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भारत के रियल एस्टेट बाजार में तेजी जारी! लखनऊ, जयपुर और चंडीगढ़ में और बढ़ सकते हैं प्रॉपर्टी के दाम

भारत के टियर 2 शहरों में रियल एस्टेट मार्केट तेजी से बदल रहा है। कम कीमतों, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और बढ़ती कनेक्टिविटी ने इन शहरों को निवेश और घर खरीदने वालों के लिए आकर्षक बनाया है। हालांकि, कुछ इलाकों में बढ़ती कीमतों को लेकर सावधानी बरतने की जरूरत भी बताई गई है।

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In Short

  • अंकिता सूद के मुताबिक लखनऊ और जयपुर जैसे टियर 2 शहरों में कम शुरुआती कीमतों की वजह से अभी ग्रोथ की गुंजाइश बनी हुई है।
  • चंडीगढ़ ट्राई-सिटी के कुछ इलाकों में कीमतों की बढ़ती रफ्तार मौजूदा स्थिति से आगे निकलने को लेकर सावधानी बरतने की जरूरत बताई गई है।
  • इंफ्रास्ट्रक्चर, बेहतर कनेक्टिविटी और बढ़ती आर्थिक गतिविधियों के चलते कई उभरते शहरों में रियल एस्टेट मार्केट तेजी से बदल रहा है।

भारत के तेजी से बढ़ते Tier 2 हाउसिंग मार्केट में अभी भी ग्रोथ की संभावना बनी हुई है। Knight Frank India की National Director-Research अंकिता सूद का मानना है कि कई उभरते शहरों में अभी आगे बढ़ने की जगह है, क्योंकि इन शहरों की कीमतें अब भी कई बड़े शहरों और उनके आसपास के इलाकों की तुलना में कम हैं।

अंकिता सूद ने कहा, “बढ़ने के लिए काफी जगह है, क्योंकि बेस कम है।” उनके मुताबिक, यही कम शुरुआती कीमत इन शहरों को आगे बढ़ने का मौका देती है। पोस्ट-पैंडेमिक रिकवरी के बाद Lucknow और Jaipur जैसे शहरों में कीमतों में अच्छी तेजी देखने को मिली है, लेकिन फिर भी इनमें आगे बढ़ने की गुंजाइश बनी हुई है।

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लखनऊ और जयपुर में अभी भी कीमतें मेट्रो शहरों से नीचे

अंकिता सूद के अनुसार, लखनऊ और जयपुर में रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी की कीमतें अभी करीब 6,000-8,000 रुपये प्रति वर्ग फीट के बीच हैं। यह कीमत कई मेट्रो शहरों के बाहरी इलाकों की तुलना में भी कम है।

यही वजह है कि इन शहरों में हाल की तेजी के बावजूद मार्केट में अभी पूरी तरह से बढ़त खत्म होने के संकेत नहीं दिख रहे हैं। कम कीमत का आधार इन बाजारों को आगे बढ़ने का मौका दे रहा है।

प्रतीकात्मक तस्वीर

Chandigarh Tri-City में कीमतों पर सावधानी की जरूरत

हालांकि, हर Tier 2 मार्केट में एक जैसी स्थिति नहीं है। Chandigarh Tri-City क्षेत्र, खासकर एयरपोर्ट कॉरिडोर के आसपास कीमतों को लेकर सावधानी बरतने की जरूरत बताई गई है।

अंकिता सूद के मुताबिक, इस इलाके में कीमतें करीब 8,000-10,000 रुपये प्रति वर्ग फीट तक पहुंच गई हैं और कुछ प्रोजेक्ट्स में इससे भी ज्यादा कीमतें देखी जा रही हैं। उन्होंने कहा कि यहां कीमतों में बढ़ोतरी ने मौजूदा फंडामेंटल्स को पीछे छोड़ दिया है और तेजी की रफ्तार काफी चौंकाने वाली रही है।

Tier 2 शहरों में बदलाव सिर्फ कैच-अप नहीं

Knight Frank के व्यापक आकलन के अनुसार, पिछले पांच सालों में कई उभरते शहरों में रेजिडेंशियल कीमतों की बढ़ोतरी मेट्रो शहरों से ज्यादा रही है। इसके पीछे इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार, बेहतर कनेक्टिविटी, बढ़ती कारोबारी गतिविधियां और खपत में वृद्धि जैसे कारण हैं।

लखनऊ, जयपुर, कोयंबटूर, इंदौर, कोच्चि और चंडीगढ़ ट्राई-सिटी जैसे शहरों को मजबूत आर्थिक आधार का फायदा मिला है। अंकिता सूद के अनुसार, यह सिर्फ मेट्रो शहरों की बराबरी करने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि रियल एस्टेट मार्केट में एक बड़ा संरचनात्मक बदलाव भी है।

निवेश से पहले माइक्रो मार्केट को समझना जरूरी

हालांकि, सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर के आधार पर कीमतों में लगातार तेजी को सही नहीं ठहराया जा सकता। लंबे समय तक कीमतों को टिकाए रखने के लिए रोजगार के नए अवसर, सर्विस सेक्टर की मांग और वास्तविक खरीदारों की भागीदारी जरूरी होगी।

अंकिता सूद का कहना है कि सावधानी जरूरी है, लेकिन अभी Tier 2 शहरों में ग्रोथ की संभावना खत्म नहीं हुई है। उनके मुताबिक, अगले पांच सालों में इन बाजारों में आगे बढ़ने की गुंजाइश बनी हुई है।

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