शहरों में बेरोजगारी दर बढ़कर 6.6% हुई, जानिए पूरे देश में रोजगार का क्या है हाल
जून 2026 में देश में नौकरियों की स्थिति ज्यादा नहीं बदली, लेकिन शहरों और गांवों की तस्वीर अलग रही। शहरों में बेरोजगारी थोड़ी बढ़ी, जबकि गांवों में हालात बेहतर हुए। महिलाओं की भागीदारी और नौकरी तलाशने वालों की संख्या में कितना बदलाव आया, पढ़ें पूरी खबर।

In Short
- NSO के पीरियॉडिक लेबर फोर्स सर्वे के मुताबिक जून 2026 में देश की बेरोजगारी दर 5.5% पर स्थिर रही।
- सर्वे के मुताबिक शहरों में बेरोजगारी दर मई के 6.4% से बढ़कर जून में 6.6% हो गई।
- रिपोर्ट के अनुसार गांवों में बेरोजगारी दर 5.1% से घटकर 5.0% रह गई।
India Unemployment Rate: जून 2026 के रोजगार आंकड़ों में देशभर की स्थिति लगभग स्थिर नजर आई। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय यानी NSO के पीरियॉडिक लेबर फोर्स सर्वे के मुताबिक देश की बेरोजगारी दर 5.5% पर बनी रही।
हालांकि शहरों और गांवों की स्थिति अलग-अलग रही। शहरों में ज्यादा लोग नौकरी खोजने निकले, लेकिन उसी हिसाब से रोजगार नहीं बढ़े। इस वजह से शहरी बेरोजगारी में थोड़ी बढ़ोतरी हुई। वहीं गांवों में रोजगार की स्थिति कुछ बेहतर हुई है।
काम की तलाश करने वालों की संख्या स्थिर
15 साल और उससे ज्यादा उम्र के लोगों की लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट यानी LFPR जून में 54.4% रही। यह मई के बराबर है, जबकि जून 2025 में यह 54.2% थी। LFPR से पता चलता है कि कितने लोग नौकरी कर रहे हैं या नौकरी की तलाश में हैं।
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वहीं, वर्कर पॉपुलेशन रेशियो यानी WPR भी 51.4% पर स्थिर रहा। पिछले साल जून में यह 51.2% था। इससे संकेत मिलता है कि देश में रोजगार का स्तर फिलहाल ज्यादा बदला नहीं है।
शहरों में बेरोजगारी बढ़ी
शहरी इलाकों में LFPR मई के 49.8% से बढ़कर जून में 50.1% हो गई। इसका मतलब है कि ज्यादा लोग नौकरी की तलाश में बाजार में उतरे। हालांकि नौकरी तलाशने वालों की संख्या के हिसाब से रोजगार के मौके नहीं बढ़े।
इसी वजह से शहरी बेरोजगारी दर मई के 6.4% से बढ़कर जून में 6.6% हो गई। राहत की बात यह है कि जून 2025 में शहरी बेरोजगारी दर 7.1% थी। यानी सालाना आधार पर स्थिति पहले से बेहतर हुई है।
गांवों में रोजगार की स्थिति मजबूत
ग्रामीण इलाकों में बेरोजगारी दर 5.1% से घटकर 5.0% हो गई। ग्रामीण LFPR 56.6% और WPR 53.8% पर स्थिर रहा। NSO के अनुसार ग्रामीण पुरुषों में बेरोजगारी कम हुई है और यह पिछले साल जून के मुकाबले भी नीचे रही।
महिलाओं की भागीदारी में सालाना सुधार
महिलाओं की LFPR जून में 32.7% रही, जो मई में 32.8% थी। हालांकि जून 2025 के 32% के मुकाबले इसमें सुधार हुआ है। ग्रामीण महिलाओं की भागीदारी बढ़कर 36.6% हो गई, जबकि शहरी महिलाओं की LFPR 24.8% पर बनी रही।
कुल मिलाकर आंकड़े बताते हैं कि देश का रोजगार बाजार स्थिर है, लेकिन शहरों में बढ़ते नौकरी चाहने वालों के मुकाबले नई नौकरियां पैदा करने का दबाव अभी भी बना हुआ है।

