भारत का बड़ा डिफेंस प्लान तैयार: ₹1 लाख करोड़ में खरीदे जाएंगे 60 मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट, बढ़ेगी IAF की ताकत
भारत ने इंडियन एयर फोर्स के लिए 60 मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट खरीदने का बड़ा कदम उठाया है। करीब ₹1 लाख करोड़ के इस प्रोजेक्ट में भारत में निर्माण, 60% घरेलू कंटेंट और पुराने विमानों को बदलने की योजना शामिल है। जानिए इस डिफेंस प्रोग्राम की पूरी जानकारी।

भारत ने इंडियन एयर फोर्स यानी आईएएफ के लिए 60 मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट खरीदने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। करीब ₹1 लाख करोड़ के इस प्रोग्राम का मकसद पुराने ट्रांसपोर्ट विमानों को बदलकर एयर फोर्स की एयरलिफ्ट क्षमता को मजबूत करना है। इस योजना में विमान की क्षमता, भारत में निर्माण और घरेलू हिस्सेदारी पर खास ध्यान दिया गया है।अब इस बड़े डिफेंस प्रोजेक्ट में विमान की पेलोड क्षमता और मेक-इन-इंडिया प्लान से जुड़ी अहम जानकारी सामने आई है।

डिफेंस मिनिस्ट्री ने अगस्त 2026 में 60 मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट के लिए टेंडर जारी किया है। इसमें ऐसे विमानों की मांग की गई है जिनकी कार्गो पेलोड क्षमता 18 से 30 टन के बीच हो। ये विमान इंडियन एयर फोर्स की स्ट्रैटेजिक, टैक्टिकल और ऑपरेशनल एयरलिफ्ट जरूरतों को पूरा करेंगे।इन नए विमानों का इस्तेमाल पुराने एएन-32 और आईएल-76 बेड़े के कुछ हिस्सों को बदलने के लिए किया जाएगा, जिससे सेना की ट्रांसपोर्ट क्षमता और बेहतर होगी।

इस प्रोजेक्ट में मेक-इन-इंडिया को सबसे ज्यादा महत्व दिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, 60 विमानों में से 12 एयरक्राफ्ट फ्लाईअवे कंडीशन में विदेश से लिए जाएंगे, जबकि बाकी 48 विमान भारत में बनाए जाएंगे।भारत में बनने वाले विमानों में 60% इंडिजिनस कंटेंट यानी घरेलू हिस्सेदारी जरूरी होगी। यह लक्ष्य पहले बताए गए 50% से ज्यादा है और देश में डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

इस टेंडर में कई भारतीय कंपनियां हिस्सा ले सकती हैं। संभावित दावेदारों में टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स के साथ लॉकहीड मार्टिन का सी-130जे और महिंद्रा डिफेंस के साथ एम्ब्रेयर का सी-390 मिलेनियम शामिल हैं।एचएएल भी इस प्रक्रिया में शामिल हो सकता है, हालांकि उसके विदेशी एयरक्राफ्ट पार्टनर का नाम अभी सामने नहीं आया है। वहीं एयरबस-टाटा की साझेदारी को अभी पक्की जोड़ी के तौर पर नहीं बताया जा सकता।

इस प्रोग्राम को आगे बढ़ाने के लिए डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल यानी डीएसी ने 27 मार्च 2026 को एक्सेप्टेंस ऑफ नेसेसिटी को मंजूरी दी थी। इसके बाद अब टेंडर जारी कर प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया शुरू की गई है।आगे कंपनियों के विमानों का टेक्निकल असेसमेंट, ट्रायल, कमर्शियल बातचीत और सरकार की मंजूरी जैसी प्रक्रियाएं पूरी होंगी। इसके बाद ही किसी विमान को अंतिम रूप दिया जाएगा।

60 मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट का यह प्रोजेक्ट भारत के बड़े मिलिट्री एयरक्राफ्ट प्रोडक्शन कार्यक्रमों में शामिल हो सकता है। भारत में 48 विमानों का निर्माण होने से डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मजबूती मिलेगी और घरेलू एयरोस्पेस क्षमता भी बढ़ेगी।अब टेंडर के बाद कंपनियों के विमानों की टेक्निकल क्षमता और प्रदर्शन के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय होगी।
