महंगाई और महंगे तेल की चिंता के बीच भारत की इकोनॉमी मजबूत, RBI को त्योहारी मांग से बड़ी उम्मीद
ईरान युद्ध के बाद महंगाई और आर्थिक सुस्ती को लेकर बढ़ी चिंता अब कुछ कम होती दिख रही है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, महंगाई RBI की तय सीमा में है और बाजार में मांग भी मजबूत बनी हुई है। हालांकि महंगा कच्चा तेल और कमजोर रुपया आगे फिर मुश्किलें बढ़ा सकते हैं।

In Short
- महंगाई अभी RBI की तय 2% से 6% की सीमा के अंदर है।
- ज्यादातर अर्थशास्त्रियों को इस साल रेपो रेट 5.25% पर बने रहने की उम्मीद है।
- महंगा कच्चा तेल और कमजोर रुपया अभी भी भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा जोखिम हैं।
ईरान युद्ध के करीब पांच महीने बाद भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर तस्वीर पहले के मुकाबले कुछ बेहतर दिख रही है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार महंगाई में हल्की बढ़ोतरी के बावजूद यह RBI की 2% से 6% की तय सीमा के भीतर बनी हुई है और मांग के कई संकेतक भी मजबूत नजर आ रहे हैं।
मांग में मजबूती के संकेत
रिपोर्ट के मुताबिक गाड़ियों की बिक्री रिकॉर्ड स्तर पर है। क्रेडिट ग्रोथ दो साल के उच्च स्तर पर पहुंच चुकी है और GST कलेक्शन भी डबल डिजिट रफ्तार से बढ़ रहा है।
यह स्थिति इसलिए अहम है क्योंकि ईरान युद्ध के बाद तेल की कीमतों में तेजी ने भारत के लिए महंगाई और आर्थिक सुस्ती की चिंता बढ़ा दी थी। हालांकि अभी भी ग्रोथ की मजबूती कितनी टिकाऊ रहेगी इसे लेकर सवाल बने हुए हैं।
RBI गवर्नर ने जताया भरोसा
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने इस हफ्ते कहा कि ग्रोथ मजबूत बनी हुई है और महंगाई काफी हद तक नियंत्रण में है। उन्होंने कंपनियों की मजबूत बैलेंस शीट और बाहरी क्षेत्र की स्थिति को भी भरोसे की वजह बताया।
उनके मुताबिक भारत हर संकट के बाद पहले से ज्यादा मजबूत होकर उभरता है।
ब्याज दर 5.25% पर रह सकती है
ज्यादातर अर्थशास्त्रियों का मानना है कि RBI इस साल ब्याज दर को 5.25% पर ही बनाए रख सकता है। त्योहारी सीजन में खर्च बढ़ने की उम्मीद है और इसी वजह से RBI फिलहाल मांग की रफ्तार को कमजोर नहीं करना चाहेगा।
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SBI Group के मुख्य आर्थिक सलाहकार सौम्य कांति घोष के मुताबिक इस साल त्योहारी मांग मजबूत रह सकती है। SBI Group को अप्रैल-जून तिमाही में भारत की अर्थव्यवस्था के 8% की दर से बढ़ने की उम्मीद है।
कंपनियों को भी दिख रही मजबूत मांग
हिंदुस्तान यूनिलीवर ने कहा कि महंगाई के कारण मांग पर असर पड़ने की आशंका अभी तक सच साबित नहीं हुई है। Britannia Industries ने माहौल को मजबूत बताया है।
Mahindra & Mahindra ने शहरी और ग्रामीण बाजारों में मजबूत मांग की बात कही जबकि TVS Motor ने ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में खर्च को मजबूत बताया।
तेल और रुपये से अब भी खतरा
हालांकि जोखिम पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं। मध्य पूर्व में नए तनाव से कच्चा तेल फिर 90 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच रहा है। भारत अपनी जरूरत का करीब 90% कच्चा तेल आयात करता है।
कमजोर रुपया भी आयात महंगा कर सकता है। इसके अलावा अमेरिकी Federal Reserve और Bank of Japan की ब्याज दरों से जुड़े फैसले RBI की आगे की नीति पर दबाव डाल सकते हैं।
