भारत की मैन्युफैक्चरिंग रफ्तार को चाहिए ग्लोबल ट्रेड का सहारा! जयंत सिन्हा ने बताया क्यों जरूरी है इंपोर्ट बैरियर कम करना
भारत को मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने के लिए ट्रेड पॉलिसी में बड़े बदलाव की जरूरत है। पूर्व मंत्री जयंत सिन्हा ने कहा कि महंगे इंपोर्ट और ज्यादा टैरिफ भारत की एक्सपोर्ट क्षमता को सीमित कर सकते हैं। उन्होंने वियतनाम और स्मार्टफोन सेक्टर का उदाहरण देते हुए ग्लोबल ट्रेड से जुड़ने पर जोर दिया।

भारत को अगर दुनिया की बड़ी मैन्युफैक्चरिंग ताकत बनना है तो उसे ग्लोबल ट्रेड के लिए अपनी अर्थव्यवस्था को और खोलना होगा। पूर्व मंत्री जयंत सिन्हा ने कहा कि ज्यादा इंपोर्ट बैरियर और महंगे आयात भारत की एक्सपोर्ट क्षमता को कमजोर कर सकते हैं। उनके मुताबिक भारत सस्ते रॉ मटेरियल और ग्लोबल सप्लाई चेन से जुड़े बिना बड़ी मैन्युफैक्चरिंग छलांग नहीं लगा सकता। यही वजह है कि ट्रेड पॉलिसी में बदलाव की जरूरत महसूस हो रही है।
इंपोर्ट आसान होगा तभी एक्सपोर्ट बढ़ेगा
जयंत सिन्हा ने कहा कि ट्रेड को अब सिर्फ टैरिफ के नजरिए से नहीं देखना चाहिए क्योंकि आज इसमें जियोपॉलिटिक्स सप्लाई चेन रोजगार और स्ट्रैटेजिक जरूरतें भी जुड़ी हुई हैं। उन्होंने साफ कहा कि अगर भारत आसानी से इंपोर्ट नहीं कर पाएगा तो उसके लिए आसानी से एक्सपोर्ट करना भी मुश्किल होगा।
उनका मानना है कि भारत को चीन प्लस वन डेस्टिनेशन बनाने के लिए घरेलू कंपनियों को सुरक्षा देने के साथ साथ ग्लोबल वैल्यू चेन से जोड़ना होगा। एक्सपोर्ट करने वाले सेक्टर के लिए कम कीमत पर जरूरी सामान मिलना बहुत जरूरी है।
वियतनाम से सीखने की जरूरत
सिन्हा ने वियतनाम का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां इंपोर्ट टैरिफ करीब 1% है जबकि भारत में यह लगभग 15% है। उन्होंने बताया कि वियतनाम ने इंपोर्ट टैरिफ को काफी कम करके अपनी एक्सपोर्ट क्षमता को मजबूत किया है।
वियतनाम आज सप्लाई चेन में बदलाव का बड़ा फायदा उठा रहा है। भारत के लिए भी यह एक संकेत है कि सिर्फ नीतियां बनाने से मैन्युफैक्चरिंग मजबूत नहीं होगी बल्कि उसके लिए ओपन ट्रेड सिस्टम भी जरूरी होगा।
स्मार्टफोन सेक्टर ने दिखाई भारत की ताकत
जयंत सिन्हा ने स्मार्टफोन इंडस्ट्री को भारत की सफलता का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि पिछले दस साल में भारत चीन के बाद दुनिया का सबसे बड़ा स्मार्टफोन एक्सपोर्टर बनने की दिशा में आगे बढ़ा है। उन्होंने बताया कि करीब 25% एप्पल आईफोन अब भारत में बनाए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सिर्फ पांच से छह साल में इस सेक्टर में बड़ा बदलाव आया है। यह दिखाता है कि सही पॉलिसी ग्लोबल कंपनियों का भरोसा और सप्लाई चेन से जुड़ाव मिलने पर भारत दूसरे सेक्टर में भी तेजी से आगे बढ़ सकता है।
ट्रेड एग्रीमेंट से बढ़ सकता है भरोसा
सिन्हा ने कहा कि भारत को धीरे धीरे बड़े ट्रेड ब्लॉक जैसे सीपीटीपीपी से जुड़ने पर भी विचार करना चाहिए। उनके मुताबिक ऐसे ट्रेड अरेंजमेंट भारत को धीरे धीरे लिबरलाइजेशन की दिशा में आगे बढ़ाने में मदद कर सकते हैं और निवेशकों का भरोसा बढ़ा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि भारत की इकोनॉमी अभी 6 से 7% की रफ्तार से बढ़ रही है लेकिन 8 से 10% ग्रोथ हासिल करने और बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा करने के लिए निवेश और मैन्युफैक्चरिंग को और मजबूत करना होगा। इसके लिए ट्रेड ओपननेस अब सिर्फ विकल्प नहीं बल्कि जरूरत बनती जा रही है।

