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सोने पर बढ़ी इंपोर्ट ड्यूटी का असर! भारत में फिर बढ़ा ग्रे मार्केट, तस्करी 100 टन के पार जाने की आशंका

भारत में सोने के कारोबार में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। WGC के मुताबिक, इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ने के बाद ग्रे मार्केट को फायदा मिला है और संगठित कारोबार पर दबाव बढ़ा है। जानिए कैसे टैक्स के बढ़ते अंतर ने सोने के बाजार में नई चुनौती खड़ी कर दी है।

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In Short

  • WGC के अनुसार, सोने पर 15% इंपोर्ट ड्यूटी और 3% GST बढ़ने के बाद ग्रे मार्केट को बढ़ावा मिला है, जिससे संगठित कारोबार प्रभावित हुआ है।
  • इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ने के बाद सोने की तस्करी दोबारा बढ़ सकती है और 2026 में अवैध आयात 100 टन से ज्यादा पहुंचने की आशंका है।
  • जून तिमाही में भारत का गोल्ड इंपोर्ट 23% घटकर 98.1 टन और कुल सोने की मांग 6% घटकर 131.4 टन रही।

भारत में सोने के कारोबार के सामने नई परेशानी खड़ी हो गई है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने सोने पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाई, जिसके बाद बिना आधिकारिक रास्ते से आने वाले सोने की सप्लाई बढ़ने लगी। इससे ग्रे मार्केट में काम करने वालों को फायदा हो रहा है, जबकि बड़े और रजिस्टर्ड ज्वेलर्स को नुकसान उठाना पड़ रहा है।

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वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल यानी WGC का कहना है कि ज्यादा इंपोर्ट ड्यूटी के कारण कानूनी और गैर-कानूनी सोने की कीमत में बड़ा फर्क आ गया है। इसी वजह से अवैध तरीके से सोना लाना ज्यादा फायदेमंद हो गया है।

15% इंपोर्ट ड्यूटी और 3% GST से बढ़ा अंतर

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत सरकार ने 13 मई को सोने पर इंपोर्ट टैरिफ को बढ़ाकर 15% कर दिया था। इसका उद्देश्य सोने की मांग को नियंत्रित करना, व्यापार घाटा कम करना और रुपये पर दबाव घटाना था।

WGC इंडिया के सीईओ सचिन जैन ने रॉयटर्स से कहा कि 15% इंपोर्ट ड्यूटी और 3% GST को मिलाकर कुल अंतर करीब 18% तक पहुंच जाता है। उनके मुताबिक, इतना बड़ा अंतर ग्रे मार्केट को बढ़ावा देता है और इससे एक अलग कारोबार खड़ा हो जाता है।

सोने की जब्ती में भी हुआ इजाफा

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 13 मई से 30 जून के बीच देश की जांच एजेंसियों ने करीब 160.91 किलोग्राम सोना जब्त किया। यह मात्रा 1 अप्रैल से 12 मई के बीच जब्त किए गए 86.16 किलोग्राम सोने की तुलना में लगभग दोगुनी है।

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WGC के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में सोने की तस्करी 2024 में घटकर 69.2 टन रह गई थी। इससे पहले 2023 में यह आंकड़ा 156.1 टन था। वहीं, 2025 में इंपोर्ट ड्यूटी में कटौती के बाद तस्करी और घटकर 20.4 टन रह गई थी।

हालांकि, हाल में ग्रे मार्केट के दोबारा बढ़ने से उद्योग से जुड़े लोगों का अनुमान है कि 2026 में अवैध सोने का आयात 100 टन से ज्यादा हो सकता है।

जून तिमाही में सोने के आयात और मांग में गिरावट

WGC की रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल-जून तिमाही में भारत का नेट गोल्ड इंपोर्ट सालाना आधार पर 23% घटकर 98.1 टन रह गया। यह सितंबर 2020 के बाद सबसे निचला तिमाही स्तर है। उस समय कोरोना महामारी के कारण लगाए गए प्रतिबंधों से मांग प्रभावित हुई थी।

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वहीं, जून तिमाही में भारत की कुल सोने की मांग 6% घटकर 131.4 टन रह गई। इसकी मुख्य वजह ज्वेलरी की खरीदारी में कमी रही, हालांकि निवेश के लिए सोने की मांग मजबूत बनी रही।

कीमतें स्थिर रहीं तो बढ़ सकती है मांग

WGC के अनुसार, साल की दूसरी छमाही में सोने की मांग में सुधार आ सकता है। सचिन जैन का कहना है कि अगर सोने की कीमतें स्थिर रहती हैं तो वे ग्राहक भी बाजार में वापस आ सकते हैं, जो पहले कीमतों में तेजी के कारण खरीदारी नहीं कर पाए थे।