भारत का अपना मोबाइल ब्रांड... मोदी सरकार ने बढ़ाया कदम, 62,500 करोड़ से बदलेगी पूरी इंडस्ट्री
भारत को मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग का बड़ा हब बनाने के लिए सरकार ने 62,500 करोड़ रुपये की MPMS योजना को मंजूरी दी है। कंपनियों को उत्पादन, भारतीय पार्ट्स और रिसर्च पर अतिरिक्त इनसेंटिव मिलेगा। जानिए इस योजना से घरेलू मोबाइल ब्रांड, एक्सपोर्ट और रोजगार को कितना फायदा हो सकता है।

In Short
- केंद्र सरकार ने MPMS योजना के लिए 62,500 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दी है।
- मोबाइल कंपनियों को बिक्री पर 2.25 प्रतिशत से 5 प्रतिशत तक इनसेंटिव दिया जाएगा।
- इस योजना से करीब 60 हजार सीधे रोजगार पैदा होने और मोबाइल एक्सपोर्ट बढ़ने की उम्मीद है।
India mobile manufacturing: देश में मोबाइल फोन बनाने का काम तेज करने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ी योजना को मंजूरी दी है। केंद्रीय कैबिनेट ने मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम यानी MPMS के लिए 62,500 करोड़ रुपये का बजट पास किया है।
इस योजना का मकसद भारत में मोबाइल उत्पादन बढ़ाने के साथ घरेलू ब्रांडों को डिजाइन, रिसर्च और कारोबार फैलाने में मदद देना है। इसके अलावा सरकार ने सेमीकॉन-2 योजना के लिए भी 1.26 लाख करोड़ रुपये की मंजूरी दी है।
पांच वर्षों में खर्च की जाएगी रकम
MPMS के तहत मंजूर किए गए 62,500 करोड़ रुपये अगले पांच वर्षों में खर्च किए जाएंगे। यह नई योजना बड़े स्तर पर इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन के लिए शुरू की गई पुरानी प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव योजना की जगह लेगी। PLI-LSEM योजना 31 मार्च 2026 को समाप्त हो चुकी है।
सरकार ने नई स्कीम का ढांचा इस तरह तैयार किया है कि मोबाइल कंपनियां भारत में अपना उत्पादन बढ़ाएं और ज्यादा से ज्यादा पार्ट्स भी देश के भीतर से खरीदें।
मोबाइल कंपनियों को मिलेगा इनसेंटिव
योजना के तहत भारत में फोन बनाने वाली कंपनियों को उनकी बिक्री के आधार पर 2.25 प्रतिशत से 5 प्रतिशत तक इनसेंटिव दिया जाएगा।
मोबाइल के जरूरी पार्ट्स और सब-असेंबली भारतीय सप्लायर से खरीदने वाली कंपनियों को 1.5 प्रतिशत तक अतिरिक्त फायदा मिलेगा। वहीं भारतीय मोबाइल ब्रांडों को डिजाइन और रिसर्च एंड डेवलपमेंट पर काम करने के लिए बिक्री के आधार पर 3 प्रतिशत अतिरिक्त इनसेंटिव दिया जाएगा।
39 लाख करोड़ रुपये के उत्पादन का लक्ष्य
सरकार का लक्ष्य इस योजना की मदद से देश में मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग को करीब 39 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाना है। इससे मोबाइल फोन के निर्यात में भी बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।
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सरकार का अनुमान है कि MPMS से करीब 60 हजार प्रत्यक्ष रोजगार पैदा हो सकते हैं। इससे मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में काम तलाश रहे युवाओं के लिए नए मौके बनेंगे।
कई गुना बढ़ा इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर
वित्त वर्ष 2014-15 के बाद से भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग करीब सात गुना बढ़ चुकी है। इसी दौरान इलेक्ट्रॉनिक्स एक्सपोर्ट में लगभग 11 गुना की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मोबाइल फोन अब देश के इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर का एक अहम हिस्सा बन चुके हैं।
विदेशी कंपनियों के लिए भारत बना मैन्युफैक्चरिंग सेंटर
भारत में कई कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां दुनिया के बड़े मोबाइल ब्रांडों के लिए फोन बनाती और असेंबल करती हैं। इनमें फॉक्सकॉन, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और डिक्सॉन टेक्नोलॉजीज जैसे नाम शामिल हैं।
फॉक्सकॉन भारत में Apple के डिवाइस तैयार करती है। वहीं डिक्सॉन टेक्नोलॉजीज Xiaomi, Motorola और Samsung सहित कई कंपनियों के हैंडसेट बनाने का काम करती है। सरकार की नई योजना से इस पूरे मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को और मजबूत करने की तैयारी है।

