
पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़े, फिर कहां दिख रहा महंगे कच्चे तेल का असर? चौंका रहे ये आंकड़े
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का असर अब इंडस्ट्री पर दिखाई देने लगा है। पेट्रोल-डीजल के दाम भले ही काफी हद तक स्थिर हैं, लेकिन कई इंडस्ट्रियल कच्चे माल महंगे हो गए हैं। PP ग्रैन्यूल्स की कीमत 32% बढ़ी है। जानिए किन चीजों के दाम बढ़े और आगे क्या असर हो सकता है।

In Short
- कच्चे तेल की तेजी का असर इंडस्ट्रियल सप्लाई चेन पर दिखा, PP ग्रैन्यूल्स की कीमत 32% बढ़ी।
- TMT स्टील बार 13% महंगे हुए, जबकि MS पाइप और स्ट्रेच फिल्म की कीमत 8-8% बढ़ी।
- पेट्रोल-डीजल के दाम काफी हद तक स्थिर हैं, लेकिन बढ़ती इनपुट कॉस्ट कंपनियों के मार्जिन पर दबाव डाल सकती है।
कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी का असर अब भारत की इंडस्ट्रियल सप्लाई चेन पर दिखाई देने लगा है। हालांकि पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें अभी काफी हद तक स्थिर हैं, लेकिन कई इंडस्ट्रियल कच्चे माल की कीमतें बढ़ गई हैं। IndiaMART के सितंबर 2026 Marketplace Insights के मुताबिक, जुलाई से सितंबर के बीच PP ग्रैन्यूल्स की कीमत में सबसे ज्यादा तेजी आई है।
PP ग्रैन्यूल्स की कीमत 32% बढ़ी
IndiaMART के आंकड़ों के मुताबिक, उसके प्लेटफॉर्म पर PP ग्रैन्यूल्स की मीडियन कोटेड कीमत जुलाई में ₹95 प्रति किलो थी, जो सितंबर में बढ़कर ₹125 प्रति किलो हो गई। यानी इसमें 32% की बढ़ोतरी हुई।
वहीं, TMT स्टील बार की कीमत 13% बढ़कर ₹55,362 प्रति टन हो गई। MS पाइप और स्ट्रेच फिल्म की कीमतों में 8-8% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। ये आंकड़े IndiaMART पर सेलर्स की ओर से बताई गई कीमतों पर आधारित हैं।
कच्चे तेल से कैसे जुड़ा है PP ग्रैन्यूल्स?
PP यानी पॉलीप्रोपाइलीन एक पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट है, जिसे कच्चे तेल और नेचुरल गैस फीडस्टॉक से तैयार किया जाता है। ऐसे में कच्चा तेल महंगा होने पर प्लास्टिक, पैकेजिंग और दूसरे मैन्युफैक्चरिंग सेगमेंट की लागत बढ़ सकती है।
IndiaMART के फाउंडर और CEO दिनेश अग्रवाल के मुताबिक, तेल की कीमतों में तेजी का असर भारत के कारोबार पर पहुंच चुका है। इंडस्ट्रियल इनपुट में महंगाई खासतौर पर प्लास्टिक चेन के कुछ हिस्सों में दिखाई दे रही है।

हर प्रोडक्ट की कीमत नहीं बढ़ी
आंकड़े बताते हैं कि सभी प्रोडक्ट्स पर असर एक जैसा नहीं पड़ा है। PP ग्रैन्यूल्स 32% महंगा हुआ, लेकिन PET बोतल की कीमत ₹44 प्रति पीस पर स्थिर रही। वहीं, कॉटन फैब्रिक की कीमत 8% घटकर ₹71 प्रति मीटर से ₹65 प्रति मीटर हो गई।
पेट्रोल-डीजल की कीमतें फिलहाल स्थिर
IndiaMART के मुताबिक, भारत का क्रूड इंपोर्ट बास्केट 21 सितंबर को 117 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था। इसके बावजूद पेट्रोल और डीजल की कीमतें काफी हद तक स्थिर रही हैं।
IndiaMART के ग्राफिक के मुताबिक, ऑयल कंपनियां अनुमानित ₹8-9 प्रति लीटर का बोझ खुद उठा रही हैं, जो करीब ₹530 करोड़ प्रतिदिन बैठता है।
कंपनियों के मार्जिन पर पड़ सकता है दबाव
मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के सामने अब सवाल यह है कि क्या बढ़ी हुई लागत ग्राहकों तक पहुंचाई जा सकती है। अगर कच्चा माल महंगा होता रहा और तैयार प्रोडक्ट की कीमतें स्थिर रहीं, तो कंपनियों के ऑपरेटिंग मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है।
अगर आगे कंपनियां बढ़ी हुई लागत को प्रोडक्ट की कीमतों में शामिल करती हैं, तो इसका असर कंज्यूमर महंगाई पर भी पड़ सकता है। यानी कच्चे तेल की तेजी का असर सिर्फ पेट्रोल पंप पर ही नहीं, बल्कि कच्चे माल, मैन्युफैक्चरिंग लागत और सप्लाई चेन के जरिए भी दिखाई दे सकता है।

