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भारत में यूरिया आयात 12% सस्ता, ग्लोबल सप्लाई सुधरने से खाद की कीमतों में बड़ी राहत

भारत को यूरिया खरीद में बड़ी राहत मिलती दिख रही है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक बाजार में कीमतें घटने से देश को जून के मुकाबले 12% सस्ते ऑफर मिले हैं। युद्ध के कारण बढ़ी उर्वरक बाजार की परेशानी अब धीरे-धीरे कम होती नजर आ रही है और सप्लाई में सुधार हुआ है।

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In Short

  • भारत को जून के मुकाबले करीब 12% कम कीमत पर यूरिया खरीद के ऑफर मिले, जिससे वैश्विक बाजार में नरमी के संकेत मिले हैं।
  • RCF को पश्चिमी और पूर्वी तट के लिए यूरिया आयात टेंडर में जरूरत से ज्यादा सप्लाई ऑफर मिले हैं।
  • अप्रैल में यूरिया की कीमत 959 डॉलर प्रति टन तक पहुंच गई थी, लेकिन सप्लाई सुधरने और मांग घटने से अब कीमतों में गिरावट आई है।

India Urea Import: दुनिया के सबसे बड़े यूरिया आयातकों में शामिल भारत को अब उर्वरक खरीद में राहत मिलती दिख रही है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक बाजार में यूरिया की कीमतों में कमी आई है और भारत को जून में हुई खरीद के मुकाबले करीब 12% कम कीमत पर नए ऑफर मिले हैं। इससे संकेत मिल रहे हैं कि युद्ध के कारण बढ़ी वैश्विक उर्वरक बाजार की तंगी अब धीरे-धीरे कम हो रही है।

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भारत को मिले सस्ते यूरिया के ऑफर

सरकारी कंपनी राष्ट्रीय केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (RCF) ने सरकार की ओर से यूरिया आयात के लिए टेंडर जारी किया था। कंपनी को पश्चिमी तट के लिए 10 लाख टन यूरिया की जरूरत थी, जिसके मुकाबले करीब 31 लाख टन की आपूर्ति के ऑफर मिले।

रिपोर्ट के मुताबिक, इन ऑफर्स में यूरिया की कीमत 393.65 डॉलर से 435 डॉलर प्रति टन के बीच रही। वहीं, पूर्वी तट के लिए 7 लाख टन की जरूरत थी, जबकि कंपनियों ने 24 लाख टन यूरिया की पेशकश की। यहां कीमतें 390.25 डॉलर से 435.5 डॉलर प्रति टन के बीच रहीं।

अप्रैल में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची थीं कीमतें

यूरिया की कीमतों में यह गिरावट काफी बड़ी मानी जा रही है, क्योंकि कुछ महीने पहले ही भारत को इसके लिए बहुत ज्यादा कीमत चुकानी पड़ी थी। अप्रैल में भारत ने यूरिया की आपूर्ति के लिए 959 डॉलर प्रति टन तक का भुगतान किया था।

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यह कीमतें युद्ध से पहले के स्तरों से लगभग दोगुनी थीं। हालांकि, इसके बाद वैश्विक स्तर पर सप्लाई में सुधार आया और मांग कमजोर हुई, जिससे कीमतों में तेजी से गिरावट देखने को मिली। जून में हुए टेंडर में ही कीमतें आधे से भी कम स्तर पर आ गई थीं।

होर्मुज संकट के बावजूद सुधरी सप्लाई

वैश्विक उर्वरक बाजार पर युद्ध का असर देखने को मिला था। होर्मुज जलडमरूमध्य, जो दुनिया के उर्वरक व्यापार के लिए एक अहम रास्ता है, वहां जहाजों की आवाजाही सामान्य स्तर से काफी नीचे बनी हुई है।

फरवरी में युद्ध शुरू होने के बाद सप्लाई प्रभावित हुई थी, जिसके कारण यूरिया समेत कई उर्वरकों की कीमतों में तेजी आई थी। हालांकि, अब कीमतों में गिरावट यह दिखा रही है कि बाजार में उपलब्धता बेहतर हो रही है।

भारत की यूरिया नीति पर भी नजर

भारत पहले से ही यूरिया के मामले में आत्मनिर्भरता बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, फिलहाल आयात की जरूरत बनी हुई है। नए टेंडर में मिले कम कीमत वाले ऑफर से देश को उर्वरक खरीद लागत में राहत मिलने की उम्मीद है।