
गेहूं और सरसों की बुवाई से पहले बड़ी चेतावनी: 'एल नीनो' बिगाड़ सकता है रबी फसलों का गणित!
खरीफ सीजन में मौसम की मार झेलने के बाद अब किसानों के सामने नई चुनौती खड़ी हो सकती है। एल नीनो के कारण आने वाले रबी सीजन में फसलों की पैदावार प्रभावित होने की आशंका है। कृषि सचिव ने चेताया है कि अलग-अलग राज्यों में मौसम की स्थिति मुश्किलें बढ़ा सकती है।

In Short
- एल नीनो के कारण आने वाला रबी सीजन बारिश पर निर्भर खेती वाले इलाकों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
- कृषि सचिव अतिश चंद्र ने खाद्यान्न उत्पादन प्रभावित होने की आशंका जताई, अक्टूबर से शुरू होगी रबी फसलों की बुवाई।
- कुछ राज्यों में मिट्टी में ज्यादा नमी तो कहीं कम बारिश से फसलों को नुकसान होने का खतरा है।
देश में खरीफ सीजन की मुश्किलों के बाद अब रबी फसलों को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। अल नीनो के कारण आने वाला रबी सीजन खासतौर पर उन इलाकों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है, जहां खेती बारिश के पानी पर निर्भर है। केंद्रीय कृषि सचिव अतिश चंद्र ने सोमवार को कहा कि मौसम की बदलती परिस्थितियों के कारण देश में खाद्यान्न उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है।
रबी सीजन में किसानों के सामने आ सकती हैं मुश्किलें
नई दिल्ली में रबी सीजन की तैयारियों को लेकर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में कृषि सचिव अतिश चंद्र ने कहा कि आने वाला सीजन बारिश पर निर्भर खेती वाले इलाकों के लिए मुश्किल भरा हो सकता है।
उन्होंने बताया कि इस बार खरीफ सीजन भी काफी चुनौतीपूर्ण रहा है। कई राज्यों को पहले फसलों की बुवाई का लक्ष्य पूरा करने में परेशानी हुई और बाद में खड़ी फसलों को बचाना भी मुश्किल हो गया।
कृषि सचिव के मुताबिक, आने वाले सीजन में उत्पादन पर बड़े स्तर पर असर पड़ने की आशंका है। ऐसे में रबी की खेती के लिए मौसम के हिसाब से रणनीति बनाना जरूरी होगा।
कहीं ज्यादा नमी तो कहीं कम बारिश से बढ़ेगी परेशानी
अतिश चंद्र ने कहा कि रबी सीजन में अलग-अलग राज्यों के सामने अलग तरह की चुनौतियां आ सकती हैं। कुछ राज्यों में मिट्टी में जरूरत से ज्यादा नमी की समस्या हो सकती है, जबकि कम बारिश वाले इलाकों में लंबे समय तक पानी की कमी से फसलें प्रभावित हो सकती हैं।
उन्होंने कहा कि इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए रबी सीजन की तैयारियों और रणनीतियों में बदलाव करना होगा।

जलवायु परिवर्तन का असर अब साफ दिख रहा है
कृषि सचिव ने जलवायु परिवर्तन को एक बड़ी चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि पहले ऐसा माना जाता था कि जलवायु परिवर्तन की समस्याओं का सामना भविष्य में करना पड़ेगा, लेकिन अब इसके असर तेजी से सामने आ रहे हैं।
उन्होंने बताया कि सिंचाई की सुविधा वाले इलाकों में भी कई जगह बेमौसम और भारी बारिश के कारण फसलों को नुकसान हुआ है।
अक्टूबर से शुरू होगी गेहूं और सरसों की बुवाई
देश में गेहूं और सरसों जैसी प्रमुख रबी फसलों की बुवाई अक्टूबर से शुरू होती है। आमतौर पर भारत में करीब 638 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में रबी फसलों की खेती होती है।
इसमें 300 लाख हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र में गेहूं, 140 लाख हेक्टेयर में दलहन, 87 लाख हेक्टेयर में तिलहन और 55 लाख हेक्टेयर में मोटे अनाज की खेती की जाती है।
अनाज में आत्मनिर्भर भारत, लेकिन इन चीजों का अब भी आयात
कृषि सचिव ने बताया कि भारत अनाज उत्पादन के मामले में आत्मनिर्भर बन चुका है। हालांकि, देश को अब भी दालों, तिलहन और फलों जैसे कुछ बागवानी उत्पादों का आयात करना पड़ता है।
ऐसे में बदलते मौसम और अल नीनो की चुनौती के बीच आने वाले रबी सीजन में फसलों की पैदावार पर खास नजर रहेगी।

