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सोने के कारोबार की चुनौतियों के लिए चाहिए 'गोल्ड बोर्ड', अजय मेहरा ने सरकार को दिया बड़ा सुझाव

मेहरासंस ज्वैलर्स के एमडी अजय मेहरा ने कहा कि भारत के गोल्ड सेक्टर की चुनौतियों का समाधान छोटे-छोटे नीतिगत बदलावों से नहीं होगा। उन्होंने आयात, फाइनेंसिंग और निर्यात जैसे मुद्दों के लिए विशेषज्ञों वाला 'गोल्ड बोर्ड' बनाने की मांग की। उनका मानना है कि इससे सोने के आयात पर निर्भरता भी कम हो सकती है।

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मेहरासंस ज्वैलर्स के मैनेजिंग डायरेक्टर अजय मेहरा

भारत में सोने के कारोबार से जुड़ी चुनौतियों का समाधान छोटे-छोटे नीतिगत बदलावों से नहीं हो सकता। यह बात मेहरासंस ज्वैलर्स के मैनेजिंग डायरेक्टर अजय मेहरा ने बिजनेस टुडे के 'इंडियाज मोस्ट सस्टेनेबल कंपनीज 2026' कार्यक्रम में कही।

उन्होंने कहा कि सोने के पूरे इकोसिस्टम को समझने और उससे जुड़ी समस्याओं का समाधान निकालने के लिए एक विशेष संस्था की जरूरत है, जो सिर्फ गोल्ड सेक्टर पर फोकस करे।

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आयात से लेकर निर्यात तक कई चुनौतियां

अजय मेहरा के मुताबिक, भारत के गोल्ड सेक्टर में आयात, फाइनेंसिंग, रिफाइनिंग, निर्यात और नियमन जैसी कई जटिल चुनौतियां हैं। इन सभी मुद्दों को अलग-अलग नीतियों के जरिए हल करने के बजाय एक समग्र रणनीति की जरूरत है। उन्होंने कहा कि इसके लिए ऐसे विशेषज्ञों की टीम होनी चाहिए, जिन्हें सोने के कारोबार और बाजार की गहरी समझ हो।

मेहरा ने बताया कि गोल्ड-बैक्ड फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स और गोल्ड मेटल लोन जैसी व्यवस्थाएं देश में नए सोने के आयात की जरूरत को कम कर सकती हैं।

उनका कहना है कि यदि लोगों और कारोबारियों के पास पहले से मौजूद सोने का बेहतर वित्तीय उपयोग किया जाए, तो विदेशी सोने पर निर्भरता घटाई जा सकती है। इससे देश का आयात बिल कम करने में भी मदद मिलेगी।

मिनिस्ट्री ऑफ गोल्ड नहीं तो कम से कम गोल्ड बोर्ड बनाए सरकार

अजय मेहरा ने बताया कि विभिन्न नीतिगत चर्चाओं में 'गोल्ड बोर्ड' बनाने का सुझाव भी सामने आया है। इस बोर्ड में इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स, नीति निर्माताओं और अन्य संबंधित पक्षों को शामिल किया जा सकता है।

उनके अनुसार, ऐसा बोर्ड गोल्ड सेक्टर के लिए एक स्पष्ट और लॉन्ग टर्म रणनीति तैयार करने में मदद करेगा, जिससे उद्योग के विकास के साथ-साथ देश की आर्थिक जरूरतों को भी बेहतर तरीके से पूरा किया जा सकेगा।

उन्होंने कहा कि यदि गोल्ड सेक्टर के लिए एक समर्पित संस्था बनाई जाती है, तो इससे इंडस्ट्री को अधिक पारदर्शी, संगठित और टिकाऊ बनाने में मदद मिलेगी।