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RBI का बड़ा फैसला; डॉलर डिपॉजिट सुविधा समय से पहले बंद, बॉन्ड बाजार से लेकर रुपये तक दिखेगा असर

RBI के डॉलर डिपॉजिट विंडो को तय समय से पहले बंद करने के फैसले से भारतीय बॉन्ड बाजार में हलचल बढ़ गई है। शॉर्ट टर्म बॉन्ड यील्ड में तेजी आई और रुपये की चाल पर भी असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।

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AI Generated Image

In Short

  • RBI ने विदेशी निवेशकों के लिए डॉलर डिपॉजिट सुविधा को तय समय से एक महीने पहले बंद करने का फैसला लिया।
  • फैसले के बाद 5 साल के बॉन्ड यील्ड में 9 बेसिस प्वाइंट तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
  • डॉलर इनफ्लो से RBI के विदेशी मुद्रा भंडार में तीन हफ्तों में 30 अरब डॉलर से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई थी।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के डॉलर डिपॉजिट विंडो को समय से पहले बंद करने के फैसले के बाद बॉन्ड बाजार में हलचल देखने को मिली है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, इस कदम से शॉर्ट टर्म बॉन्ड यील्ड में तेजी आई है और बाजार में रुपये की लिक्विडिटी को लेकर चिंता बढ़ी है। RBI ने विदेशी निवेशकों के लिए शुरू की गई इस खास सुविधा को तय समय से करीब एक महीने पहले बंद करने का फैसला लिया है।

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RBI के फैसले से बाजार को लगा झटका

RBI का यह फैसला शुक्रवार देर शाम सामने आया, जिसने बाजार को चौंका दिया। रिपोर्ट के मुताबिक, इससे पहले 5 अगस्त की मौद्रिक नीति बैठक में RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने इस सुविधा को समय से पहले बंद करने की संभावना से इनकार किया था।

डॉलर डिपॉजिट सुविधा से आने वाले विदेशी फंड ने भारतीय बाजार में रुपये की उपलब्धता बढ़ाने में मदद की थी। अब इसके जल्दी बंद होने से बॉन्ड बाजार में मांग पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

शॉर्ट टर्म बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी

फैसले के बाद छोटी अवधि वाले बॉन्ड सबसे ज्यादा प्रभावित हुए। 5 साल की बॉन्ड यील्ड 9 बेसिस प्वाइंट तक बढ़कर 6.44 प्रतिशत पहुंच गई, जबकि 10 साल की बॉन्ड यील्ड में 4 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी हुई और यह 6.80 प्रतिशत तक पहुंच गई।

जना स्मॉल फाइनेंस बैंक के ट्रेजरी हेड गोपाल त्रिपाठी के मुताबिक, डॉलर डिपॉजिट स्कीम से मिलने वाला इनफ्लो एक महीने पहले रुकने से बाजार में जितनी लिक्विडिटी की उम्मीद थी, उससे कम उपलब्ध हो सकती है।

विदेशी मुद्रा भंडार को मिला था फायदा

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, इस सुविधा के जरिए अब तक 50 अरब डॉलर से ज्यादा की रकम आकर्षित हुई है। इससे RBI के विदेशी मुद्रा भंडार में भी बढ़ोतरी हुई। पिछले तीन हफ्तों में विदेशी मुद्रा भंडार में 30 अरब डॉलर से ज्यादा की वृद्धि हुई और यह करीब 707 अरब डॉलर तक पहुंच गया।

हालांकि, RBI के इस कदम से आगे विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ोतरी की रफ्तार सीमित हो सकती है और रुपये की मजबूती पर भी असर पड़ सकता है।

RBI ने क्यों लिया फैसला?

नोमुरा होल्डिंग्स के अर्थशास्त्रियों के मुताबिक, RBI का फैसला लागत और फायदे के आकलन के आधार पर लिया गया हो सकता है। उनका कहना है कि यह फंड उधार के रूप में आते हैं और इनकी अवधि तीन से पांच साल तक होती है, जिससे भविष्य में देनदारी बढ़ती है।

इसके अलावा RBI को फॉरवर्ड प्रीमियम की लागत भी उठानी पड़ती है, जिसे देखते हुए इस सुविधा को जारी रखना महंगा हो सकता है।

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रुपये की चाल पर भी नजर

सिटीग्रुप के चीफ इंडिया इकोनॉमिस्ट समीरन चक्रवर्ती के मुताबिक, इस योजना का इस्तेमाल रुपये को तेजी से मजबूत करने के लिए करना RBI का मुख्य उद्देश्य नहीं था। सिटीग्रुप ने अब इस सुविधा से आने वाले कुल इनफ्लो का अनुमान 70 अरब डॉलर लगाया है, जो पहले के अनुमान से 10 अरब डॉलर कम है।

रिपोर्ट के मुताबिक, RBI के पास अब रुपये में उतार-चढ़ाव को संभालने के लिए ज्यादा क्षमता हो सकती है, लेकिन बाजार की नजर इस बात पर रहेगी कि इस फैसले का हेजिंग और करेंसी मार्केट में सट्टेबाजी पर क्या असर पड़ता है।