गोल्ड डिमांड घटी, लेकिन खर्च रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा; जानिए क्यों बदल रहा है भारतीयों का ट्रेंड
सोने की कीमतों में तेजी ने भारतीयों की खरीदारी का तरीका बदल दिया है। हैरानी की बात यह है कि कम सोना खरीदने के बावजूद लोगों का खर्च रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। आखिर किन वजहों से बदली Gold खरीदने की रणनीति और किस तरह लोग अब निवेश को दे रहे हैं प्राथमिकता, जानिए पूरी कहानी।

In Short
- भारतीयों ने 8.3 टन कम सोना खरीदा, फिर भी खर्च 50% बढ़कर ₹1.98 लाख करोड़ पहुंच गया।
- महंगी कीमतों के चलते ग्राहकों ने हल्की Jewellery, कम Carat Gold और Exchange जैसे विकल्प अपनाए।
- Gold Bar, Coin और Gold ETF में बढ़ी मांग, निवेश के लिए लोगों का भरोसा अब भी मजबूत रहा।
भारत में सफल महिला लीडर्स की पहचान अब सिर्फ बड़े कारोबारी परिवारों से नहीं जुड़ी है। नई Hurun रिपोर्ट बताती है कि देश की कई टॉप महिला लीडर्स ने अपनी मेहनत, आइडिया और कामयाबी के दम पर अपनी जगह बनाई है।
इस लिस्ट में बिजनेस, स्टार्टअप, स्पोर्ट्स और सोशल सेक्टर से जुड़ी महिलाएं शामिल हैं। यही बदलाव दिखाता है कि भारत में महिला लीडरशिप का दायरा तेजी से बढ़ रहा है।
ज्यादातर महिला लीडर्स ने खुद बनाई पहचान
2026 कैंडरे हुरुन इंडिया वुमन लीडर्स लिस्ट के अनुसार, इस साल शामिल 117 महिलाओं में से 98 महिलाएं सेल्फ मेड यानी अपनी मेहनत से आगे बढ़ने वाली हैं। यह कुल लिस्ट का 84% हिस्सा है। वहीं सिर्फ 19 महिलाएं ऐसी हैं, जिन्हें बिजनेस या लीडरशिप विरासत में मिली।
रिपोर्ट के मुताबिक, सेल्फ मेड महिला लीडर्स की संख्या विरासत में आगे बढ़ने वाली महिलाओं से 5 गुना से भी ज्यादा है। हुरुन इंडिया के फाउंडर और चीफ रिसर्चर अनस रहमान जुनैद ने कहा कि यह दिखाता है कि भारत में अब लीडरशिप ज्यादा मेहनत, टैलेंट और इनोवेशन के दम पर हासिल की जा रही है।
2026 की लिस्ट में 117 महिलाओं को 12 अलग-अलग कैटेगरी में जगह मिली है, जबकि 2025 में यह संख्या 97 महिलाओं और 9 कैटेगरी की थी। इन सभी महिलाओं से जुड़े बिजनेस और संस्थानों की कुल वैल्यूएशन करीब ₹39 लाख करोड़ है।
बिजनेस से आगे बढ़ी महिला लीडरशिप
इस लिस्ट में सिर्फ कंपनी चलाने वाली महिलाएं ही नहीं, बल्कि अलग-अलग क्षेत्रों में पहचान बनाने वाली महिलाएं भी शामिल हैं। इसमें स्टार्टअप फाउंडर्स, लेखक, खिलाड़ी, पत्रकार और सोशल इम्पैक्ट से जुड़े लोग शामिल हैं।
इस लिस्ट की सबसे कम उम्र की महिला 19 साल की पैरा आर्चर शीतल देवी हैं, जबकि सबसे उम्रदराज महिला क्रेमिका की फाउंडर राजनी बेक्टर हैं, जिनकी उम्र 86 साल है। लिस्ट में शामिल महिलाओं की औसत उम्र 48 साल है।
कैटेगरी के हिसाब से देखें तो हिंदुस्तान यूनिलीवर की सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर प्रिया नायर ने प्रोफेशनल सीईओ कैटेगरी में पहला स्थान हासिल किया। वहीं रोशनी नाडर मल्होत्रा वेल्थ मल्टीप्लायर्स कैटेगरी में टॉप पर रहीं। वैषाली निगम सिन्हा न्यू इकोनॉमी कैटेगरी में पहले स्थान पर रहीं।
राजनी बेक्टर हार्टलैंड फाउंडर्स कैटेगरी में, मीना बिंद्रा इंडियन फैशन एंड लाइफस्टाइल कैटेगरी में, सुधा मूर्ति ऑथर्स कैटेगरी में, अवनि लेखरा ओलंपिक और पैरालंपिक मेडलिस्ट्स कैटेगरी में और तुषारा शंकर सोशल चेंज मेकर्स कैटेगरी में सबसे आगे रहीं।
कल्चर और स्टार्टअप में महिलाओं की बड़ी हिस्सेदारी
हुरुन ने महिला लीडर्स को पांच मुख्य हिस्सों में बांटा है। इसमें कल्चर कैटेगरी सबसे बड़ी रही, जिसमें 42 महिलाएं यानी 36% हिस्सा शामिल है।
इसके बाद स्टार्टअप कैटेगरी में 28 महिलाएं (24%), वैल्यू क्रिएशन में 19 महिलाएं (16%), वेल्थ क्रिएशन में 18 महिलाएं (15%) और इम्पैक्ट कैटेगरी में 10 महिलाएं (9%) शामिल हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, अब महिलाएं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, डीप टेक, क्लीन एनर्जी, क्लाइमेट टेक्नोलॉजी और हेल्थ टेक्नोलॉजी जैसे नए सेक्टर में भी तेजी से आगे बढ़ रही हैं।
मुंबई में सबसे ज्यादा महिला लीडर्स
शहरों की बात करें तो मुंबई इस लिस्ट में सबसे आगे रहा। यहां से 26 महिला लीडर्स शामिल हैं। इसके बाद दिल्ली से 21 और बेंगलुरु से 16 महिलाएं इस लिस्ट में जगह बनाने में सफल रहीं।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि 33 महिलाओं ने अपने करियर को आगे बढ़ाने के लिए एक राज्य से दूसरे राज्य में जाकर काम किया, जबकि 2 महिलाएं विदेश जाकर आगे बढ़ीं।
एजुकेशन के मामले में दिल्ली यूनिवर्सिटी इस लिस्ट में सबसे ज्यादा प्रतिनिधित्व वाला अंडरग्रेजुएट इंस्टीट्यूशन रहा, जहां से 22 महिलाएं जुड़ी हैं। वहीं पोस्टग्रेजुएट एजुकेशन के लिए हार्वर्ड यूनिवर्सिटी सबसे आगे रही, जहां से 9 महिलाएं पढ़ चुकी हैं।

