scorecardresearch

सिल्क प्रोडक्शन में भारत बनेगा दुनिया का नंबर-1 देश! सरकार ने 2030-31 तक 60 हजार टन का रखा लक्ष्य

केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि सरकार ने 2028-29 तक भारत को दुनिया में सिल्क यानी रेशम उत्पादन में नंबर-1 बनाने का संकल्प लिया है। उन्होंने बताया कि देश में रेशम उत्पादन 2014 के 26,000 टन से बढ़कर अब 42,000 टन हो गया है।

Advertisement
AI Generated Image

केंद्र सरकार ने 2030-31 तक देश में सिल्क (Silk) प्रोडक्शन बढ़ाकर 60,000 टन करने का लक्ष्य रखा है। केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि सरकार ने 2028-29 तक भारत को दुनिया में सिल्क यानी रेशम उत्पादन में नंबर-1 बनाने का संकल्प लिया है। उन्होंने बताया कि देश में रेशम उत्पादन 2014 के 26,000 टन से बढ़कर अब 42,000 टन हो गया है।

advertisement

कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह कहा कि सरकार सेरीकल्चर सेक्टर के विस्तार और रेशम किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।

किसानों की आय बढ़ाने पर जोर

सरकार का लक्ष्य शहतूत की पत्तियों की पैदावार बढ़ाने और कोकून पालन के चक्र बढ़ाकर रेशम उत्पादन को 60,000 टन तक ले जाना है। इसके साथ किसानों की सालाना आय 10 लाख से 12 लाख रुपये तक पहुंचाने की महत्वाकांक्षा भी जताई गई है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वैज्ञानिकों के नए इनोवेशन, हाइब्रिड किस्मों और आधुनिक मशीनरी का सीधा लाभ किसानों तक पहुंचना जरूरी है। उनके मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय रेशम की मांग बढ़ रही है, जबकि चीन का उत्पादन घट रहा है।

AI और मशीन लर्निंग से बढ़ेगी क्षमता

कपड़ा मंत्रालय की संयुक्त सचिव (सिल्क) और CSB की वाइस चेयरपर्सन पद्मिनी सिंगला ने कहा कि 2030-31 तक 60,000 मीट्रिक टन उत्पादन का लक्ष्य हासिल करने के लिए हाई-यील्डिंग सिल्कवर्म हाइब्रिड और आधुनिक मशीनरी पेश की जा रही है। गुणवत्ता जांच और उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए AI, GIS और मशीन लर्निंग तकनीकों को भी जोड़ा जा रहा है।

सरकार सेरीकल्चर से लेकर रीलिंग और वीविंग तक पूरी वैल्यू चेन मजबूत करने पर जोर दे रही है। कपड़ा बाजार को 300 अरब डॉलर तक ले जाना और बुनकरों व कामगारों को न्यूनतम आर्थिक सुरक्षा देना भी प्राथमिकताओं में शामिल है।

कर्नाटक की भूमिका अहम

केंद्रीय राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने कहा कि देश के कुल रेशम उत्पादन में कर्नाटक सबसे आगे है। उन्होंने बताया कि इस सेक्टर को और मजबूत करने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर और औद्योगिक विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

सरकार ग्लोबल एक्सपोर्ट स्टैंडर्ड के रेशम उत्पादन के लिए आधुनिक तकनीक और हाई-डेंसिटी प्रोडक्शन को बढ़ावा दे रही है। साथ ही MSME के तहत उद्यमियों के रजिस्ट्रेशन, सब्सिडी और क्वालिटी सुधार योजनाओं के जरिए स्थानीय उत्पादकों को बाजार उपलब्ध कराने और रोजगार बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।