फैक्ट्री शुरू होने से पहले ही बढ़ जाती है लागत, भारत की मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ के सामने बड़ी चुनौती
भारत की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता पर सवाल उठाते हुए Titan Additive के फाउंडर Maahir Panchal ने कहा कि समस्या क्षमता की नहीं बल्कि महंगी जमीन, सीमित विस्तार और विदेशी मशीनों पर निर्भरता की है। Zoho फाउंडर Sridhar Vembu ने भी औद्योगिक जमीन और ब्याज दरों को बड़ी चुनौती बताया।

In Short
- भारत में मैन्युफैक्चरिंग की क्षमता है लेकिन विस्तार में आ रही रुकावट
- महंगी औद्योगिक जमीन और ऊंची लागत बनी बड़ी चुनौती
- Sridhar Vembu ने भी जमीन और ब्याज दरों पर जताई चिंता
भारत में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को लेकर अक्सर क्षमता और विस्तार की बात होती है, लेकिन गुजरात की इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग कंपनी Titan Additive के फाउंडर Maahir Panchal का कहना है कि समस्या क्षमता की नहीं बल्कि फैक्ट्रियों को बढ़ाने के लिए जरूरी माहौल की है।
उन्होंने कहा कि महंगी औद्योगिक जमीन की वजह से कंपनियों के लिए विस्तार करना और नई मशीनों में निवेश करना मुश्किल हो रहा है।
महंगी जमीन बनी बड़ी चुनौती
Maahir Panchal के मुताबिक, मौजूदा औद्योगिक जमीन की कीमतें मैन्युफैक्चरिंग के लिए बड़ी रुकावट बन रही हैं। उन्होंने बताया कि गुजरात के GIDC औद्योगिक क्षेत्र में छोटे शहरों में भी जमीन की कीमत करीब 5,000 से 7,000 रुपये प्रति वर्ग फुट तक पहुंच गई है।
उनका कहना है कि जब फैक्ट्री लगाने की लागत बहुत ज्यादा हो जाती है, तो कंपनियां बड़े प्लांट बनाने के बजाय सीमित जगह में काम करने को मजबूर होती हैं। इससे उत्पादन क्षमता और भविष्य के विस्तार पर असर पड़ता है।
भारत में क्षमता है लेकिन विस्तार की कमी
Panchal ने कहा कि भारत में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स की कमी नहीं है। उनके अनुसार, कई जगहों पर छोटी फैक्ट्रियां किसी भी तरह के पार्ट्स बनाने की क्षमता रखती हैं और तेजी से काम कर सकती हैं।
लेकिन इनमें से ज्यादातर कंपनियां बड़े स्तर की इंडस्ट्री में तब्दील नहीं हो पातीं। उन्होंने इसे भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की बड़ी समस्या बताया।
मशीनों और विदेशी निर्भरता पर सवाल
उन्होंने यह भी कहा कि भारत को बड़ी मात्रा में मशीन टूल्स आयात करने पड़ते हैं। उनके मुताबिक, पिछले साल करीब 20,000 करोड़ रुपये के मशीन टूल्स आयात किए गए और देश में लगी कुल मशीनों में बड़ी हिस्सेदारी विदेशी उपकरणों की है।
उनका कहना है कि भारत में कई उत्पादों में स्थानीय श्रम का इस्तेमाल होता है, लेकिन मशीन, डिजाइन, कच्चा माल और ब्रांड के लिए विदेशी निर्भरता बनी हुई है।
Sridhar Vembu ने भी उठाया जमीन का मुद्दा
Zoho के फाउंडर Sridhar Vembu ने Maahir Panchal की बातों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि हाईवे और लॉजिस्टिक्स से जुड़े इलाकों में जमीन की कीमतें काफी ज्यादा हैं।
Vembu ने मैन्युफैक्चरिंग निवेश के लिए ऊंची ब्याज दरों को भी एक बड़ी चुनौती बताया। उनका सुझाव है कि नए औद्योगिक क्षेत्रों के विकास से पहले बेहतर सड़क और रेलवे कनेक्टिविटी तैयार की जानी चाहिए।
इंडस्ट्रियल जमीन को निवेश नहीं उत्पादन का आधार बनाना होगा
Panchal का कहना है कि औद्योगिक प्लॉट सिर्फ रियल एस्टेट एसेट नहीं बनने चाहिए। अगर फैक्ट्री की जमीन उत्पादन बढ़ाने के बजाय केवल कीमत बढ़ने का जरिया बन जाए, तो मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ प्रभावित होती है।
उनके मुताबिक, भारत को अपनी मौजूदा क्षमता को बड़े और मजबूत उद्योगों में बदलने के लिए जमीन, वित्त और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी समस्याओं पर ध्यान देना होगा।

