
सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में 12 नए प्रोजेक्ट्स को दी मंजूरी! ₹7,503 करोड़ के निवेश से क्या बदलेगा?
भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। नई योजनाओं से देश में जरूरी इलेक्ट्रॉनिक सामान का उत्पादन बढ़ने और रोजगार के नए अवसर बनने की उम्मीद है। आखिर किन प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिली है और इससे देश को क्या फायदा होगा? जानिए पूरी डिटेल।

In Short
- केंद्र सरकार ने ECMS के तहत ₹7,503 करोड़ के निवेश वाले 12 नए प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी।
- इन प्रोजेक्ट्स से ₹39,000 करोड़ से ज्यादा उत्पादन और 7,200 से अधिक रोजगार मिलने की उम्मीद है।
- सरकार ने ECMS का बजट ₹22,919 करोड़ से बढ़ाकर ₹40,000 करोड़ कर दिया है।
भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS) के तहत 12 नए आवेदनों को मंजूरी दी है। इन प्रोजेक्ट्स में कुल ₹7,503 करोड़ का निवेश किया जाएगा। सरकार को उम्मीद है कि इससे देश में इलेक्ट्रॉनिक्स से जुड़े जरूरी सामान का उत्पादन बढ़ेगा और विदेशों से आयात पर निर्भरता कम होगी।
शुक्रवार को नई दिल्ली में एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सचिव एस कृष्णन ने इसकी जानकारी दी।
₹7,503 करोड़ के निवेश से बनेंगे 7,200 से ज्यादा रोजगार
सरकार की ओर से मंजूर किए गए इन 12 प्रोजेक्ट्स के जरिए ₹39,000 करोड़ से ज्यादा का उत्पादन होने की उम्मीद है। इसके अलावा इनसे 7,200 से ज्यादा लोगों को रोजगार मिलने का अनुमान है।
इन प्रोजेक्ट्स के तहत कैथोड एक्टिव मटेरियल, एनोड मटेरियल, कॉपर फॉयल, पॉलीप्रोपाइलीन फिल्म और स्पेशलिटी सिरेमिक्स जैसे जरूरी मटेरियल बनाए जाएंगे।
इनका इस्तेमाल बैटरी, प्रिंटेड सर्किट बोर्ड, सेमीकंडक्टर और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स बनाने में होता है। सरकार का मकसद इन जरूरी चीजों का उत्पादन देश में ही बढ़ाना है।
₹22,919 करोड़ से बढ़ाकर ₹40,000 करोड़ किया बजट
एस कृष्णन ने बताया कि इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम को इंडस्ट्री से अच्छा रिस्पॉन्स मिला है। इसी वजह से सरकार ने इसका बजट बढ़ाकर ₹40,000 करोड़ कर दिया है।
मार्च 2025 में केंद्रीय कैबिनेट ने इस योजना को ₹22,919 करोड़ के शुरुआती बजट के साथ मंजूरी दी थी।
एस कृष्णन के मुताबिक, योजना के तहत मिलने वाले निवेश और दूसरी प्रतिबद्धताएं शुरुआती बजट के मुकाबले पहले ही ज्यादा हो चुकी हैं। सरकार अभी भी नए आवेदनों की समीक्षा कर रही है।

16 राज्यों से आए 118 आवेदन
योजना की प्रगति के बारे में जानकारी देते हुए एस कृष्णन ने बताया कि अब तक 16 राज्यों से कुल 118 आवेदन मिले हैं। ये आवेदन इलेक्ट्रॉनिक्स से जुड़ी 34 अलग-अलग प्रोडक्ट कैटेगरी के लिए हैं।
उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत निवेश, उत्पादन और रोजगार से जुड़ी प्रतिबद्धताएं शुरुआती लक्ष्यों से आगे निकल चुकी हैं।
आयात पर निर्भरता कम करने की तैयारी
सरकार अब ECMS को और मजबूत बनाने के लिए कुछ बदलावों पर भी विचार कर रही है।
एस कृष्णन ने साफ किया कि आवेदनों को मंजूरी देते समय इस बात पर जोर नहीं दिया जा रहा कि तैयार सामान का इस्तेमाल किस सेक्टर में होगा। सरकार का मुख्य फोकस जरूरी कंपोनेंट्स और मटेरियल की घरेलू मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने पर है।
इस योजना का मकसद कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स, टेलीकॉम उपकरण, इलेक्ट्रिक कार और इंडस्ट्रियल इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे सेक्टरों के लिए देश में ही जरूरी कंपोनेंट्स तैयार करना और आयात पर निर्भरता घटाना है।

