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BT Infra Summit 2026: ऊर्जा सुरक्षा के लिए सस्ती बिजली, बैटरी स्टोरेज और आधुनिक ग्रिड पर एक्सपर्ट्स का जोर

फोकस सिर्फ बिजली और ईंधन की उपलब्धता तक सीमित नहीं है, बल्कि ऐसा ऊर्जा तंत्र तैयार करने पर है जो सस्ता, भरोसेमंद, टिकाऊ और वैश्विक चुनौतियों का सामना करने में सक्षम हो। यह बात BT Infrastructure Summit – Infra India 2047 में एक्सपर्ट ने की है।

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भारत में ऊर्जा सुरक्षा की परिभाषा तेजी से बदल रही है। अब फोकस सिर्फ बिजली और ईंधन की उपलब्धता तक सीमित नहीं है, बल्कि ऐसा ऊर्जा तंत्र तैयार करने पर है जो सस्ता, भरोसेमंद, टिकाऊ और वैश्विक चुनौतियों का सामना करने में सक्षम हो। यह बात BT Infrastructure Summit – Infra India 2047 में एक्सपर्ट ने की है।

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पहुंच से आगे, अब भरोसेमंद और किफायती ऊर्जा पर जोर

CEEW की प्रोग्राम्स डायरेक्टर शालू अग्रवाल ने कहा कि भारत लगभग यूनिवर्सल इलेक्ट्रिफिकेशन का लक्ष्य हासिल कर चुका है। अब अगला फेज एनर्जी को किफायती, विश्वसनीय और बाहरी झटकों से सुरक्षित बनाने का है। उनके मुताबिक बैटरी स्टोरेज की घटती लागत और सोलर एवं विंड एनर्जी की बढ़ती प्रतिस्पर्धा ने लागत, भरोसेमंदी और टिकाऊपन के बीच बेहतर संतुलन बनाया है। हालांकि उन्होंने चेताया कि रिन्यूएबल एनर्जी के विस्तार के साथ ट्रांसमिशन नेटवर्क, बिजली बाजार और लचीले कॉन्ट्रैक्ट ढांचे को भी मजबूत करना होगा।

केयरनी इंडिया में पार्टनर, एनर्जी एंड प्रोसेस इंडस्ट्रीज प्रैक्टिस, गौरव गुलाटी ने कहा कि आयातित हाइड्रोकार्बन पर भारत की निर्भरता अभी कई सालों तक बनी रहेगी। ऐसे में रणनीतिक भंडारण और मजबूत लॉजिस्टिक्स ऊर्जा सुरक्षा की अहम कड़ी होंगे। उनके अनुसार अगले दशक में ट्रांसमिशन नेटवर्क के आधुनिकीकरण पर 15-20 अरब डॉलर का निवेश लग सकता है। उन्होंने बैटरी स्टोरेज, पंप्ड स्टोरेज, स्मार्ट ग्रिड प्लानिंग और PM सूर्य घर व PM-कुसुम जैसी योजनाओं से बढ़ी रूफटॉप सोलर अपनाने की रफ्तार का भी उल्लेख किया।

चिंतन रिसर्च फाउंडेशन के सेंटर फॉर क्लाइमेट चेंज एंड एनर्जी ट्रांजिशन के प्रमुख डॉ. देबजीत पालित ने कहा कि बहस “फॉसिल बनाम रिन्यूएबल” से आगे बढ़कर “जहां संभव हो इलेक्ट्रॉन, जहां जरूरी हो मॉलिक्यूल” पर होनी चाहिए। उन्होंने परिवहन और उद्योग के विद्युतीकरण के साथ नवीकरणीय ऊर्जा, परमाणु ऊर्जा, कंप्रेस्ड बायोगैस और स्टोरेज तकनीकों को साथ लेकर चलने की जरूरत बताई। उनके अनुसार आर्थिक वृद्धि को प्रभावित किए बिना डीकार्बोनाइजेशन के लिए स्टोरेज, डिमांड-साइड मैनेजमेंट, माइक्रोग्रिड और इंडिया एनर्जी स्टैक पर मजबूत नीतियां जरूरी होंगी।