India-UK FTA आज से लागू! स्कॉच व्हिस्की, ब्रिटिश कारें होंगी सस्ती; IT और निर्यातकों को भी बड़ा फायदा
कई दौर की बातचीत के बाद हुए इस समझौते को मोदी सरकार का छठा मुक्त व्यापार समझौता (FTA) माना जा रहा है। इससे पहले भारत मॉरीशस, यूएई, ऑस्ट्रेलिया, EFTA और ओमान के साथ ऐसे समझौते लागू कर चुका है।

In Short
- भारत-यूके CETA आज से लागू, भारत के 99% निर्यात को ब्रिटेन में ड्यूटी-फ्री एंट्री मिलेगी।
- स्कॉच व्हिस्की, ब्रिटिश कारें, कॉस्मेटिक्स और कई आयातित उत्पादों पर शुल्क घटने से कीमतें कम हो सकती हैं।
- IT, ऑटो, टेक्सटाइल और कृषि निर्यात को बड़ा फायदा, जबकि दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश बढ़ने की उम्मीद।
India-UK FTA: भारत और ब्रिटेन के बीच 24 जुलाई 2025 को हस्ताक्षरित व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (Comprehensive Economic and Trade Agreement - CETA) आज से लागू हो गया है। कई दौर की बातचीत के बाद हुए इस समझौते को मोदी सरकार का छठा मुक्त व्यापार समझौता (FTA) माना जा रहा है। इससे पहले भारत मॉरीशस, यूएई, ऑस्ट्रेलिया, EFTA और ओमान के साथ ऐसे समझौते लागू कर चुका है।
यह समझौता भारत के लिए हाल के वर्षों के सबसे बड़े व्यापारिक समझौतों में से एक है। इसके तहत भारत के करीब 99% निर्यात को ब्रिटेन में शुल्क-मुक्त (Duty Free) पहुंच मिलेगी।
भारत को क्या होगा फायदा?
गारमेंट्स, टेक्सटाइल, फुटवियर, कालीन, प्रोसेस्ड फूड, अनाज, फल-सब्जियां, मसाले, मछली, मांस और प्रोसेस्ड फूड जैसे श्रम-प्रधान उत्पाद अब ब्रिटेन में बिना आयात शुल्क के पहुंचेंगे। अभी इन उत्पादों पर 4% से 16% तक आयात शुल्क लगता है।
ऑटोमोबाइल, मोटरसाइकिल, मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, फैब्रिकेटेड मेटल, सिरेमिक, ग्लास, स्टोन और सीमेंट उत्पादों को भी बड़ा लाभ मिलेगा।
भारत में क्या हो सकता है सस्ता?
ब्रिटेन से आने वाले इन उत्पादों पर शुल्क घटने से कीमतों में कमी आ सकती है:
- सैल्मन मछली
- लैम्ब (भेड़ का मांस)
- मशीनरी
- इलेक्ट्रॉनिक्स
- चॉकलेट
- सॉफ्ट ड्रिंक्स
- कॉस्मेटिक्स
- परफ्यूम
- शेविंग क्रीम
- नेल पॉलिश
इसके अलावा ब्रिटेन से आयात होने वाली चांदी पर शुल्क 10 वर्षों में शून्य कर दिया जाएगा।
ऑटो सेक्टर में बड़ा बदलाव
पहली बार किसी FTA में भारत ने ब्रिटेन में बनी पूरी तरह तैयार (CBU) कारों और ट्रकों पर आयात शुल्क में बड़ी कटौती करने पर सहमति दी है।
कारों पर शुल्क 110% से घटाकर चरणबद्ध तरीके से 10% किया जाएगा। पेट्रोल और डीजल कारों को शुरुआत से राहत मिलेगी।वहीं इलेक्ट्रिक, हाइब्रिड और हाइड्रोजन कारों को छठे वर्ष से रियायत मिलेगी, जिससे भारतीय कंपनियों को शुरुआती पांच वर्षों तक संरक्षण मिलेगा।
पहले 15 वर्षों में 3.78 लाख ब्रिटिश यात्री कारों के आयात की अनुमति रियायती शुल्क पर होगी। ब्रिटेन में बने ट्रकों पर शुल्क 44% से घटकर पांचवें वर्ष तक 8.8% हो जाएगा।
ब्रिटेन ने भारतीय इलेक्ट्रिक, हाइब्रिड और हाइड्रोजन कारों को भी अपने बाजार में शुल्क-मुक्त प्रवेश देने पर सहमति दी है।
शराब होगी सस्ती
समझौते के तहत कई प्रीमियम शराबों पर शुल्क कम होगा, जिनमें:
- स्कॉच व्हिस्की
- ब्रांडी
- बर्बन
- रम
- जिन
- वोडका
- टकीला
- साइडर
- साके
स्कॉच व्हिस्की पर शुल्क 150% से घटकर पहले 75% और 10 वर्षों में 40% रह जाएगा। अन्य प्रीमियम शराबों पर भी शुल्क 150% से घटाकर पहले 110% और 10 वर्षों में 75% किया जाएगा।
किन उत्पादों पर कोई रियायत नहीं?
भारत ने इन वस्तुओं पर कोई शुल्क छूट नहीं दी है:
- ताजे सेब
- अखरोट
- व्हे और मॉडिफाइड व्हे
- ब्लू चीज
- कुछ बीज
- गोल्ड बार
- स्मार्टफोन
ब्रिटेन ने भी कुछ उत्पादों को छूट से बाहर रखा है, जिनमें:
- मांस उत्पाद
- अंडा आधारित उत्पाद
- चावल
- गन्ना और चुकंदर की चीनी शामिल हैं।
सरकारी खरीद में ब्रिटिश कंपनियों को मौका
भारत पहली बार ब्रिटेन की कंपनियों को केंद्र सरकार के मंत्रालयों और विभागों के करीब 40,000 बड़े सरकारी टेंडरों में हिस्सा लेने की अनुमति देगा। इन टेंडरों में परिवहन, ग्रीन एनर्जी, इंफ्रास्ट्रक्चर और बौद्धिक संपदा (IPR) जैसे प्रमुख क्षेत्र शामिल होंगे। हालांकि, इस समझौते में भारत ने अपनी स्थिति बरकरार रखते हुए पेटेंट की अवधि बढ़ाने और फार्मा डेटा एक्सक्लूसिविटी जैसी ब्रिटेन की मांगों को स्वीकार नहीं किया।
हालांकि, भारत ने बौद्धिक संपदा के बेहतर संरक्षण पर सहमति दी है। साथ ही कम्पल्सरी लाइसेंसिंग (Compulsory Licensing) का अधिकार भारत के पास बना रहेगा।
भारतीय IT कंपनियों को राहत
समझौते के तहत भारत से ब्रिटेन भेजे गए कर्मचारियों के लिए भारतीय कंपनियों को 5 वर्षों तक ब्रिटेन में सोशल सिक्योरिटी योगदान नहीं देना होगा। इससे TCS, Infosys जैसी आईटी कंपनियों को बड़ा लाभ मिलेगा।
Rules of Origin
समझौते में ऐसे नियम बनाए गए हैं जिससे कोई तीसरा देश (जैसे चीन) अपने उत्पादों को मामूली प्रोसेसिंग कर भारत या ब्रिटेन के जरिए भेजकर FTA का फायदा न उठा सके।
स्टील निर्यात पर असर संभव
विशेषज्ञों के अनुसार ब्रिटेन द्वारा स्टील आयात नियम सख्त किए जाने से भारत के करीब 900 मिलियन डॉलर के स्टील निर्यात पर असर पड़ सकता है।
भारत-ब्रिटेन व्यापार
भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापार लगातार बढ़ रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 में दोनों देशों के बीच कुल व्यापार 25.12 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इस दौरान भारत ने ब्रिटेन को 13.44 अरब डॉलर का निर्यात किया, जबकि 11.68 अरब डॉलर का आयात किया। वहीं, ब्रिटेन से भारत में आने वाला प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) भी बढ़ा है। 2025-26 में यह 1 अरब डॉलर रहा, जो पिछले वित्त वर्ष के 795 मिलियन डॉलर से अधिक है।

