UPI के बढ़ते इस्तेमाल ने बनाया नया रिकॉर्ड, पांच साल में कितनी बदली डिजिटल पेमेंट की तस्वीर, जानें पूरी डिटेल
भारत में UPI का इस्तेमाल हर साल नया रिकॉर्ड बना रहा है। अब करोड़ों लोग इससे जुड़े हैं और ट्रांजैक्शन की वैल्यू भी चौंकाने वाले स्तर पर पहुंच गई है। साथ ही विदेशों में भी इसका दायरा बढ़ रहा है। आखिर UPI कितना बड़ा हो चुका है और इसे सुरक्षित बनाने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं? पढ़ें पूरी खबर।

In Short
- जून 2026 तक UPI प्लेटफॉर्म से 55.49 करोड़ यूजर्स जुड़ चुके थे।
- फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में 24,161.69 करोड़ UPI ट्रांजैक्शन हुए, जिनकी वैल्यू ₹314.23 लाख करोड़ रही।
- भारत का UPI सिस्टम अब कई देशों तक पहुंच चुका है, जहां P2P और P2M पेमेंट की सुविधा शुरू हो चुकी है।
आज मोबाइल से पैसे भेजना या दुकान पर पेमेंट करना लोगों की रोज की आदत बन चुका है। कैश या कार्ड के बिना कुछ ही सेकंड में होने वाले पेमेंट ने खरीदारी और पैसे भेजने का तरीका आसान कर दिया है। छोटे शहरों से लेकर बड़े शहरों तक लोग हर दिन UPI का इस्तेमाल कर रहे हैं। लेकिन जून 2026 तक इस प्लेटफॉर्म से कुल कितने लोग जुड़ चुके हैं?
जून 2026 तक UPI से जुड़े 55.49 करोड़ यूजर्स
नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया यानी NPCI ने बताया कि जून 2026 तक UPI प्लेटफॉर्म से 55.49 करोड़ यूजर्स जुड़ चुके थे। UPI एक पेमेंट सिस्टम है, जिसे NPCI चलाता है। इसे पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट 2007 के तहत मंजूरी मिली हुई है। लेकिन पिछले पांच साल में UPI ट्रांजैक्शन कितनी तेजी से बढ़े हैं?
पांच साल में तेजी से बढ़े UPI ट्रांजैक्शन
फाइनेंशियल ईयर 2021-22 में UPI के जरिए 4,595.61 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए थे, जिनकी कुल वैल्यू ₹84.16 लाख करोड़ थी। फाइनेंशियल ईयर 2022-23 में यह बढ़कर 8,371.44 करोड़ ट्रांजैक्शन और ₹139.15 लाख करोड़ हो गई।
फाइनेंशियल ईयर 2023-24 में 13,112.95 करोड़ ट्रांजैक्शन के जरिए ₹199.95 लाख करोड़ का पेमेंट हुआ। फाइनेंशियल ईयर 2024-25 में ट्रांजैक्शन की संख्या 18,586.60 करोड़ और कुल वैल्यू ₹260.56 लाख करोड़ रही। वहीं फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में 24,161.69 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए, जिनकी कुल वैल्यू ₹314.23 लाख करोड़ थी। लेकिन इतनी बड़ी संख्या में होने वाले पेमेंट के बीच फ्रॉड रोकने के लिए क्या इंतजाम किए गए हैं?
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फ्रॉड रोकने के लिए बढ़ाए गए सिक्योरिटी नियम
सरकार, RBI और NPCI ने UPI पेमेंट को ज्यादा सेफ और भरोसेमंद बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं। इनमें फ्रॉड वाले ट्रांजैक्शन रोकने के लिए रिस्क के हिसाब से लिमिट तय करना, बिना यूजर की मंजूरी के मोबाइल नंबर बदलने से रोकना और SMS ऑथेंटिकेशन के गलत इस्तेमाल पर कंट्रोल करना शामिल है।
NPCI ने कॉम्प्रिहेंसिव UPI इन्फॉर्मेशन सिक्योरिटी फ्रेमवर्क 2025 और मोबाइल एप्लिकेशन सिक्योरिटी फ्रेमवर्क भी जारी किया है। इसके तहत UPI ऐप्स के लिए एडवांस सिक्योरिटी कंट्रोल जरूरी किए गए हैं। लेकिन भारत के बाहर किन देशों में UPI से पेमेंट की सुविधा शुरू हो चुकी है?
विदेशों तक पहुंचा भारतीय UPI सिस्टम
NPCI की कंपनी NPCI इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड अप्रैल 2020 में बनाई गई थी। इसका काम UPI और RuPay जैसे भारतीय पेमेंट सिस्टम को दूसरे देशों तक पहुंचाना है। इससे विदेश घूमने जाने वाले भारतीय और दूसरे देशों में रहने वाले भारतीय आसानी से पेमेंट कर सकते हैं।
UPI के जरिए भूटान, सिंगापुर, UAE, फ्रांस, मॉरीशस, श्रीलंका, नेपाल, कतर, ग्रीस और कंबोडिया में P2P या P2M पेमेंट शुरू हो चुका है। P2P का मतलब एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को पैसे भेजना है, जबकि P2M का मतलब किसी दुकान या कारोबारी को पेमेंट करना है। ग्रीस में P2P पेमेंट मई 2026 से शुरू हुआ। वहीं नेपाल में P2P और कंबोडिया में P2M पेमेंट जून 2026 से लाइव हुआ।
यह जानकारी वित्त मंत्रालय में राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने 20 जुलाई 2026 को लोकसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में दी।

