
चुनाव आयोग ने 17 राज्यों में वोटर लिस्ट के पुनरीक्षण का किया ऐलान, SIR का शेड्यूल बाद में होगा जारी
चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश, बिहार समेत 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में वोटर लिस्ट के पुनरीक्षण का ऐलान किया है। इसके लिए आयोग ने अहम निर्देश भी जारी किए हैं। वहीं, SIR को लेकर विपक्ष का विरोध जारी है और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है।

In Short
- चुनाव आयोग ने 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में वोटर लिस्ट के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण का ऐलान किया।
- मतदाता सूची के पुनरीक्षण के लिए 1 जनवरी 2027 पात्रता तय करने की तारीख होगी, SSR का शेड्यूल अलग से आएगा।
- SIR के खिलाफ विपक्ष की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग और चुनाव आयुक्तों को नोटिस जारी किया।
चुनाव आयोग ने 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में वोटर लिस्ट में बदलाव की प्रक्रिया शुरू करने का ऐलान किया है। आयोग ने इन राज्यों में मतदाता सूची का विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण यानी स्पेशल समरी रिवीजन कराने का निर्देश दिया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है।
1 जनवरी 2027 होगी अहम तारीख
चुनाव आयोग ने गुरुवार को जारी नोटिस में बताया कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 21 के तहत किया जाएगा। इसके लिए 1 जनवरी 2027 को पात्रता तय करने की तारीख रखा गया है।
आयोग ने साफ किया है कि जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR की प्रक्रिया चल रही है या हाल ही में पूरी हुई है, वहां SSR का शेड्यूल अलग से जारी किया जाएगा।
किन 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में होगा बदलाव?
चुनाव आयोग के निर्देश के मुताबिक, इस प्रक्रिया में अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, लक्षद्वीप, मध्य प्रदेश, मणिपुर, पुडुचेरी, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल शामिल हैं।
इन सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर आयोग ने निर्देश जारी किए हैं।

SIR विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया नोटिस
इस बीच SIR प्रक्रिया को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है। हाल ही में अदालत ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और INDIA गठबंधन के अन्य नेताओं की याचिका पर चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी को नोटिस जारी किया।
याचिका में SIR की कानूनी वैधता पर सवाल उठाए गए हैं। विपक्षी नेताओं ने वोटर लिस्ट से हटाए गए नामों की जानकारी सार्वजनिक करने, मनमाने तरीके से नाम हटाने पर रोक लगाने और हटाए गए नामों को दोबारा जोड़ने की व्यवस्था बनाने की मांग की है।
इसके अलावा पुनरीक्षण प्रक्रिया का न्यायिक ऑडिट कराने और मामले पर फैसला आने तक SIR रोकने की मांग भी की गई है।
विपक्ष ने किया था विरोध प्रदर्शन
इस याचिका में राहुल गांधी के साथ मल्लिकार्जुन खड़गे, अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव, सौगत रॉय, संजय राउत, सुप्रिया सुले और कई अन्य विपक्षी नेता शामिल हैं।
इससे पहले 12 अक्टूबर को राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी नेताओं ने SIR के विरोध में सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च किया था। नेताओं ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत से मिलने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई थी।
हालांकि, मुख्य न्यायाधीश ने मुलाकात का अनुरोध स्वीकार नहीं किया और कहा कि मामला पहले से अदालत में लंबित है। नेता कानूनी प्रक्रिया के जरिए राहत मांग सकते हैं।
फिलहाल चुनाव आयोग ने SSR का ऐलान कर दिया है, जबकि संबंधित राज्यों में इसका विस्तृत शेड्यूल आना बाकी है। वहीं, SIR से जुड़े कानूनी विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई का रास्ता खुला हुआ है।

