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GDP के आंकड़ों में हेरफेर के आरोपों पर सरकार का जवाब, Statistics Secretary बोले- ऐसा बिल्कुल नहीं है

भारत के GDP आंकड़ों में आगे बड़े बदलाव की संभावना कम है। MoSPI सचिव सौरभ गर्ग ने कहा कि बेस ईयर रिवीजन से जुड़े ज्यादातर बड़े बदलाव हो चुके हैं। अब नया डेटा आने पर GDP अनुमानों में सामान्य तौर पर छोटे संशोधन ही देखने को मिल सकते हैं।

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In Short

  • बेस ईयर रिवीजन के बाद GDP आंकड़ों में आगे बड़े बदलाव की संभावना कम, सामान्य संशोधन 10 से 30 बेसिस पॉइंट तक रह सकते हैं।
  • MoSPI सचिव सौरभ गर्ग ने कहा, नया डेटा आने पर GDP के आंकड़ों में थोड़ा बदलाव होता रहेगा और यह सामान्य प्रक्रिया है।
  • हाल के बड़े संशोधन बेस ईयर और मेथडोलॉजी बदलाव से जुड़े थे, अब GDP डेटा के सामान्य रिवीजन साइकिल में लौटने की उम्मीद है।

भारत के GDP आंकड़ों में आगे होने वाले बदलाव बहुत बड़े होने की संभावना नहीं है। MoSPI सचिव सौरभ गर्ग के मुताबिक हाल में बेस ईयर बदलने और मेथडोलॉजी अपडेट होने की वजह से जो बड़े संशोधन देखने को मिले, वैसी स्थिति सामान्य तौर पर आगे नहीं रहनी चाहिए। आने वाले समय में GDP डेटा में बदलाव ज्यादातर नियमित प्रक्रिया के तहत और सीमित दायरे में हो सकते हैं।

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बिजनेस टुडे के एक शो में ग्रुप एडिटर सिद्धार्थ ज़राबी के सवालों का जवाब देते हुए MoSPI सचिव सौरभ गर्ग ने कहा कि तिमाही GDP के शुरुआती अनुमान अलग-अलग इंडिकेटर्स के आधार पर तैयार किए जाते हैं। जैसे-जैसे साल के दौरान ज्यादा और बेहतर डेटा उपलब्ध होता है, इन अनुमानों में जरूरी बदलाव किए जाते हैं।

10 से 30 बेसिस पॉइंट तक हो सकता है बदलाव

सौरभ गर्ग ने कहा कि सामान्य परिस्थितियों में GDP के आंकड़ों में होने वाले बदलाव बहुत ज्यादा नहीं होते। उनके मुताबिक ये संशोधन करीब 10, 20 या 30 बेसिस पॉइंट ऊपर या नीचे हो सकते हैं।

उन्होंने बताया कि शुरुआती अनुमानों के बाद जब कंपनियों की आय से जुड़े ज्यादा आंकड़े और सरकार के दूसरे डेटा उपलब्ध होते हैं, तब GDP के अनुमानों को अपडेट किया जाता है।

हाल के संशोधन इतने बड़े क्यों रहे?

गर्ग के मुताबिक हाल में GDP डेटा में जो बड़े बदलाव देखने को मिले, उनकी मुख्य वजह बेस ईयर में बदलाव था। इसके साथ अर्थव्यवस्था की बदलती संरचना को शामिल किया गया और डेटा तथा मेथडोलॉजी को भी अपडेट किया गया।

उन्होंने कहा कि बेस ईयर रिवीजन से जुड़े ज्यादातर बड़े बदलाव अब आंकड़ों में शामिल किए जा चुके हैं। इसमें कीमतों को मापने के नए तरीकों और Producer Price Index फ्रेमवर्क जैसे बदलाव भी शामिल हैं।

हर साल होते रहेंगे कुछ बदलाव

सौरभ गर्ग ने साफ किया कि इसका मतलब यह नहीं है कि GDP के आंकड़ों में आगे कोई संशोधन नहीं होगा। जैसे-जैसे नया डेटा सामने आएगा, कुछ बदलाव होते रहेंगे।

उनके मुताबिक यह सामान्य सांख्यिकीय प्रक्रिया का हिस्सा है और हर साल ऐसा देखने को मिलता है। शुरुआती तिमाही अनुमानों और बाद में आने वाले अधिक व्यापक डेटा के बीच कुछ अंतर होना सामान्य बात है।

पुराने और नए GDP आंकड़ों की तुलना पर क्या कहा?

GDP डेटा को लेकर उठे सवालों के बीच गर्ग का कहना है कि पुराने बेस ईयर वाले आंकड़ों और नए संशोधित आंकड़ों की सीधे तुलना नहीं की जानी चाहिए। उनके मुताबिक तुलना एक ही Statistical Series के भीतर की जानी चाहिए।

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हाल के विवाद में यह सवाल भी उठा कि पहले के Nominal GDP आंकड़ों में नीचे की ओर संशोधन होने से मौजूदा ग्रोथ ज्यादा मजबूत दिखाई दे रही है। गर्ग ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि अलग-अलग सीरीज के आंकड़ों को मिलाकर तुलना करना सही तरीका नहीं है।

आगे ज्यादा स्थिर रह सकता है GDP डेटा

सरकार का संकेत है कि बेस ईयर बदलने और डेटा अपडेट करने से जुड़ा बड़ा काम अब काफी हद तक पूरा हो चुका है। ऐसे में भविष्य में GDP संशोधन ज्यादा नियमित और सीमित रह सकते हैं।

हालांकि नया डेटा आने के साथ आंकड़ों में बदलाव जारी रहेंगे, लेकिन गर्ग के मुताबिक ये सामान्य तौर पर छोटे संशोधन होंगे, न कि हाल में बेस ईयर बदलाव के दौरान देखने को मिले बड़े बदलाव।