
टाटा ग्रुप को केन्या में बड़ा झटका, Soda Ash माइनिंग पर सरकार सख्त; 100 साल पुरानी डील पर संकट
केन्या में टाटा ग्रुप की सोडा ऐश खदान को लेकर विवाद बढ़ गया है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति विलियम रूटो ने कंपनी से देश छोड़ने को कहा है। सरकार स्थानीय प्रोसेसिंग और रोजगार बढ़ाने की मांग कर रही है, जबकि स्थानीय लोग टाटा की सुविधाओं को लेकर अलग-अलग राय रख रहे हैं।

In Short
- केन्या के राष्ट्रपति विलियम रूटो ने टाटा ग्रुप को सोडा ऐश खनन परियोजना छोड़ने को कहा।
- लेक मागादी इलाके में टाटा की सुविधाओं को लेकर स्थानीय लोग बंटे, कुछ समुदाय कंपनी के समर्थन में तो कुछ सरकार के फैसले के साथ।
- ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, केन्या सरकार का दावा है कि कच्चे माल के निर्यात से देश नौकरियां और उद्योग के अवसर खो रहा है।
केन्या के राष्ट्रपति विलियम रूटो ने भारत की दिग्गज कंपनी टाटा ग्रुप की सोडा ऐश खनन परियोजना को लेकर सख्त रुख अपनाया है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, रूटो ने टाटा को केन्या छोड़ने के लिए कहा है। उनका आरोप है कि कंपनी ने देश में मिनरल की प्रोसेसिंग के लिए जरूरी प्लांट नहीं लगाए और सिर्फ कच्चे माल का निर्यात किया।
यह विवाद लेक मागादी इलाके से जुड़ा है, जो तंजानिया सीमा के पास स्थित है। यह क्षेत्र सोडा ऐश बनाने वाले खनिज ट्रोना के लिए जाना जाता है। यहां रहने वाले मासाई समुदाय के लोग टाटा के बने रहने या जाने को लेकर दो हिस्सों में बंट गए हैं।
स्थानीय लोगों को टाटा से कई सुविधाएं
टाटा केमिकल्स मागादी का कहना है कि वह लंबे समय से इलाके में काम कर रही है और स्थानीय लोगों को कई सुविधाएं देती है। कंपनी चार स्कूलों को आर्थिक मदद देती है, अस्पताल में स्टाफ उपलब्ध कराती है और मागादी शहर में साफ पानी की सप्लाई करती है।
इसके अलावा कंपनी की निजी रेलवे लाइन के जरिए 145 किलोमीटर लंबे रास्ते पर मवेशियों के लिए पानी की व्यवस्था की जाती है। कंपनी समुदाय के लोगों के लिए ट्रेन सेवा भी चलाती है, जिसमें लंबी दूरी की यात्रा के लिए सिर्फ 0.30 डॉलर का किराया लिया जाता है।
सरकार का आरोप, देश को नहीं मिल रहा पूरा फायदा
राष्ट्रपति रूटो का कहना है कि सिर्फ इतनी सुविधाएं काफी नहीं हैं। उनका तर्क है कि टाटा केन्या से निकाले गए सोडा ऐश को भारत भेज रही है, जहां इसका इस्तेमाल कांच, सफाई उत्पादों और इलेक्ट्रिक वाहन बैटरियों जैसे क्षेत्रों में होता है।

केन्या सरकार का मानना है कि अगर देश में ही प्रोसेसिंग यूनिट लगाई जाती तो इससे नौकरियां, तकनीक और नए कारोबार के अवसर पैदा होते। औद्योगिकीकरण विभाग के अधिकारी जूमा मुखवाना ने कहा कि अफ्रीका से रणनीतिक कच्चा माल भेजने से पहले यह देखना चाहिए कि उसे देश में ही बदला जा सकता है या नहीं।
समुदाय में अलग-अलग राय
मागादी की सामाजिक कार्यकर्ता रोज सारोनी का कहना है कि टाटा को हटाने के बजाय बातचीत का मौका मिलना चाहिए। उनके मुताबिक, अगर कंपनी चली गई तो साफ पानी जैसी सुविधाओं पर असर पड़ सकता है।
वहीं स्थानीय नेता इसहाक केसियन किरेसियन का कहना है कि कानून के तहत समुदाय को रॉयल्टी जैसे फायदे मिलने चाहिए और कंपनी के साथ लंबे समय से विवाद चल रहा है।
रॉयल्टी और जमीन शुल्क को लेकर भी विवाद
टाटा और केन्या सरकार के बीच रॉयल्टी भुगतान और अन्य नियमों को लेकर भी विवाद है। केन्या सरकार ने जुलाई में कंपनी को ऑपरेशन रोकने का आदेश दिया था। वहीं टाटा ने कहा है कि उसने सरकार की ओर से उठाए गए सभी मुद्दों पर जवाब दिया है और अब खनन मंत्रालय के अगले निर्देश का इंतजार कर रही है।
टाटा की मागादी यूनिट ने पिछले साल करीब 5.7 करोड़ डॉलर का सोडा ऐश निर्यात किया था। केन्या दुनिया में प्राकृतिक सोडा ऐश का चौथा सबसे बड़ा उत्पादक है, लेकिन वैश्विक उत्पादन में उसकी हिस्सेदारी करीब 1% है।
