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Minimalist, Plum से The Souled Store तक! कैसे भारतीय न्यू एज ब्रांड Gen Z और सोशल मीडिया के सहारे बन रहे हैं ग्लोबल?

भारत के नए जमाने के ब्रांड अब सिर्फ घरेलू बाजार तक सीमित नहीं रहना चाहते। Minimalist, Lenskart, Myntra, boAt और The Souled Store जैसे ब्रांड विदेशी ग्राहकों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। सोशल मीडिया, Gen Z और ऑनलाइन बिक्री इस ग्लोबल विस्तार की नई रणनीति का अहम हिस्सा बन रहे हैं।

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AI Generated Image

स्किनकेयर से लेकर फैशन, चश्मे, गैजेट्स और लाइफस्टाइल तक, भारत के ब्रांड अब सिर्फ भारतीय ग्राहकों तक सीमित नहीं रहना चाहते। Gen Z, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और अन्य तरीकों से आजकल के ये नए जमाने के ब्रांड्स दुनिया भर के ग्राहकों तक पहुंच रहे हैं।

भारत की Gen Z सिर्फ खरीदारी के तरीके नहीं बदल रही, बल्कि भारतीय ब्रांडों की ग्लोबल पहचान बनाने में भी बड़ी भूमिका निभा रही है। Minimalist, Lenskart, Myntra, Mamaearth, Plum, boAt और The Souled Store जैसे ब्रांड अलग-अलग तरीकों से विदेशी बाजारों में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

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इन ब्रांडों की रणनीति केवल विदेशों में सामान बेचने तक सीमित नहीं है। सही बाजार चुनना, वहां के ग्राहकों को समझना, सोशल मीडिया के जरिए लोगों में रुचि पैदा करना और फिर कारोबार को धीरे-धीरे बढ़ाना इसका हिस्सा है। भारतीय ब्रांड अब सिर्फ “Made in India” तक सीमित नहीं रहना चाहते। उनका लक्ष्य है कि उनके प्रोडक्ट दुनिया भर में पसंद किए जाएं।

भारत से दुनिया तक पहुंचते भारतीय ब्रांड, ग्लोबल बाजार में बढ़ रही नई पहचान

कभी विदेशी ब्रांडों का था दबदबा

एक समय था जब भारतीय ग्राहक विदेशी ब्रांडों को देखकर जल्दी आकर्षित हो जाते थे। अगर किसी सामान पर न्यूयॉर्क, लंदन, पेरिस या सियोल का नाम जुड़ा होता था, तो उसे महंगा और बेहतर मानना आसान था। फैशन, स्किनकेयर, इलेक्ट्रॉनिक्स या लाइफस्टाइल किसी भी कैटेगरी के प्रोडक्ट्स हों वो अपना असर भारतीय ग्राहकों पर जल्द ही छोड़ देते हैं। 

अब तस्वीर बदल रही है तस्वीर

आज भारत में बने ब्रांड भी दुनिया के दूसरे देशों में ग्राहक तलाश रहे हैं। यह बदलाव अचानक नहीं आया है। इसके पीछे भारत की बड़ी युवा आबादी, बढ़ता इंटरनेट इस्तेमाल, सोशल मीडिया, इन्फ्लुएंसर संस्कृति और ऑनलाइन कारोबार का बड़ा योगदान है।

भारत में Gen Z की संख्या करीब 37.7 करोड़ मानी जाती है। यह पीढ़ी सिर्फ एक बड़ा ग्राहक वर्ग नहीं है, बल्कि यह नए चलन और नई सोच को भी प्रभावित करती है।

आज कोई युवा किसी सामान को सिर्फ टीवी का विज्ञापन देखकर खरीदने के बजाय इंस्टाग्राम रील, यूट्यूब वीडियो, किसी क्रिएटर की समीक्षा या ऑनलाइन लोगों की राय देखकर खरीद सकता है।

दुबई में बैठा कोई ग्राहक भारतीय स्किनकेयर प्रोडक्ट की रील देख सकता है। सिंगापुर में रहने वाला कोई व्यक्ति भारतीय फैशन ब्रांड की वेबसाइट पर जाकर कपड़े खरीद सकता है। जापान का कोई ग्राहक भारतीय कंपनी से चश्मा मंगा सकता है। अमेरिका में बैठा कोई व्यक्ति भारत से अपने पसंदीदा फिल्म या पॉप-कल्चर से जुड़ा सामान खरीद सकता है। यानी अब ब्रांड भारत में बन सकता है, लेकिन उसका ग्राहक जरूरी नहीं कि भारत में ही रहे। यही भारतीय ब्रांडों की नई कहानी की सबसे दिलचस्प बात है।

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भारतीय ब्रांड क्यों जाना चाहते हैं ग्लोबल?

किसी कंपनी के लिए दूसरे देश में कारोबार शुरू करना आसान नहीं होता। हर देश के नियम अलग होते हैं। ग्राहकों की पसंद अलग होती है। कंपीटिशन अलग होती है और सामान पहुंचाने में भी कई चुनौतियां आती हैं। इन चुनौतियों के बावजूद भारतीय ब्रांड्स इन कारणों से ग्लोबल जाना चाहते हैं: 

पहला कारण: विदेशों में बढ़ रही है भारतीय प्रोडक्ट्स की मांग

इंडियन फैशन, ब्यूटी प्रोडक्ट्स, चश्मे, इलेक्ट्रॉनिक्स और लाइफस्टाइल सामानों में विदेशों के ग्राहकों की दिलचस्पी बढ़ रही है।

दूसरा कारण: भारतीय ब्रांडों का बदला स्तर 

आज के भारतीय ब्रांड सिर्फ सामान नहीं बेचते। वे पैकेजिंग, ब्रांड की पहचान, कस्टमर सर्विस पर भी ध्यान देते हैं।

तीसरा कारण: ऑनलाइन कारोबार ने रास्ता आसान किया है

पहले विदेश में कारोबार शुरू करने का मतलब था वहां दुकान खोलना, गोदाम बनाना, वितरकों से जुड़ना और भारी निवेश करना।

अब कंपनियां पहले इंटरनेट के जरिए किसी बाजार को परख सकती हैं। अगर किसी देश से वेबसाइट पर लोग आने लगें, सामान खरीदने लगें और दोबारा खरीदारी करें, तो कंपनी समझ सकती है कि वहां उसके उत्पाद की मांग है।

यानी तरीका कुछ ऐसा हो गया है:

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पहले ऑनलाइन शुरुआत करो → ग्राहकों को समझो → मांग देखो → फिर निवेश करो → कारोबार बढ़ाओ।

भारतीय ब्रांडों की ग्लोबल उड़ान की रणनीति

भारतीय ब्रांडों की विदेश जाने की रणनीति क्या है?

हर कंपनी की रणनीति अलग होती है, लेकिन ज्यादातर भारतीय ब्रांडों में एक जैसी प्रक्रिया दिखाई देती है।

1. सही बाजार चुनना

कंपनियां एक साथ पूरी दुनिया में जाने के बजाय पहले ऐसे देशों को चुनती हैं जहां उनके उत्पादों की मांग बनने की संभावना ज्यादा हो।

जहां बड़ी संख्या में भारतीय रहते हैं, वे देश शुरुआती बाजार बन सकते हैं। वहां लोगों को भारतीय कपड़े, खान-पान और भारतीय संस्कृति से पहले से परिचय होता है। सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात, ब्रिटेन और अमेरिका जैसे बाजार इसलिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

2. ऑनलाइन मांग देखना

कंपनी पहले यह देखती है कि किसी देश से उसकी वेबसाइट पर कितने लोग आ रहे हैं। अगर लोग उत्पाद खोज रहे हैं, वेबसाइट देख रहे हैं और खरीदारी कर रहे हैं, तो यह संकेत है कि वहां संभावित ग्राहक मौजूद हैं।

3. सोशल मीडिया से पहचान बनाना

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आज किसी नए देश में जाने के लिए केवल बड़े विज्ञापन या टीवी पर निर्भर रहना जरूरी नहीं है। इंस्टाग्राम, यूट्यूब और दूसरे सोशल मीडिया मंचों के जरिए कंपनियां स्थानीय लोगों तक पहुंच सकती हैं।

4. स्थानीय ग्राहकों को समझना

यह सबसे जरूरी हिस्सा है। भारत में जो कीमत सही लगती है, जरूरी नहीं कि वही कीमत सिंगापुर में भी सही लगे। भारत में जिस तरह की पैकेजिंग पसंद की जाती है, जरूरी नहीं कि दूसरे देश में भी वही पसंद आए। इसलिए कंपनियों को कीमत, पैकेजिंग, भाषा, सामान पहुंचाने की व्यवस्था और ग्राहक सेवा में बदलाव करना पड़ सकता है।

5. मांग आने के बाद कारोबार बढ़ाना
जब कंपनी को यह भरोसा हो जाता है कि किसी देश में उसके ग्राहक बन रहे हैं, तब वह गोदाम, दुकान, स्थानीय साझेदारी और दूसरी सुविधाओं में निवेश कर सकती है।

Minimalist ने कौन सी रणनीति अपनाई?

कंपनी ने पहले भारत में ऑनलाइन ग्राहकों का भरोसा बनाया। इसके बाद उन विदेशी बाजारों में पहुंच बढ़ाने की कोशिश की जहां स्किनकेयर और ऑनलाइन खरीदारी की अच्छी मांग है।

संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, मलेशिया और इंडोनेशिया जैसे बाजारों में इसकी मौजूदगी ने दिखाया कि भारतीय स्किनकेयर उत्पादों के लिए विदेशों में भी ग्राहक मिल सकते हैं।

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2025 में हिंदुस्तान यूनिलीवर ने Minimalist में 90.5 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदी। इससे यह भी पता चलता है कि भारत में ऑनलाइन माध्यम से तेजी से बढ़ने वाले नए ब्रांड अब बड़ी कंपनियों के लिए भी महत्वपूर्ण हो रहे हैं।

Minimalist का तरीका आसान भाषा में समझें:

अच्छे उत्पाद + साफ जानकारी + सोशल मीडिया का भरोसा + ऑनलाइन बिक्री + विदेशी बाजार

Lenskart: चश्मे से आगे बढ़ता भारतीय ब्रांड

Lenskart की कहानी भारतीय उपभोक्ता कारोबार की दिलचस्प कहानियों में से एक है। पीयूष बंसल की कंपनी ने चश्मे को केवल दुकान पर जाकर खरीदने वाला सामान नहीं माना। उसने तकनीक और ऑनलाइन खरीदारी को चश्मे के कारोबार से जोड़ा।

ग्राहक घर बैठे चश्मे के फ्रेम देख सकता है, उन्हें ऑनलाइन आजमा सकता है और घर पर सामान मंगा सकता है। इसके बाद कंपनी ने ऑनलाइन और दुकानों, दोनों को जोड़ने वाला तरीका अपनाया।

आज Lenskart जापान, सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात और दूसरे विदेशी बाजारों में भी अपनी मौजूदगी बढ़ा रहा है।

Lenskart की रणनीति

इसका तरीका कुछ ऐसा है:

ऑनलाइन सर्च → तकनीक → मोबाइल ऐप → दुकान → स्थानीय ग्राहक की जरूरत

मान लीजिए कोई ग्राहक सोशल मीडिया पर Lenskart का विज्ञापन देखता है। वह वेबसाइट या ऐप पर जाता है, चश्मे के फ्रेम देखता है और उन्हें ऑनलाइन आजमाता है। अगर वह दुकान जाकर चश्मा देखना चाहता है, तो वहां भी जा सकता है। इस तरह कंपनी ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों अनुभव को जोड़ती है।

भारतीय ब्रांडों की ग्लोबल पहचान की अलग-अलग रणनीतियां

Myntra: भारतीय फैशन को दुनिया तक पहुंचाने की कोशिश

Myntra ने 2025 में सिंगापुर से अपनी अंतरराष्ट्रीय शुरुआत की। शुरुआत में कंपनी ने वहां रहने वाले भारतीयों को मुख्य ग्राहक बनाया।

यह एक समझदारी भरा कदम था क्योंकि विदेशों में रहने वाले भारतीय पहले से ही भारतीय कपड़ों और फैशन से परिचित होते हैं। साड़ी, कुर्ता, पारंपरिक कपड़े, भारतीय डिजाइन और भारतीय जीवनशैली से जुड़े उत्पादों की वहां पहले से मांग हो सकती है।

Myntra के पास सिंगापुर में शुरुआत से पहले ही वहां के ग्राहकों का कुछ ध्यान मौजूद था। रिपोर्टों के अनुसार, शुरुआत से पहले हर महीने करीब 30,000 लोग सिंगापुर से Myntra की वेबसाइट पर आते थे।

Myntra की रणनीति

भारतीय ग्राहक → पहले से मौजूद मांग → सिंगापुर में शुरुआत → ग्राहकों की पसंद समझना → दूसरे देशों में विस्तार

शुरुआत में कंपनी ने भारत से सामान भेजकर सिंगापुर के ग्राहकों तक पहुंचाने का तरीका अपनाया।

इससे शुरुआत में हर देश में अलग गोदाम बनाने की जरूरत नहीं पड़ती।

अगर किसी देश में मांग बढ़ती है, तो बाद में वहां स्थानीय गोदाम और आपूर्ति व्यवस्था बनाई जा सकती है।

Mamaearth: सोशल मीडिया को बनाया ताकत

Mamaearth ने भारत के सौंदर्य और व्यक्तिगत देखभाल के बाजार में सोशल मीडिया और इन्फ्लुएंसर्स का खूब इस्तेमाल किया।

कंपनी ने युवा माता-पिता और सौंदर्य उत्पाद खरीदने वाले ग्राहकों को ध्यान में रखकर अपनी पहचान बनाई।

उस समय किसी सोशल मीडिया क्रिएटर से किसी उत्पाद के बारे में सुनना लोगों के लिए अपेक्षाकृत नया अनुभव था।

अगर कोई पसंदीदा क्रिएटर कैमरे के सामने किसी उत्पाद के बारे में बताता है, तो लोगों को वह पारंपरिक विज्ञापन से ज्यादा व्यक्तिगत और भरोसेमंद लग सकता है।

Mamaearth की रणनीति

ऑनलाइन पहचान + इन्फ्लुएंसर + ग्राहक समुदाय + ज्यादा उत्पाद + दुकानों तक पहुंच

लेकिन विदेश में यही तरीका अपनाना इतना आसान नहीं है। भारत में जो चीज वायरल होती है, जरूरी नहीं कि वह दूसरे देश में भी उतनी ही लोकप्रिय हो। इसलिए विदेशी बाजार में स्थानीय क्रिएटर्स और वहां की संस्कृति को समझना जरूरी होगा।

Plum: खास ग्राहकों से बनाई अपनी पहचान

Plum ने सौंदर्य उत्पादों की दुनिया में शाकाहारी और बिना जानवरों पर परीक्षण किए गए उत्पादों के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई।

ऐसे उत्पादों की मांग सिर्फ भारत में नहीं है। दुनिया के कई देशों में लोग ऐसे उत्पादों को पसंद करते हैं।

Plum की रणनीति

खास ग्राहकों को पहचानो → अपनी अलग पहचान बनाओ → ऑनलाइन समुदाय बनाओ → उसी ग्राहक वर्ग तक विदेश में पहुंचो।

इस तरह की रणनीति उन कंपनियों के लिए काफी उपयोगी है जो हर किसी को अपना सामान बेचने की कोशिश नहीं करतीं।

अगर किसी कंपनी का उत्पाद किसी खास ग्राहक की जरूरत पूरी करता है, तो उसे केवल सही ग्राहक तक पहुंचने की जरूरत होती है।

boAt: सामान नहीं, लाइफस्टाइल बेचने की कोशिश

boAt की शुरुआत हेडफोन और दूसरे ऑडियो उत्पादोंप्रोडक्ट के साथ हुई। लेकिन कंपनी ने जल्दी समझ लिया कि युवा ग्राहक सिर्फ उत्पाद की तकनीकी खूबियां नहीं देखते।

boAt की रणनीति

कम कीमत + अच्छा डिजाइन + युवा छवि + भारतीय पहचान + जीवनशैली

विदेशी बाजार में सिर्फ कम कीमत के आधार पर मुकाबला करना मुश्किल हो सकता है। लेकिन अगर ब्रांड की अपनी अलग पहचान और कहानी हो, तो उसके लिए ग्राहकों का ध्यान खींचना आसान हो सकता है।

The Souled Store: पसंदीदा किरदारों के साथ जुड़ी खरीदारी

The Souled Store ने फैशन को लोगों की पसंदीदा फिल्मों, सुपरहीरो, एनीमे और पॉप कल्चर से जोड़ दिया। इसका फायदा यह है कि ग्राहक पहले से ही इन किरदारों से जुड़ा होता है।

अगर कोई व्यक्ति Marvel का प्रशंसक है, तो उसे यह समझाने की जरूरत नहीं कि Marvel क्या है। अगर कोई एनीमे पसंद करता है, तो वह अपने पसंदीदा किरदार वाली टी-शर्ट देखकर तुरंत आकर्षित हो सकता है।

The Souled Store की रणनीति

दुनिया भर के प्रशंसक → लाइसेंस वाले उत्पाद → भारतीय डिजाइन और बिक्री की क्षमता → ऑनलाइन खरीदारी → विदेशों में सामान पहुंचाना

इस क्षेत्र में भारतीय ब्रांडों के लिए एक फायदा यह है कि उन्हें हर देश के लिए बिल्कुल नई कहानी बनाने की जरूरत नहीं पड़ती। दुनिया भर में पहले से मौजूद प्रशंसकों को भारतीय डिजाइन और कारोबार की क्षमता से जोड़ा जा सकता है।

न्यू एज ब्रांड्स के लिए GenZ क्यों महत्वपूर्ण?

भारत की Gen Z की संख्या बहुत बड़ी है और उनकी खरीदारी की आदतें भी तेजी से बदल रही हैं। Gen Z सिर्फ सामान खरीदने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि वह उत्पादों के बारे में बात करती है, वीडियो बनाती है, रिव्यू और तुलना करती है, मीम बनाती है और दोस्तों को प्रोडक्ट की सलाह भी देती है। सोशल मीडिया पर अपनी पसंद साझा करने की वजह से एक सामान्य ग्राहक भी किसी ब्रांड के प्रचार का जरिया बन सकता है। 

पहले खरीदारी का तरीका विज्ञापन से दुकान, फिर उत्पाद और खरीदारी तक सीमित था, लेकिन अब यह सफर रील, क्रिएटर, लोगों की राय, रिव्यू और वेबसाइट से होते हुए खरीदारी तक पहुंचता है। इसके बाद ग्राहक खुद प्रोडक्ट का रिव्यू करता है और सोशल मीडिया पर अपनी राय साझा करता है। यानी आज ग्राहक की पूरी खरीदारी यात्रा पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा सार्वजनिक और सोशल हो गई है। ऐसे में किसी उत्पाद की लोकप्रियता सिर्फ कंपनी के विज्ञापन बजट पर निर्भर नहीं रहती, बल्कि ग्राहकों का पूरा समुदाय भी किसी प्रोडक्ट को तेजी से लोकप्रिय बनाने में बड़ी भूमिका निभा सकता है।

सोशल मीडिया ने विदेश जाना कैसे आसान किया?

कुछ साल पहले किसी भारतीय कंपनी के लिए दूसरे देश में कारोबार शुरू करना काफी महंगा और मुश्किल काम था। उसे वहां दुकान, ऑफिस, गोदाम, डिस्ट्रीब्यूटर और विज्ञापन का पूरा नेटवर्क तैयार करना पड़ता था। लेकिन सोशल मीडिया और ऑनलाइन बिक्री ने इस तरीके को काफी बदल दिया है। अब कंपनी बिना बड़े निवेश के किसी नए देश में अपने प्रोडक्ट की मांग को पहले ही परख सकती है।

मान लीजिए कोई भारतीय स्किनकेयर कंपनी संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में कारोबार शुरू करना चाहती है। उसे शुरुआत में दुबई में 20 दुकानें खोलने की जरूरत नहीं है। कंपनी पहले Instagram पर विज्ञापन चला सकती है, स्थानीय ब्यूटी क्रिएटर्स के साथ काम कर सकती है, स्थानीय भाषा और मुद्रा के हिसाब से वेबसाइट तैयार कर सकती है और भारत से सीधे ग्राहकों तक सामान पहुंचा सकती है। इसके बाद कंपनी ग्राहकों के रिव्यू और उनकी प्रतिक्रिया देख सकती है। अगर मांग बढ़ती है, तभी वह वहां दुकान, गोदाम या दूसरी सुविधाएं शुरू कर सकती है।

इस तरह सोशल मीडिया अब सिर्फ विज्ञापन का माध्यम नहीं रह गया है। यह कंपनियों के लिए नए बाजार को कम खर्च में समझने और परखने का जरिया भी बन गया है।

Gen Z और सोशल मीडिया से भारतीय ब्रांडों की ग्लोबल उड़ान

भारतीय ब्रांडों का नया फॉर्मूला

भारतीय कंपनियों के विदेश विस्तार को देखें तो एक नया बिजनेस फॉर्मूला सामने आता है। सबसे पहले अच्छा प्रोडक्ट जरूरी है। इसके बाद उसकी कीमत ऐसी होनी चाहिए जो ग्राहकों को उचित लगे। साथ ही ब्रांड की पहचान मजबूत होनी चाहिए, ताकि लोग उसे आसानी से याद रख सकें।

इसके बाद सोशल मीडिया पर ग्राहकों का समुदाय बनाना जरूरी है। क्रिएटर्स नए लोगों तक ब्रांड पहुंचाने और भरोसा बनाने में मदद कर सकते हैं। ऑनलाइन बिक्री की सुविधा ग्राहक के लिए खरीदारी आसान बनाती है। लेकिन सिर्फ ऑनलाइन मौजूदगी काफी नहीं है। कंपनी को हर देश के ग्राहकों की पसंद, जरूरत और खरीदारी की आदतों को भी समझना होगा।

विदेश में बड़े स्तर पर निवेश करने से पहले धीरे-धीरे बाजार में अपनी जगह बनाना ज्यादा सुरक्षित तरीका हो सकता है। जब किसी देश में मांग दिखाई दे, तभी कंपनी वहां ज्यादा पैसा लगाकर अपना कारोबार बढ़ा सकती है।

आने वाले समय में क्या बदल सकता है?

आने वाले वर्षों में भारतीय कंपनियों का विदेश विस्तार और ज्यादा डिजिटल हो सकता है। फिलहाल कई कंपनियां विदेशों में रहने वाले भारतीयों को अपने शुरुआती ग्राहक के तौर पर देखती हैं। इसकी वजह यह है कि भारतीय मूल के लोग भारतीय ब्रांड और उत्पादों से पहले से परिचित होते हैं। लेकिन आगे चलकर इन कंपनियों के लिए स्थानीय युवा ग्राहकों तक पहुंचना ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकता है।

इसी तरह अभी कई भारतीय कंपनियां विदेशों में सीधे भारत से सामान भेज रही हैं। जैसे-जैसे बिक्री बढ़ेगी, अलग-अलग देशों में स्थानीय गोदाम और डिलीवरी नेटवर्क भी विकसित हो सकते हैं। भारतीय क्रिएटर्स के साथ काम करने के बाद कंपनियां स्थानीय देशों के क्रिएटर्स के साथ भी साझेदारी कर सकती हैं।

इसका मतलब है कि आज जहां कंपनियां सिर्फ विदेशों में अपने प्रोडक्ट की मांग को परख रही हैं, वहीं भविष्य में कुछ भारतीय ब्रांड वहां बड़े ऑफिस, गोदाम और स्थानीय टीम भी बना सकते हैं।

सोच में आया सबसे बड़ा बदलाव 

भारतीय ब्रांडों के विदेश विस्तार में सबसे बड़ा बदलाव सिर्फ तकनीक या सोशल मीडिया का नहीं, बल्कि सोच का है। अब भारतीय कंपनियां खुद को केवल विदेशी ब्रांडों का भारतीय विकल्प नहीं मानना चाहतीं। वे दुनिया के बड़े ब्रांडों के साथ अपनी पहचान बनाने और वैश्विक ग्राहकों तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं।

यही बदलाव भारतीय कारोबार की वैश्विक कहानी को नया रूप दे रहा है। अब भारतीय ब्रांड सिर्फ भारत के ग्राहकों के लिए नहीं हैं। वे अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहे हैं। और आने वाले समय में जरूरी नहीं कि अगला बड़ा वैश्विक ब्रांड न्यूयॉर्क, लंदन, पेरिस या सियोल से ही आए। हो सकता है, वह भारत से आए।