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भारत की GDP गणना पर सवालों के बीच सरकार का पलटवार, कहा- आंकड़ों की तुलना सही तरीके से करना जरूरी

भारत के GDP आंकड़ों पर उठे सवालों के बीच सांख्यिकी सचिव सौरभ गर्ग ने 80 लाख करोड़ और 88 लाख करोड़ रुपये की तुलना पर अहम सफाई दी है। आखिर पुराने GDP आंकड़े क्यों बदले, नई सीरीज से क्या फर्क पड़ा और विवाद की असली वजह क्या है? जानिए पूरा मामला।

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GDP Data Revision
GDP Data Revision

In Short

  • GDP के पुराने आंकड़ों में बदलाव को लेकर उठे सवालों पर सांख्यिकी सचिव सौरभ गर्ग ने सफाई दी है।
  • गर्ग के मुताबिक 80 लाख करोड़ रुपये का आंकड़ा फरवरी 2026 में ही जारी हो चुका था, इसलिए इसे बाद में ग्रोथ बढ़ाने के लिए बदला नहीं गया।
  • नई GDP सीरीज में बेस ईयर 2022-23 करने के साथ GST, डिजिटल डेटा और अनौपचारिक क्षेत्र की बेहतर कवरेज को शामिल किया गया है।

भारत के GDP आंकड़ों को लेकर चल रही बहस में अब सवाल सिर्फ ग्रोथ रेट का नहीं, बल्कि पिछले साल के GDP आंकड़े की तुलना किस आधार पर की जा रही है, इसका भी है। बिजनेस टुडे के एक शो में ग्रुप एडिटर सिद्धार्थ ज़राबी के सवालों का जवाब देते हुए MoSPI सचिव सौरभ गर्ग ने उन आरोपों को खारिज किया है, जिनमें कहा जा रहा है कि पिछले साल के GDP आंकड़े को घटाकर इस साल की ग्रोथ ज्यादा दिखाई गई।

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80 लाख करोड़ के आंकड़े पर क्या बोले गर्ग?

विवाद की बड़ी वजह यह दावा है कि पिछले साल मौजूदा कीमतों पर GDP का आंकड़ा करीब 86 लाख करोड़ रुपये से घटाकर 80 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया। आलोचकों का कहना है कि ऐसा करने से इस साल का ग्रोथ आंकड़ा ज्यादा मजबूत दिखाई देता है।

सौरभ गर्ग ने इस दावे को गलत बताया। उन्होंने कहा कि 80 लाख करोड़ रुपये वाला आंकड़ा फरवरी 2026 में ही जारी कर दिया गया था। उस समय मौजूदा तिमाही का 88 लाख करोड़ रुपये वाला आंकड़ा आया ही नहीं था।

उनका तर्क है कि जब नया आंकड़ा मौजूद ही नहीं था, तब पुराने आंकड़े में बदलाव को इस साल की ग्रोथ बढ़ाने की कोशिश नहीं कहा जा सकता।

क्यों बदले पुराने GDP के आंकड़े?

गर्ग के मुताबिक GDP सीरीज का बेस ईयर 2011-12 से बदलकर 2022-23 किया गया है। इसके साथ ही नए और बेहतर डेटा सोर्स भी शामिल किए गए हैं।

नई सीरीज में अनौपचारिक क्षेत्र की बेहतर कवरेज के साथ GST और दूसरे डिजिटल डेटा का इस्तेमाल किया गया है। इसी वजह से पुराने GDP आंकड़ों में भी बदलाव आया।

पिछले साल के पूरे साल का GDP अनुमान 369 लाख करोड़ रुपये से संशोधित होकर 361 लाख करोड़ रुपये हो गया। इसका असर तिमाही आंकड़ों पर भी पड़ा।

74 लाख करोड़ से 88 लाख करोड़ तक का सफर

गर्ग ने बताया कि वित्त वर्ष 2024-25 की पहली तिमाही का GDP पहले करीब 79 लाख करोड़ रुपये था, जिसे नई सीरीज में करीब 74 लाख करोड़ रुपये किया गया।

इसके बाद तुलना इस तरह बनती है—Q1 2024-25 में करीब 74 लाख करोड़ रुपये, Q1 2025-26 में 80 लाख करोड़ रुपये और Q1 2026-27 में 88 लाख करोड़ रुपये।

‘Apples to Apples’ तुलना जरूरी

सौरभ गर्ग का कहना है कि GDP की सही तस्वीर देखने के लिए एक ही सीरीज के आंकड़ों की तुलना करनी चाहिए। पुराने और नए बेस ईयर के आंकड़ों को मिलाकर ग्रोथ निकालना सही नहीं होगा।

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उनके मुताबिक यह अनुमान लगाना भी केवल अटकल होगी कि नई तिमाही का GDP पुराने बेस ईयर के हिसाब से कितना होता।

असली बहस अब डेटा की पद्धति पर

इस पूरे विवाद का असर सिर्फ राजनीतिक बहस तक सीमित नहीं है। निवेशकों और अर्थशास्त्रियों के लिए भी यह समझना जरूरी है कि GDP के स्तर में बदलाव किसी मनमाने फैसले की वजह से हुआ या नई पद्धति और बेहतर डेटा के कारण।

गर्ग का साफ कहना है कि बेस ईयर बदलने और नए डेटा शामिल होने के बाद पुराने और नए आंकड़ों को सीधे जोड़कर निष्कर्ष निकालना सही नहीं है। ऐसे में GDP की बहस अब ग्रोथ के आंकड़े से ज्यादा उसकी गणना और तुलना के तरीके पर आ गई है।