सोने और चांदी की कीमतों में रिकवरी के संकेत, क्या फिर आएगी तेजी? जानें सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल
घरेलू बाजार में MCX पर सोना ₹1,49,735 प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था, जो 0.42% की बढ़त है। वहीं, चांदी ₹2,21,211 प्रति किलोग्राम पर रही, जिसमें 0.01% की मामूली गिरावट दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का वायदा भाव 1.04% बढ़कर 4,200.15 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया, जबकि चांदी का वायदा भाव 1.56% की तेजी के साथ 60.345 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था।

सोने और चांदी की कीमतों में निचले स्तरों से रिकवरी की कोशिश दिख रही है। इसकी एक वजह अक्टूबर में अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना का कम होना है। हालांकि, अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और डॉलर की मजबूती अभी भी कीमतों की तेजी को सीमित कर रही है। ऐसे में कारोबारियों और निवेशकों के लिए अहम सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तरों पर नजर रखना जरूरी है।
घरेलू बाजार में MCX पर सोना ₹1,49,735 प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था, जो 0.42% की बढ़त है। वहीं, चांदी ₹2,21,211 प्रति किलोग्राम पर रही, जिसमें 0.01% की मामूली गिरावट दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का वायदा भाव 1.04% बढ़कर 4,200.15 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया, जबकि चांदी का वायदा भाव 1.56% की तेजी के साथ 60.345 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था।
सोने और चांदी की कीमतों में रिकवरी की वजह क्या है?
Religare Securities की VP Research सुगंधा सचदेवा के मुताबिक, अक्टूबर में फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरें बढ़ाए जाने की आशंका कम होने से कीमती धातुओं को सपोर्ट मिल रहा है।
सचदेवा ने कहा, “सोने और चांदी की कीमतों में निचले स्तरों से रिकवरी देखने को मिल रही है, क्योंकि अक्टूबर की बैठक में फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाए जाने की उम्मीद कम हुई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के लिए 4,050–4,100 डॉलर प्रति औंस का स्तर अहम सपोर्ट जोन बना हुआ है, जबकि तत्काल रेजिस्टेंस 4,240 डॉलर प्रति औंस पर है।”
उन्होंने बताया कि अमेरिका में पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर (PCE) महंगाई के नरम आंकड़ों और रोजगार से जुड़े कमजोर आंकड़ों के बाद ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी की संभावना को लेकर बाजार की उम्मीदें कम हुई हैं। हालांकि, आगे सोने और चांदी की चाल महंगाई, बॉन्ड यील्ड और अमेरिकी डॉलर की दिशा पर निर्भर करेगी।
सुगंधा सचदेवा के अनुसार, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड का ऊंचा स्तर और डॉलर इंडेक्स में मजबूती कीमती धातुओं की तेजी पर दबाव डाल सकती है। इसके उलट, बॉन्ड यील्ड में लगातार नरमी और डॉलर में कमजोरी सोने-चांदी की कीमतों को सहारा दे सकती है।
क्रूड ऑयल और जियो पॉलिटिकल घटनाक्रम पर भी नजर
कच्चे तेल की कीमतें और वैश्विक जियो पॉलिटिकल घटनाक्रम भी सोने-चांदी की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। अगर कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट आती है, तो ऊर्जा से जुड़ा महंगाई का दबाव कम हो सकता है। इससे केंद्रीय बैंकों पर ब्याज दरें ऊंची रखने का दबाव घट सकता है, जो कीमती धातुओं के लिए सकारात्मक होगा।
हालांकि, भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने या कच्चे तेल की कीमतों में फिर तेज उछाल आने से महंगाई की चिंताएं बनी रह सकती हैं और सोने-चांदी की रिकवरी सीमित हो सकती है।
किन सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल पर रखें नजर?
रेलिगेयर सिक्योरिटीज की सुगंधा सचदेवा के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के लिए 4,050-4,100 डॉलर प्रति औंस का सपोर्ट जोन अहम है, जबकि 4,240 डॉलर प्रति औंस पर तत्काल रेजिस्टेंस है।
घरेलू बाजार में MCX गोल्ड के लिए ₹1,48,000 प्रति 10 ग्राम का स्तर सपोर्ट है। तेजी आने पर ₹1,51,500 के बाद ₹1,54,600 का स्तर अगला रेजिस्टेंस हो सकता है।
चांदी की बात करें तो घरेलू बाजार में ₹2,17,000 प्रति किलोग्राम का स्तर अहम सपोर्ट है। ऊपर की ओर ₹2,28,800 और उसके बाद ₹2,36,000 के स्तर पर रेजिस्टेंस देखने को मिल सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी के लिए 58.50 डॉलर प्रति औंस का क्लोजिंग सपोर्ट और 62.50 डॉलर प्रति औंस का तत्काल रेजिस्टेंस अहम रहेगा।
एक्सपर्ट का नजरिया फिलहाल सतर्क रूप से सकारात्मक है, बशर्ते ये अहम सपोर्ट स्तर बने रहें। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का भाव 4,050 डॉलर या चांदी का भाव 58.50 डॉलर प्रति औंस के नीचे बंद होता है, तो कीमतों की मौजूदा स्थिति कमजोर पड़ सकती है और आगे गिरावट का जोखिम बढ़ सकता है।
फिलहाल, सोने और चांदी की रिकवरी कितनी टिकाऊ रहती है, यह समझने के लिए निवेशकों को अमेरिकी डॉलर, ट्रेजरी यील्ड और कच्चे तेल की कीमतों पर नजर रखनी होगी।

