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ब्रिक्स में चीन का दबदबा बरकरार, लेकिन पिछले 5 साल में भारत की विकास दर रही चाइना से काफी तेज

BRICS की आर्थिक तस्वीर में चीन का दबदबा कितना बड़ा है और पिछले कुछ सालों में भारत ने किस तरह अपनी रफ्तार बढ़ाई है? नए विश्लेषण में सामने आए आंकड़े वैश्विक आर्थिक संतुलन की बदलती कहानी बताते हैं। जानिए चीन और भारत के बीच बढ़ती आर्थिक प्रतिस्पर्धा की पूरी तस्वीर।

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In Short

  • BRICS की आर्थिक वृद्धि में चीन का योगदान सबसे ज्यादा, समूह की ताकत अब भी चीन पर निर्भर
  • पिछले पांच सालों में भारत की GNI वृद्धि चीन से तेज रही, लेकिन अंतर अभी काफी बड़ा
  • वैश्विक व्यापार में चीन का दबदबा कायम, भारत की हिस्सेदारी में मामूली सुधार

BRICS की बढ़ती आर्थिक ताकत में चीन की भूमिका सबसे बड़ी रही है। अर्थशास्त्री सुरजीत भल्ला के एक नए विश्लेषण के मुताबिक, 2011 से 2025 के बीच BRICS की वैश्विक आय में हिस्सेदारी 21.9% से बढ़कर 28.9% हो गई। हालांकि, अगर चीन को हटा दिया जाए तो बाकी 10 देशों की हिस्सेदारी 11.9% से घटकर 11.5% रह जाती है।

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विश्लेषण के अनुसार, इस दौरान BRICS की आय में हुई कुल बढ़ोतरी में चीन का योगदान करीब 72% रहा। यही वजह है कि BRICS के अंदर चीन का आर्थिक वजन लगातार बढ़ा है। 2011 में BRICS की कुल आय में चीन की हिस्सेदारी 45.6% थी, जो 2025 में बढ़कर 60.2% हो गई।

पांच साल में भारत की आय वृद्धि चीन से तेज

हालांकि, पिछले पांच सालों का आंकड़ा कुछ अलग तस्वीर दिखाता है। इस अवधि में भारत की आर्थिक वृद्धि दर चीन से ज्यादा रही है। सुरजीत भल्ला ने वर्ल्ड बैंक के GNI per capita (Atlas method) के आधार पर यह तुलना की है।

इस हिसाब से भारत की कुल GNI यानी सकल राष्ट्रीय आय 2020 में करीब 2.67 ट्रिलियन डॉलर थी, जो 2025 में बढ़कर लगभग 4.04 ट्रिलियन डॉलर हो गई। यानी पांच साल में इसमें करीब 52% की बढ़ोतरी हुई।

वहीं, चीन की GNI 2020 में करीब 15.15 ट्रिलियन डॉलर से बढ़कर 2025 में 20.02 ट्रिलियन डॉलर हुई। चीन की वृद्धि करीब 32% रही। यानी 2020 से 2025 के बीच भारत की कुल आय वृद्धि चीन से करीब 20 प्रतिशत अंक ज्यादा रही।

चीन अभी भी भारत से काफी आगे

हालांकि, तेज रफ्तार के बावजूद भारत और चीन के बीच आर्थिक अंतर काफी बड़ा है। 2025 में चीन की GNI भारत की तुलना में करीब पांच गुना ज्यादा थी।

चीन ने 2020 से 2025 के बीच अपनी आय में करीब 4.86 ट्रिलियन डॉलर जोड़े, जबकि भारत की बढ़ोतरी करीब 1.37 ट्रिलियन डॉलर रही। इसकी वजह यह है कि चीन की शुरुआत ही बहुत बड़े आर्थिक आधार से हुई थी।

भारत की कुल GNI 2020 में चीन की करीब 18% थी, जो 2025 में बढ़कर लगभग 20% हो गई। यानी अंतर कुछ कम हुआ है, लेकिन बदलाव अभी भी सीमित है।

BRICS में भारत की भूमिका बढ़ रही है

सुरजीत भल्ला के मुताबिक, 2011 से 2025 के बीच पांच पुराने BRICS देशों में भारत दूसरा सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला देश रहा। इस दौरान भारत की सालाना आय वृद्धि करीब 5.2% रही।

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वैश्विक आय में भारत की हिस्सेदारी भी 2011 के 2.5% से बढ़कर 2025 में 3.5% हो गई। हालांकि, चीन अभी भी BRICS की आर्थिक तस्वीर में सबसे बड़ा खिलाड़ी बना हुआ है।

वैश्विक व्यापार में चीन का दबदबा

व्यापार के मामले में भी चीन की स्थिति मजबूत है। विश्लेषण के अनुसार, 2011 से 2023 के बीच BRICS की वैश्विक वस्तु निर्यात में हिस्सेदारी 23% से बढ़कर 25% हुई। लेकिन चीन को हटाने पर बाकी देशों की हिस्सेदारी 12.4% से घटकर 10.1% रह गई।

इस दौरान BRICS के निर्यात में हुई बढ़ोतरी में चीन का योगदान करीब 94% रहा। वहीं, भारत की वैश्विक वस्तु निर्यात हिस्सेदारी 2011 के 1.71% से बढ़कर 2023 में 1.88% हुई।

कुल मिलाकर, आंकड़े बताते हैं कि BRICS की आर्थिक ताकत अभी भी चीन के इर्द-गिर्द घूमती है, लेकिन भारत तेजी से आगे बढ़ता हुआ एक अहम आर्थिक केंद्र बन रहा है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि भारत अपनी तेज विकास दर को कितने लंबे समय तक बनाए रख पाता है।