2030 तक भारत में 2.1 करोड़ तक पहुंच सकती है गिग वर्कर्स की संख्या! लाखों लोगों के लिए खुलेंगे कमाई के नए अवसर
भारत में गिग वर्क का दायरा तेजी से बढ़ रहा है और आने वाले वर्षों में यह लाखों लोगों की कमाई का बड़ा जरिया बन सकता है। रिपोर्ट में सामने आए आंकड़े बताते हैं कि इस सेक्टर में कितने नए मौके बन सकते हैं और क्यों बदल रहा है काम करने का तरीका।

In Short
- भारत में गिग वर्कफोर्स 2030 तक बढ़कर 1.7 से 2.1 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है।
- गिग इंटरनेट भारत के सालाना नॉन-फार्म जॉब गैप का करीब 70% हिस्सा कम करने में मदद कर सकता है।
- फुल-टाइम गिग वर्कर्स समान काम करने वालों के मुकाबले 2.5 गुना तक ज्यादा कमाई कर सकते हैं।
Gig Workers India: भारत में डिलीवरी, कैब चलाने और होम सर्विस जैसे काम तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐप के जरिए मिलने वाले इन कामों को गिग वर्क कहा जाता है। आने वाले वर्षों में यह सेक्टर लाखों लोगों के लिए कमाई का बड़ा जरिया बन सकता है।
आइए समझते हैं कि रिपोर्ट में गिग वर्कर्स की संख्या, कमाई और काम करने के तरीके को लेकर क्या अनुमान दिया गया है।
2030 तक तीन गुना हो सकती है संख्या
रेडसीर स्ट्रैटेजी कंसल्टेंट्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में इस समय 60 लाख से ज्यादा मंथली एक्टिव गिग वर्कर्स हैं। यह संख्या 2030 तक बढ़कर 1.7 करोड़ से 2.1 करोड़ तक पहुंच सकती है।
यानी दशक के आखिर तक गिग इंटरनेट वर्कफोर्स करीब तीन गुना हो सकती है। इसमें हर महीने प्लेटफॉर्म पर एक्टिव रहने वाले वर्कर्स को शामिल किया गया है, न कि पूरे साल लगातार काम करने वाले लोगों को।
जॉब गैप का 70% हिस्सा हो सकता है कवर
रिपोर्ट का अनुमान है कि 2030 तक गिग इंटरनेट भारत के सालाना नॉन-फार्म जॉब गैप का करीब 70% हिस्सा कवर करने में मदद कर सकता है। भारत में हर साल करीब 80 लाख नए नॉन-फार्म जॉब्स की जरूरत पड़ सकती है।
रिपोर्ट इसे पूरी नौकरी की जरूरत पूरी करने का दावा नहीं मानती, बल्कि जॉब गैप को कम करने वाला एक बड़ा जरिया बताती है।
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ज्यादातर लोग करते हैं पार्ट-टाइम काम
गिग वर्क की सबसे बड़ी खासियत इसका फ्लेक्सिबल होना है। रिपोर्ट के मुताबिक, 90% से ज्यादा वर्कर्स हफ्ते में 40 घंटे से कम काम करते हैं। ज्यादातर लोग इसे फुल-टाइम जॉब की जगह एक्स्ट्रा इनकम या दो नौकरियों के बीच कमाई के साधन के तौर पर इस्तेमाल करते हैं।
एक औसत गिग वर्कर साल में करीब तीन महीने ही किसी प्लेटफॉर्म पर एक्टिव रहता है।
पहली कमाई का जरिया बना गिग वर्क
सर्वे में शामिल करीब 54% वर्कर्स ने बताया कि गिग प्लेटफॉर्म से जुड़ने से पहले उनके पास किसी तरह का पेड वर्क नहीं था। वहीं, 30% से ज्यादा अनुमानित गिग वर्कफोर्स ऐसे लोगों की हो सकती है, जो पहली बार कमाई वाले काम में कदम रखेंगे। रिपोर्ट का सर्वे 2,250 गिग वर्कर्स के जवाबों पर आधारित है।
फुल-टाइम वर्कर्स की कमाई ज्यादा
रिपोर्ट के मुताबिक, फुल-टाइम गिग वर्कर्स समान तरह के फॉर्मल और इनफॉर्मल काम करने वालों के मुकाबले 2.5 गुना तक ज्यादा कमा सकते हैं। गिग वर्कर्स की औसत कमाई 138 रुपये प्रति घंटा रही, जबकि मिलते-जुलते दूसरे कामों में यह करीब 54 रुपये प्रति घंटा थी।
सेक्टर के हिसाब से अलग है कमाई
होम सर्विस से जुड़े वर्कर्स की मंथली कमाई 70,000 से 80,000 रुपये तक बताई गई है। राइड-हेलिंग ड्राइवर्स की कमाई 37,000 से 39,000 रुपये और डिलीवरी वर्कर्स की कमाई 22,000 से 23,000 रुपये महीना रही। करीब 70% वर्कर्स ने माना कि गिग वर्क से उनके भविष्य के जॉब चांस बेहतर हुए हैं।
वेलफेयर मॉडल में बदलाव की जरूरत
रिपोर्ट के मुताबिक, गिग वर्कर्स के लिए वेलफेयर और बेनिफिट सिस्टम को फुल-टाइम नौकरी के पुराने मॉडल पर नहीं बनाया जाना चाहिए। इसे उनके पार्ट-टाइम, फ्लेक्सिबल और कम समय के काम के हिसाब से तैयार करने की जरूरत है। रिपोर्ट में महिलाओं की कम हिस्सेदारी को भी इस सेक्टर के लिए अगला बड़ा मौका बताया गया है।

