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कैलिफोर्निया और फ्लोरिडा में गूगल क्यों छोड़ना चाहता है 3.20 करोड़ मच्छर! जानिए वजह

गूगल का 3.20 करोड़ मच्छर छोड़ने वाला प्रोजेक्ट दुनिया भर में चर्चा में है। कंपनी का दावा है कि ये खास बांझ नर मच्छर मच्छरों की आबादी घटाने और बीमारियों को रोकने में मदद करेंगे। AI और बायोटेक्नोलॉजी से जुड़ा यह प्रोजेक्ट कैसे काम करेगा, 95% तक आबादी कैसे घटी और EPA की मंजूरी के बाद क्या होगा—जानिए पूरी कहानी।

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AI Generated Image

Google Mosquito Project 2026: गूगल जिसे हम आमतौर पर सर्च, एंड्रॉइड और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए जानते हैं। अब एक ऐसे प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है जानकर आप की एक पल की लिए जरूर हैरान होंगे।

दरअसल गूगल अमेरिका के कैलिफोर्निया और फ्लोरिडा में अगले दो सालों में 32 मिलियन करीब 3.20 करोड़ मच्छर छोड़ने के लिए अनुमति मांग रहा है। यह प्रोजेक्ट गूगल की बायोटेक कंपनी 'वेरिली' के 'डिबग प्रोजेक्ट' का हिस्सा है जिसका मकसद मच्छर की आबादी को कम करना और मच्छर से होने वाली बीमारियों को रोकना है।

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किस तरीके से काम करेगा यह प्रोजेक्ट?

इस प्रोजेक्ट का मकसद मच्छरों की संख्या बढ़ाना नहीं है, बल्कि समय के साथ घटाना है। प्रोजेक्ट के तहत जो मच्छर छोड़े जाएंगे। वह बांझ नर मच्छर होंगे यानि यह नाॅर्मल मच्छर की तरह अपनी जनसंख्या नहीं बढ़ा सकते है जब ये मच्छर जंगली मादा मच्छरों से मिलते हैं, तो उनके अंडे विकसित नहीं होते जिससे इनकी कुल आबादी धीरे-धीरे कम होने शुरू हो जाएगी।

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इन मच्छरों में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाला बैक्टीरिया वोल्बाचिया होता है। यदि यह बैक्टीरिया नर मच्छरों में हो और मादा में न हो, तो अंडे फूटते ही नहीं। इस कारण उनकी संख्या आगे नहीं बढ़ती। अंडे फूटने के लिए नर और मादा दोनों में वोल्बाचिया बैक्टीरिया नहीं होना चाहिए।

इतनी बड़ी संख्या में मच्छरों कहां से आएंगे?

मच्छर नाजुक होते हैं और लाखों की संख्या में पाला जाना मुश्किल है। वेरिली ने इसके लिए ऑटोमेटिक सिस्टम बनाए हैं, जो लाखों मच्छरों का प्रोडक्शन करते हैं और मच्छर रिलीज करने से पहले नर और मादा को अलग करते हैं। 

यह तरीका स्टेराइल इनसेक्ट टेक्नीक के नाम से जाना जाता है और 1950 में इसे कृषि कीटों के रोकथाम के लिए इस्तेमाल किया जाता था। वेरिली ने 2017-2019 के दौरान कैलिफोर्निया के फ्रेजनो काउंटी में पायलट प्रोग्राम के तहत लगभग 48 मिलियन बांझ नर मच्छर छोड़े। जिस कारण मादा मच्छरों की आबादी में कुछ क्षेत्रों में 95% तक कमी देखी गई थी।

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यह प्रोजेक्ट फिलहाल अमेरिकी पर्यावरण संरक्षण एजेंसी (EPA) की परमिशन का इंतजार कर रहा है। ईपीए से मंजूरी मिलते ही कंपनी प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर देगी।