scorecardresearch

GST काउंसिल की बैठक में बड़े फैसले! UPI पर MDR को लेकर वित्त मंत्री ने साफ की तस्वीर

57वीं GST काउंसिल की बैठक में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने UPI ट्रांजैक्शन पर MDR को लेकर स्थिति साफ कर दी है। GST दरों में कोई बदलाव नहीं हुआ, लेकिन रिफंड प्रक्रिया और टैक्स नियमों को आसान बनाने के लिए कई अहम फैसले लिए गए हैं। जानिए कारोबारियों और टैक्सपेयर्स को क्या राहत मिलेगी।

Advertisement

In Short

  • GST काउंसिल की बैठक में UPI पर MDR लगाने को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई।
  • GST की दरों में कोई बदलाव नहीं, रिफंड और टैक्स नियमों को आसान बनाने पर जोर।
  • 90% रिफंड क्लेम पर तीन वर्किंग डेज में आदेश जारी करने की तैयारी।

57वीं जीएसटी काउंसिल की बैठक में आम लोगों और कारोबारियों से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को साफ किया कि बैठक में UPI ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने से जुड़े किसी प्रस्ताव पर चर्चा नहीं हुई। इसके अलावा काउंसिल ने GST की दरों में भी कोई बदलाव नहीं किया है। इस बार सरकार का पूरा ध्यान GST की प्रक्रिया आसान बनाने, रिफंड जल्दी देने और ईमानदार टैक्सपेयर्स को राहत पहुंचाने पर रहा।

advertisement

UPI पर MDR को लेकर क्या बोलीं वित्त मंत्री?

बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में निर्मला सीतारमण ने कहा कि जीएसटी काउंसिल की बैठक में MDR से जुड़े किसी मुद्दे पर चर्चा नहीं हुई।

वित्त मंत्रालय के मुताबिक, GST की दरों का ढांचा अब तय हो चुका है। इसलिए सरकार का ध्यान रजिस्ट्रेशन, रिटर्न, रिफंड और इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) जैसी प्रक्रियाओं को बेहतर बनाने पर है।

ईमानदार टैक्सपेयर्स को मिलेगी राहत

बैठक में CGST एक्ट की धारा 162C में बदलाव के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई। इसका मकसद उन ईमानदार टैक्सपेयर्स को राहत देना है, जिनका इनपुट टैक्स क्रेडिट सप्लाई चेन में किसी दूसरे सप्लायर की गलती के कारण रोक दिया जाता है या वापस ले लिया जाता है।

वित्त मंत्री ने बताया कि अगर सप्लाई चेन में कोई सप्लायर टैक्स जमा नहीं करता या फर्जी ITC पास करता है, तो इसका नुकसान नियमों का पालन करने वाले अंतिम टैक्सपेयर को अपने आप नहीं उठाना पड़े, इसी दिशा में बदलाव प्रस्तावित है।

अब सिर्फ 10 दिन में मिलेगा रिफंड क्लेम का जवाब

जीएसटी काउंसिल ने रिफंड प्रक्रिया में भी अहम बदलावों को मंजूरी दी है। अब रिफंड क्लेम की रसीद यानी एक्नॉलेजमेंट जारी करने की समयसीमा 15 दिन से घटाकर 10 दिन की जाएगी।

अगर 10 दिनों के भीतर न तो एक्नॉलेजमेंट मिलता है और न ही किसी कमी की जानकारी दी जाती है, तो रिफंड क्लेम अपने आप स्वीकार किया हुआ माना जाएगा।

प्रतीकात्मक तस्वीर

90% रिफंड क्लेम पर तीन दिन में फैसला

नए बदलावों के तहत जोखिम के आकलन के आधार पर 90% रिफंड क्लेम सिस्टम के जरिए मंजूर किए जाएंगे। एक्नॉलेजमेंट के बाद तीन वर्किंग डेज में रिफंड का आदेश जारी होगा। अभी इसके लिए सात दिन का समय लगता है।

काउंसिल के मुताबिक, 65% रिफंड क्लेम एक्सपोर्ट या इनवर्टेड रेट स्ट्रक्चर से जुड़े हैं। इनमें से 55% पहले से कम जोखिम वाली कैटेगरी में आते हैं।

वहीं, 19% रिफंड क्लेम कैश लेजर में जमा अतिरिक्त रकम से जुड़े हैं। ऐसे रिफंड अब पूरी तरह ऑटोमैटिक होंगे और इनमें किसी अधिकारी की जरूरत नहीं पड़ेगी।

GST सिस्टम में बढ़ेगा टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल

सरकार अब GST सिस्टम को ज्यादा टेक्नोलॉजी आधारित बनाने पर जोर दे रही है। इसके तहत खरीदार और विक्रेता के इनवॉइस का मिलान किया जा रहा है। साथ ही नेटवर्क एनालिसिस के जरिए फर्जी टैक्स क्रेडिट की पहचान की जा रही है।

advertisement

काउंसिल ने रजिस्ट्रेशन, रिटर्न फाइलिंग और कारोबार बंद करने की प्रक्रिया आसान बनाने के उपाय भी प्रस्तावित किए हैं। छोटे टैक्सपेयर्स के लिए नियमों का पालन आसान बनाने पर भी जोर दिया गया है।