India vs China: कोयला बढ़ाने की रेस में कौन आगे? 5 देशों के पास दुनिया की 92% क्षमता
चीन और भारत दुनिया में नई कोयला खदानों के विस्तार की रेस में सबसे आगे हैं। चीन के पास 1,321 Mtpa की प्रस्तावित क्षमता है, जबकि भारत 638 Mtpa के साथ दूसरे नंबर पर है। पांच बड़े देशों के पास मिलकर दुनिया की करीब 92% प्रस्तावित कोयला खनन क्षमता है।

In Short
- चीन 1,321 Mtpa प्रस्तावित कोयला क्षमता के साथ दुनिया में पहले नंबर पर है।
- भारत की क्षमता 2024 के 329 Mtpa से बढ़कर 2025 में 638 Mtpa हो गई।
- चीन, भारत, ऑस्ट्रेलिया, रूस और साउथ अफ्रीका के पास ग्लोबल पाइपलाइन की करीब 92% क्षमता है।
दुनिया में कोयले की मांग बढ़ने की रफ्तार धीमी हो रही है और कोयले से बनने वाली बिजली में भी गिरावट आई है। इसके बावजूद नई कोयला खदानों को लेकर कई देशों की तैयारी तेज है। ग्लोबल एनर्जी मॉनिटर की ग्लोबल कोल माइन ट्रैकर ब्रीफिंग 2026 के मुताबिक इस नई रेस में चीन और भारत सबसे आगे हैं। रिपोर्ट यह भी बताती है कि प्रस्तावित कोयला खनन क्षमता का बड़ा हिस्सा कुछ चुनिंदा देशों में ही सिमट गया है और आगे की तस्वीर समझने के लिए सबसे पहले चीन और भारत के आंकड़े देखना जरूरी है।
चीन के पास सबसे बड़ी कोल माइन पाइपलाइन
चीन 2025 में 1,321 मिलियन टन प्रति वर्ष यानी Mtpa की प्रस्तावित कोयला खनन क्षमता के साथ दुनिया में पहले नंबर पर है। यह ग्लोबल पाइपलाइन के आधे से भी ज्यादा है। रिपोर्ट के मुताबिक चीन की प्रस्तावित क्षमता बाकी सभी देशों की कुल प्रस्तावित क्षमता से भी अधिक है। हालांकि 2025 में चीन की पाइपलाइन में बहुत ज्यादा बदलाव नहीं हुआ और यह लगभग स्थिर रही।
भारत की क्षमता करीब दोगुनी हुई
भारत दुनिया में दूसरे नंबर पर है, लेकिन सबसे तेज बढ़ोतरी यहीं देखने को मिली। भारत की प्रस्तावित कोयला खनन क्षमता 2024 के 329 Mtpa से बढ़कर 2025 में 638 Mtpa हो गई। यानी यह करीब दोगुनी हो गई। रिपोर्ट के मुताबिक ग्लोबल पाइपलाइन में सालभर में हुई लगभग पूरी बढ़ोतरी के पीछे भारत का योगदान रहा।
भारत में यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से झारखंड और ओडिशा से जुड़ी है, जहां प्रस्तावित माइन प्रोजेक्ट्स दोगुने हुए। कोयला मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए करीब 1.15 बिलियन टन रॉ कोल प्रोडक्शन का टारगेट रखा है। इसके पीछे हीटवेव, आर्थिक ग्रोथ और एनर्जी सिक्योरिटी से जुड़ी जरूरतों को कारण बताया गया है। 80 Mtpa से ज्यादा कुल क्षमता वाली 20 से अधिक नई कोयला खदानों को ऑपरेशनल करने की भी योजना है।
5 देशों के पास दुनिया की करीब 92% क्षमता
चीन, भारत, ऑस्ट्रेलिया, रूस और साउथ अफ्रीका मिलकर दुनिया की करीब 92% प्रस्तावित कोयला खनन क्षमता रखते हैं। इन पांच देशों की कुल पाइपलाइन 2,314 Mtpa है, जबकि दुनिया की कुल प्रस्तावित पाइपलाइन 834 प्रोजेक्ट्स में 2,521 Mtpa है। 2024 में इन पांच देशों की हिस्सेदारी 89% थी।
देश प्रस्तावित कोयला खनन क्षमता ग्लोबल पोजिशन
- चीन 1,321 Mtpa दुनिया में पहला
- भारत 638 Mtpa दुनिया में दूसरा
- ऑस्ट्रेलिया 187 Mtpa दुनिया में तीसरा
- रूस करीब 100 Mtpa दुनिया में चौथा
- साउथ अफ्रीका 72 Mtpa दुनिया में पांचवां
- इन 5 देशों का कुल 2,314 Mtpa ग्लोबल पाइपलाइन का करीब 92%
- दुनिया का कुल 2,521 Mtpa 834 प्रस्तावित प्रोजेक्ट्स
मांग धीमी, फिर भी बढ़ रही पाइपलाइन
इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी के मुताबिक 2025 में ग्लोबल कोल डिमांड 0.5% से भी कम बढ़ी और 2030 तक इसके लगभग स्थिर रहने की उम्मीद है। वहीं 2025 में कोयले से बिजली उत्पादन 0.6% घट गया। इसी दौरान पहली बार विंड और सोलर पावर ने मिलकर ग्लोबल इलेक्ट्रिसिटी जेनरेशन में कोयले को पीछे छोड़ दिया।
इसके बावजूद प्रस्तावित ग्लोबल कोल माइन पाइपलाइन करीब 11% बढ़कर 2,521 Mtpa हो गई। इसके उलट 2025 में सिर्फ करीब 113 Mtpa नई कोयला खनन क्षमता शुरू हुई। यह 2024 में शुरू हुई 185 Mtpa क्षमता से करीब 40% कम है और पिछले एक दशक का सबसे निचला स्तर है।
ग्रीनफील्ड माइंस का हिस्सा भी बड़ा
रिपोर्ट के मुताबिक प्रस्तावित कोयला खनन क्षमता का करीब तीन-चौथाई हिस्सा ग्रीनफील्ड माइंस का है, यानी ऐसी नई खदानें जो मौजूदा खदानों के विस्तार का हिस्सा नहीं हैं। भारत में ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट्स की हिस्सेदारी करीब 80% है।
रिपोर्ट का संकेत है कि एक तरफ कोयले की मांग की रफ्तार धीमी पड़ रही है, जबकि दूसरी तरफ नई खदानों की प्रस्तावित क्षमता बढ़ रही है। यही अंतर आगे चलकर प्रोजेक्ट इकोनॉमिक्स और स्ट्रैंडेड एसेट्स का जोखिम बढ़ा सकता है। इस पूरी ग्लोबल कोल रेस में फिलहाल चीन सबसे आगे है, जबकि भारत सबसे तेज बढ़ती पाइपलाइन के साथ दूसरे नंबर पर है।

