
ग्लोबल बैंकिंग में भारतीयों का दबदबा, फिर HDFC-Kotak जैसे बैंकों को CEO ढूंढने में क्यों हो रही मुश्किल
भारत के बैंकिंग सेक्टर में CEO पद के लिए योग्य लीडर्स की तलाश चुनौती बन रही है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय मूल के बैंकर्स दुनियाभर में बड़े पदों पर हैं, लेकिन देश के बड़े निजी बैंकों को अनुभवी उत्तराधिकारी चुनने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

In Short
- भारतीय मूल के बैंकर्स विदेशों की बड़ी वित्तीय कंपनियों का नेतृत्व कर रहे हैं, लेकिन भारत में बड़े बैंकों को CEO चुनने में चुनौती आ रही है।
- HDFC Bank और Kotak Mahindra Bank नए CEO की तलाश कर रहे हैं, दोनों के पास पहले से तैयार उत्तराधिकारी नहीं है।
- भारत में अच्छे बैंकर्स की कमी नहीं है, लेकिन पूरे बड़े बैंक को संभालने वाले अनुभवी लीडर्स की संख्या सीमित है।
भारतीय मूल के कई बैंकर्स दुनिया की बड़ी वित्तीय कंपनियों का नेतृत्व कर रहे हैं। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, Deutsche Bank, Citigroup और Barclays जैसी बड़ी कंपनियों में भारतीय मूल के अधिकारी CEO जैसे बड़े पदों तक पहुंचे हैं।
लेकिन भारत में बड़े निजी बैंकों के लिए अपने अगले CEO को चुनना आसान नहीं हो रहा है। बैंकों के पास अच्छे बैंकर्स तो हैं, लेकिन ऐसे अधिकारियों की संख्या कम है जो पूरे बड़े बैंक की जिम्मेदारी संभाल सकें।
HDFC और Kotak को नए CEO की तलाश
रिपोर्ट के मुताबिक, देश के सबसे बड़े निजी बैंक HDFC Bank में नए CEO की तलाश चल रही है। मौजूदा CEO ने अपना कार्यकाल आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया है।
वहीं Kotak Mahindra Bank भी पिछले तीन साल में दूसरी बार नए CEO की तलाश कर रहा है। दोनों बैंकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि उनके पास पहले से कोई ऐसा अधिकारी तैयार नहीं है, जो तुरंत CEO की जिम्मेदारी संभाल सके।

बड़े पद के लिए कम हो जाते हैं ऑप्शन
ब्लूमबर्ग से बातचीत में बैंकिंग सेक्टर से जुड़े अधिकारियों, बोर्ड सदस्यों और रिक्रूटर्स ने बताया कि भारत के बड़े निजी बैंक अक्सर CEO पद के लिए उन्हीं कुछ नामों पर बार-बार विचार करते हैं।
Korn Ferry की सीनियर क्लाइंट पार्टनर लीना राजपूत के अनुसार, किसी बड़े निजी बैंक की CEO तलाश शुरुआत में करीब 20 नामों से शुरू होती है, लेकिन बाद में यह संख्या घटकर 5 से भी कम रह जाती है।
CEO बदलाव से घटा अनुभवी लोगों का पूल
Spencer Stuart की एक स्टडी के मुताबिक, जून 2026 तक के 30 महीनों में 30 बड़े निजी बैंकों और नॉन-बैंक लेंडर्स में से 17 कंपनियों में CEO बदले गए। इनमें करीब 60% नियुक्तियां बाहर से की गईं।
विशेषज्ञों का कहना है कि कई अच्छे उम्मीदवार पहले ही CEO बन चुके हैं और जल्द किसी दूसरे बैंक में जाने के लिए तैयार नहीं हैं। इससे नए CEO की तलाश और मुश्किल हो जाती है।
RBI के नियम भी बढ़ाते हैं चुनौती
भारत में निजी बैंकों के CEO की नियुक्ति सिर्फ बैंक के बोर्ड के फैसले से नहीं होती। इसके लिए भारतीय रिजर्व बैंक की मंजूरी भी जरूरी होती है।
बैंकों को ऐसे अधिकारी की तलाश करनी होती है, जिसके पास बैंकिंग का अनुभव हो और जो RBI के नियमों पर भी खरा उतरे। उम्र और कार्यकाल से जुड़े नियम भी CEO चयन में अहम भूमिका निभाते हैं।
अच्छे बैंकर्स हैं लेकिन बड़े लीडर कम
रिपोर्ट के अनुसार, भारत में बैंकिंग टैलेंट की कमी नहीं है। कई अधिकारी अपने क्षेत्र में काफी अच्छे हैं, लेकिन पूरे बैंक को चलाने का अनुभव रखने वाले लीडर्स की संख्या कम है।
कॉरपोरेट एडवाइजर श्रीनाथ श्रीधरन के मुताबिक, बैंकों ने अच्छे विशेषज्ञ तो तैयार किए हैं, लेकिन ऐसे लीडर कम तैयार हुए हैं जो पूरे संस्थान की जिम्मेदारी संभाल सकें। उन्होंने कहा कि लीडरशिप तैयार करने की प्रक्रिया को और मजबूत करने की जरूरत है।
