महंगे तेल और मिडिल ईस्ट संकट के बीच भारत के लिए राहत! IMF ने बढ़ाया ग्रोथ अनुमान, चीन की रफ्तार धीमी
मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष और महंगे तेल के कारण दुनिया की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है। इसी बीच IMF ने भारत की आर्थिक विकास दर को लेकर अच्छी खबर दी है। संस्था ने 2026 के लिए भारत का ग्रोथ अनुमान बढ़ाकर 7% कर दिया है। आखिर भारतीय अर्थव्यवस्था पर IMF का भरोसा क्यों बढ़ा और वैश्विक संकट का कितना असर पड़ सकता है? जानिए रिपोर्ट की अहम बातें।

In Short
- IMF ने भारत का 2026 का ग्रोथ अनुमान 60 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 7% किया।
- मजबूत घरेलू मांग और सर्विस सेक्टर से भारतीय अर्थव्यवस्था को सहारा।
- 2026 में चीन की ग्रोथ 4.5% और वैश्विक विकास दर 3.1% रहने का अनुमान।
भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर एक अच्छी खबर सामने आई है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने साल 2026 के लिए भारत की आर्थिक विकास दर का अनुमान बढ़ाकर 7% कर दिया है। जुलाई 2026 के मुकाबले इसमें 0.6 प्रतिशत अंक यानी 60 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की गई है। IMF का कहना है कि घरेलू मांग मजबूत रहने और सर्विस सेक्टर के बेहतर प्रदर्शन से भारतीय अर्थव्यवस्था को सहारा मिल रहा है।
IMF ने अपनी ताजा वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट Resilience Under Strain, Urgent Choices में यह अनुमान जारी किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, मिडिल ईस्ट में संघर्ष, महंगे तेल और वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल बना रह सकता है।
2026 और 2027 में कितनी रहेगी भारत की ग्रोथ?
IMF के मुताबिक, भारत की विकास दर 2025 में 7.8% रही थी, जबकि 2026 में इसके 7% रहने का अनुमान है। संस्था ने 2027 के लिए भी ग्रोथ का अनुमान 7% रखा है। अप्रैल 2026 की रिपोर्ट के मुकाबले दोनों वर्षों के अनुमानों में 0.5 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी हुई है।
कैलेंडर ईयर के आधार पर IMF ने 2026 में भारत की ग्रोथ 7.4% और 2027 में 7% रहने का अनुमान जताया है। रिपोर्ट के मुताबिक, देश में लोगों की खरीदारी और सेवाओं की मजबूत मांग आर्थिक गतिविधियों को रफ्तार दे रही है।
चीन समेत दूसरे देशों की ग्रोथ पर दबाव
जहां भारत के लिए अनुमान बढ़ाया गया है, वहीं कई उभरती अर्थव्यवस्थाओं की रफ्तार धीमी पड़ सकती है। IMF के मुताबिक, इन देशों की औसत विकास दर 2025 के 4.5% से घटकर 2026 में 3.7% रह सकती है। हालांकि, 2027 में इसके 4.4% तक पहुंचने की उम्मीद है।
चीन की अर्थव्यवस्था के लिए भी चुनौतियां बढ़ सकती हैं। IMF ने 2026 में चीन की विकास दर 4.5% रहने का अनुमान जताया है। इसकी वजह महंगा कच्चा तेल, लंबे समय तक बनी रहने वाली अनिश्चितता और अर्थव्यवस्था की संरचनात्मक समस्याएं बताई गई हैं।
महंगे तेल से भारत को भी हो सकता है नुकसान
IMF ने साफ किया है कि बेहतर ग्रोथ अनुमान का मतलब यह नहीं है कि भारत वैश्विक ऊर्जा संकट से पूरी तरह सुरक्षित है। तेल और गैस की बढ़ती कीमतों का असर उन देशों पर ज्यादा पड़ सकता है, जो ऊर्जा आयात पर निर्भर हैं।
रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज मार्च 2027 में दोबारा खुल सकता है और अक्टूबर 2027 तक युद्ध से पहले जैसी स्थितियां काफी हद तक लौट सकती हैं। हालांकि, ऊर्जा की कीमतें पहले के मुकाबले ऊंची बनी रह सकती हैं।
दुनिया की अर्थव्यवस्था की रफ्तार होगी धीमी
IMF के मुताबिक, वैश्विक अर्थव्यवस्था की विकास दर 2025 के 3.5% से घटकर 2026 में 3.1% रह सकती है। इसके बाद 2027 में मामूली सुधार के साथ यह 3.4% तक पहुंचने का अनुमान है। संस्था का कहना है कि युद्ध से सप्लाई पर पड़ने वाला असर और टेक्नोलॉजी सेक्टर की मांग अलग-अलग देशों की आर्थिक रफ्तार तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

