF की हिस्सेदारी 2.70% रही।

ये खबर पढ़ना ना भूलें: Explained: सेबी ने अपने ऑर्डर में Rajesh Exports पर क्या-क्या आरोप लगाएं? शेयर में आज लगा लोअर सर्किट

इसके अलावा, धीरजलाल जेरामभाई धाकण के पास कंपनी में 4.81% हिस्सेदारी थी। वहीं प्रमोटर समूह की हिस्सेदारी 54.55% पर कायम रही।

SEBI ने क्या आरोप लगाए?

सेबी ने अपनी अंतरिम जांच में आरोप लगाया है कि वित्त वर्ष 2021 से 2025 के बीच कंपनी ने अपनी विदेशी सहायक कंपनियों से जुड़े लगभग ₹15.15 लाख करोड़ के राजस्व को गलत तरीके से दर्शाया। यह आंकड़ा सब्सिडियरी से प्राप्त कुल राजस्व का 99.80% था।

रेगुलेटर के अनुसार, कंपनी की कुल समेकित आय का 97% से 99% हिस्सा विदेशी इकाइयों, खासकर स्विट्जरलैंड स्थित Valcambi SA से आने का दावा किया गया, लेकिन संबंधित वित्तीय विवरण सार्वजनिक रूप से नियमित रूप से उपलब्ध नहीं कराए गए।

सेबी ने यह भी आरोप लगाया कि Rajesh Exports ने प्रमोटर राजेश मेहता से जुड़े खातों में ₹338.90 करोड़ ट्रांसफर किए, जिनमें उनके निजी डेरिवेटिव ट्रेड भी शामिल थे। इसके लिए न तो बोर्ड और ऑडिट समिति की मंजूरी ली गई और न ही उचित संबंधित-पक्ष (Related Party) खुलासे किए गए।

कंपनी ने आरोपों से किया इनकार

Rajesh Exports ने अपने स्पष्टीकरण में कहा है कि सेबी का आदेश अंतरिम है और रेगुलेटर ने अभी किसी भी मुद्दे पर अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला है।

कंपनी ने कहा कि उसके द्वारा घोषित राजस्व सही है और राजस्व को बढ़ाकर नहीं दिखाया गया है। साथ ही कंपनी ने कहा कि वह सेबी को सभी जरूरी और संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराकर सभी बिंदुओं पर स्पष्टीकरण देने की प्रक्रिया में है।

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सेबी का अनुमान है कि कथित वित्तीय गड़बड़ियों और फंड डायवर्जन के कारण कंपनी के शेयरधारकों, जिनमें रिटेल निवेशक भी शामिल हैं, को ₹12,725.53 करोड़ की संपत्ति हानि हुई है।