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Gold Demand: भारत में सोने की मांग 29% घटी, कीमतों में गिरावट के बाद भी खरीदारी से क्यों बच रहे लोग?

भारत में सोने की खरीदारी का ट्रेंड बदल रहा है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर तिमाही में सोने की मांग 29 फीसदी घट गई। ऊंची कीमतों के बीच लोगों ने सोना कम खरीदा, लेकिन खर्च ज्यादा किया।

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AI Generated Image

भारत में सोने की खरीदारी को लेकर लोगों का रुख बदलता नजर आ रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील, सोने की ऊंची कीमतों और इंपोर्ट ड्यूटी में बढ़ोतरी के बीच देश में सोने की मांग को बड़ा झटका लगा है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (World Gold Council) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई से सितंबर 2026 के दौरान भारत में सोने की मांग 29 फीसदी घट गई। दिलचस्प बात यह है कि लोगों ने सोना कम खरीदा, लेकिन उस पर खर्च पहले से ज्यादा किया।

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सोने की मांग में 29% की गिरावट

भारत में शादी-ब्याह, त्योहारों और बचत के लिए सोना खरीदने की पुरानी परंपरा रही है। लेकिन अब महंगी कीमतों ने खरीदारों की सोच बदल दी है।

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक, जुलाई-सितंबर तिमाही में भारत की सोने की मांग घटकर करीब 163 टन रह गई। पिछले साल की समान तिमाही में यह करीब 230 टन थी। सोने की ज्वेलरी के साथ गोल्ड बार, सिक्कों और गोल्ड ETF में भी खरीदारी कमजोर पड़ने की बात सामने आई है।

कम सोना खरीदा, फिर भी ₹2.42 लाख करोड़ खर्च

सोने की मांग घटने के बावजूद भारतीयों ने इस पर करीब 2.42 लाख करोड़ रुपये खर्च किए। यह पिछले साल के मुकाबले 3 फीसदी ज्यादा है।

इसकी बड़ी वजह कीमतों में बढ़ोतरी रही। सितंबर तिमाही में सोने की कीमत सालाना आधार पर 23 फीसदी बढ़ गई। यानी लोगों को कम मात्रा में सोना खरीदने के लिए भी ज्यादा पैसे खर्च करने पड़े।

हालांकि हाल के महीनों में सोने की कीमतों में गिरावट आई है। फरवरी में 10 ग्राम सोने का भाव 1.60 लाख रुपये से ज्यादा था, जो 3 नवंबर तक घटकर करीब 1.39 लाख रुपये रह गया। यानी कीमत करीब 22,000 रुपये या 14 फीसदी गिर चुकी है।

सोने का इंपोर्ट भी तेजी से घटा

सोने की कमजोर मांग का असर आयात पर भी दिख रहा है। अप्रैल में भारत का गोल्ड इंपोर्ट बिल 5.63 अरब डॉलर था, जो सितंबर में घटकर सिर्फ 1.8 अरब डॉलर रह गया।

इस तरह पांच महीनों में आयात बिल करीब 68 फीसदी घट गया। सितंबर का आंकड़ा अगस्त के मुकाबले भी 20 फीसदी से ज्यादा कम रहा।

इस गिरावट के पीछे कुछ हद तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 1 सितंबर की अपील को भी वजह माना जा रहा है। हालांकि आयात में कमी के लिए केवल इसी अपील को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।

आगे कैसी रह सकती है सोने की मांग?

ऊंची कीमतों के कारण खरीदार अब हल्के गहनों को प्राथमिकता दे रहे हैं। कई लोग नए गहने खरीदने के बजाय पुराने सोने को एक्सचेंज करवा रहे हैं। वहीं कुछ खरीदार कीमतों में और गिरावट का इंतजार कर रहे हैं।

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वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल ने पूरे साल के लिए भारत में सोने की मांग 625 से 675 टन के बीच रहने का अनुमान जताया है।

इस बीच अनौपचारिक रास्तों से सोने की आवक भी बढ़ी है। शुरुआती अनुमानों के मुताबिक, सितंबर तिमाही में करीब 50 टन सोना ऐसे रास्तों से भारत आया। वैश्विक स्तर पर केंद्रीय बैंकों ने सितंबर तिमाही में 321 टन सोना खरीदा, हालांकि भारतीय रिजर्व बैंक इस खरीदारी में शामिल नहीं था।