GST Registration के लिए बदल गए दस्तावेजों के नियम! किराए का एग्रीमेंट नहीं तो क्या होगा? CBIC ने बताया तरीका
जीएसटी रजिस्ट्रेशन कराने वाले कारोबारियों के लिए सीबीआईसी ने दस्तावेजों से जुड़े नियम स्पष्ट किए हैं। अब किराए की दुकान, दूसरे की प्रॉपर्टी या पुश्तैनी मकान से बिजनेस करने वालों को कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना होगा। जानिए किन दस्तावेजों की जरूरत पड़ेगी और क्या है नया तरीका।

In Short
- जीएसटी रजिस्ट्रेशन में अधिकारी अब केवल तय किए गए दस्तावेज ही मांग सकेंगे।
- किराए का एग्रीमेंट नहीं होने पर भी जरूरी अंडरटेकिंग देकर जीएसटी रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन किया जा सकेगा।
- - पुश्तैनी प्रॉपर्टी से बिजनेस करने वालों के लिए एफिडेविट का फॉर्मेट तय किया गया है।
जीएसटी रजिस्ट्रेशन कराने वाले कारोबारियों के लिए जरूरी खबर है। अगर आप किराए की दुकान, किसी दूसरे की प्रॉपर्टी या पुश्तैनी मकान से अपना बिजनेस चला रहे हैं, तो रजिस्ट्रेशन के दौरान सही दस्तावेज देना जरूरी है। अब सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्सेज एंड कस्टम्स यानी सीबीआईसी ने इस प्रक्रिया को आसान और एक जैसा बनाने की पहल की है। आइए जानते हैं कि अलग-अलग परिस्थितियों में कौन से दस्तावेज देने होंगे और उनमें क्या जानकारी भरनी होगी।
GST रजिस्ट्रेशन में अब कौन से दस्तावेज मांगे जाएंगे?
सीबीआईसी ने जीएसटी रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को एक जैसा बनाने के लिए निर्देश दिए हैं। इसके मुताबिक, अधिकारी आवेदन करने वालों से केवल फॉर्म GST REG-01 में तय किए गए दस्तावेज ही मांग सकेंगे। इसका मकसद कारोबारियों को बेवजह अतिरिक्त कागजात जमा करने की परेशानी से बचाना है।इसके साथ ही प्रॉपर्टी के इस्तेमाल से जुड़े कंसेंट लेटर, अंडरटेकिंग और एफिडेविट के फॉर्मेट भी बताए गए हैं।
दूसरे की प्रॉपर्टी से बिजनेस करते हैं तो क्या करना होगा?
अगर कोई व्यक्ति दूसरे की प्रॉपर्टी से कारोबार करता है, तो उसे प्रॉपर्टी मालिक का कंसेंट लेटर यानी सहमति पत्र देना होगा।इसमें मालिक का नाम, आवेदक से रिश्ता, पता और प्रॉपर्टी का पूरा एड्रेस लिखना होगा। यह भी बताना होगा कि कारोबार के लिए पूरी प्रॉपर्टी इस्तेमाल होगी या उसका कोई खास हिस्सा।
अगर केवल एक हिस्सा इस्तेमाल हो रहा है, तो उसकी लोकेशन और अनुमानित एरिया बताना जरूरी होगा। वह हिस्सा अलग से पहचाना जा सके और बिजनेस के लिए विशेष रूप से तय होना चाहिए, भले ही प्रॉपर्टी में दूसरे लोग भी रहते हों।
मालिक को यह भी बताना होगा कि उसे उस जगह का इस्तेमाल जीएसटी रजिस्ट्रेशन में मुख्य या अतिरिक्त बिजनेस एड्रेस के तौर पर करने से कोई आपत्ति नहीं है।
किराए का एग्रीमेंट नहीं है तो कैसे मिलेगा GST नंबर?
अगर दुकान या ऑफिस का कोई औपचारिक रेंट एग्रीमेंट नहीं है, तो आवेदक को एक अंडरटेकिंग देनी होगी।इसमें अपना नाम, बिजनेस की जानकारी, घर का पता, कारोबार की जगह का एड्रेस और प्रॉपर्टी मालिक की पहचान बतानी होगी।
साथ ही यह भी बताना होगा कि वह कितने समय से उस जगह पर कानूनी रूप से रह रहा है या उसका इस्तेमाल कर रहा है।
बिजली, पानी के बिल और कारोबार से जुड़े कानूनी तथा टैक्स नियमों का पालन करने की जिम्मेदारी भी स्वीकार करनी होगी। आवेदक को यह पुष्टि करनी होगी कि दी गई जानकारी सही है।
पुश्तैनी प्रॉपर्टी पर बिजनेस है तो क्या नियम हैं?
अगर प्रॉपर्टी किसी मृत पूर्वज के नाम पर है, तो जीएसटी रजिस्ट्रेशन के लिए एफिडेविट यानी शपथ पत्र देना होगा।इसमें आवेदक को खुद को कानूनी वारिस बताना होगा। मृत व्यक्ति का नाम, मृत्यु की तारीख और प्रॉपर्टी की जानकारी देनी होगी।प्रॉपर्टी पर कानूनी कब्जे, बिजली-पानी के बिल और बिजनेस से जुड़े टैक्स की जिम्मेदारी भी स्वीकार करनी होगी।
यह एफिडेविट कम से कम 100 रुपये के नॉन-ज्यूडिशियल स्टाम्प पेपर पर तैयार होगा। इसे फर्स्ट क्लास ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट, एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट या नोटरी पब्लिक की मौजूदगी में पूरा करना होगा।
सीबीआईसी का मकसद जीएसटी रजिस्ट्रेशन में पारदर्शिता लाना है। आवेदन करने वालों को अपनी प्रॉपर्टी से जुड़ी सही जानकारी देनी चाहिए और दस्तावेजों की पूरी सूची के लिए सीबीआईसी के संबंधित निर्देश देखने चाहिए।

