2047 तक कैसे बदलेंगे भारतीय शहर? DLF के आकाश ओहरी ने बताया विकास का नया मॉडल
भारत के शहरों का भविष्य कैसा होगा इस पर DLF के आकाश ओहरी ने बड़ा विजन बताया। उन्होंने कहा कि बढ़ते शहरीकरण के बीच सैटेलाइट टाउन, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, पीपीपी मॉडल और ग्रीन डेवलपमेंट जरूरी हैं। 2047 तक मजबूत शहर बनाने के लिए लंबी सोच और बेहतर गवर्नेंस की जरूरत होगी।

भारत तेजी से शहरीकरण की ओर बढ़ रहा है और आने वाले वर्षों में शहरों पर आबादी का दबाव और बढ़ने वाला है। ऐसे में बेहतर प्लानिंग, मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और सस्टेनेबल डेवलपमेंट की जरूरत है। BT India@100 कार्यक्रम में DLF होम डेवलपर्स के मैनेजिंग डायरेक्टर आकाश ओहरी ने भारत के भविष्य के शहरों को लेकर अपनी सोच रखी।
बढ़ते शहरों के लिए सैटेलाइट टाउन जरूरी
आकाश ओहरी ने कहा कि भारत में हर साल करीब 1% आबादी शहरों की ओर बढ़ रही है। साल 2030 तक शहरी भारत में करीब 580 मिलियन लोग रह सकते हैं, जबकि 2008 में मैकिंजी रिपोर्ट ने यह संख्या 340 मिलियन बताई थी। उन्होंने कहा कि भारत में अभी सिर्फ छह बड़े मेट्रो शहर हैं, जो इतनी बड़ी आबादी को संभालने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।
उन्होंने बताया कि शहरीकरण को रोका नहीं जा सकता, लेकिन इसे सही तरीके से विकसित करना जरूरी है। इसके लिए सैटेलाइट टाउन बनाने होंगे, जहां बेहतर मोबिलिटी और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर हो ताकि लोग आसानी से बड़े शहरों से जुड़ सकें।
पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप से बदल सकते हैं शहर
ओहरी ने कहा कि बड़े स्तर पर शहरों के विकास के लिए पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप यानी पीपीपी मॉडल बेहद जरूरी है। उन्होंने न्यूयॉर्क के हडसन यार्ड, लंदन के कैनरी व्हार्फ और सिंगापुर के विकास मॉडल का उदाहरण दिया।
उन्होंने बताया कि गुरुग्राम में डीएलएफ ने अपने स्तर पर इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने की कोशिश की। उन्होंने डीएलएफ के प्राइवेट मेट्रो नेटवर्क का उदाहरण देते हुए कहा कि जब डेवलपर और सरकार मिलकर लंबे समय की सोच के साथ काम करते हैं तो बेहतर नतीजे मिल सकते हैं।
शहरों में प्लानिंग और गवर्नेंस सबसे बड़ी चुनौती
आकाश ओहरी के अनुसार भारत के शहरों में समस्या अच्छे अधिकारियों की कमी नहीं है, बल्कि लगातार बेहतर तरीके से काम करने की जरूरत है। उन्होंने कचरा प्रबंधन का उदाहरण देते हुए कहा कि कई जगह घरों से कचरा अलग-अलग किया जा रहा है, लेकिन उसके बाद की व्यवस्था कमजोर है।
उन्होंने कहा कि शहरों को बेहतर बनाने के लिए मजबूत गवर्नेंस और ऐसी नीतियां चाहिए जो लंबे समय तक काम कर सकें।
ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर पर देना होगा ध्यान
ओहरी ने बताया कि डीएलएफ ने 1990 के दशक से अपने प्रोजेक्ट्स में पार्क और ग्रीन स्पेस को महत्व दिया है। साल 2012 में कंपनी ने बड़े स्तर पर पेड़ों को दूसरी जगह लगाने का काम किया था, जिसमें 99% से ज्यादा सफलता मिली थी।
उन्होंने कहा कि ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर सिर्फ दिखावे की चीज नहीं है, बल्कि भविष्य के शहरों की जरूरत है। साफ हवा, खुले स्थान, पार्क और रिसाइकल पानी जैसी सुविधाएं आने वाले समय में अहम भूमिका निभाएंगी।
मुंबई से सीख सकते हैं दूसरे शहर
मुंबई के विकास मॉडल पर बात करते हुए ओहरी ने कहा कि सीमित जगह के कारण मुंबई को वर्टिकल यानी ऊंची इमारतों वाले शहर के रूप में विकसित होना पड़ा। वहीं भारत के कई दूसरे शहरों के पास ज्यादा जगह है, इसलिए उन्हें सिर्फ ऊंची इमारतों पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है।
उन्होंने कहा कि हर शहर को अपनी जरूरत के हिसाब से विकास करना होगा, लेकिन सभी जगह साफ हवा, खुले क्षेत्र, बेहतर ट्रांसपोर्ट और रिसाइकल पानी जैसी सुविधाओं पर ध्यान देना जरूरी है।
सस्टेनेबिलिटी के लिए जवाबदेही जरूरी
ओहरी ने कहा कि सिर्फ कंपनियों का सस्टेनेबिलिटी की बात करना काफी नहीं है, बल्कि इसके लिए जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि कंपनियों के अधिकारियों के बोनस को सस्टेनेबल टारगेट से जोड़ा जाना चाहिए।
उनका कहना था कि जब जिम्मेदारी और प्रोत्साहन दोनों जुड़े होंगे, तभी विकास का तरीका बदलेगा। 2047 तक भारत के शहर कैसे होंगे, यह आज की प्लानिंग और फैसलों पर निर्भर करेगा।

