क्विक कॉमर्स से लेकर टेक महिंद्रा और क्रिप्टो तक...अब सिर्फ तेज ग्रोथ नहीं, मुनाफे पर जोर
बिजनेस टुडे मैगजीन का नया अंक भारतीय कारोबार में हो रहे बड़े बदलावों पर फोकस करता है। क्विक कॉमर्स में मुनाफे की तलाश, टेक महिंद्रा के टर्नअराउंड और क्रिप्टोकरेंसी के नियमन से जुड़ी चुनौतियां इस अंक की प्रमुख कहानियां हैं। जानिए, बदलते दौर में कंपनियों के सामने क्या नए सवाल खड़े हो रहे हैं।

संपादकीय- सिद्धार्थ जराबी, ग्रुप एडिटर, बिजनेस टुडे
आज विभिन्न क्षेत्रों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वे किसी भी कीमत पर विकास हासिल करने की सोच से आगे बढ़कर मुनाफे वाली और टिकाऊ कंपनियां बनाने पर ध्यान दें। जो कंपनियां अब तक मुख्य रूप से अपने विस्तार और बड़े पैमाने पर कारोबार के लिए जानी जाती थीं, अब उनका मूल्यांकन मुनाफे और परिचालन अनुशासन के आधार पर किया जा रहा है।
मैगजीन के इस नए एडिशन में तीन महत्वपूर्ण बदलावों पर चर्चा की गई है- क्विक कॉमर्स का टिकाऊ यूनिट इकनॉमिक्स हासिल करने का प्रयास, टेक महिंद्रा की कायापलट की यात्रा और भारत में क्रिप्टोकरेंसी के लिए टिकाऊ नियामकीय व्यवस्था की तलाश।
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जैसा कि पलक अग्रवाल ने इस अंक की कवर स्टोरी में लिखा है, भारत का क्विक कॉमर्स क्षेत्र एक महत्वपूर्ण दौर में प्रवेश कर चुका है। पर्याप्त पूंजी, भारी छूट और डार्क स्टोर नेटवर्क के तेजी से विस्तार के दम पर कई वर्षों तक कारोबार बढ़ाने के बाद अब इस क्षेत्र का ध्यान विस्तार से हटकर मुनाफे पर केंद्रित हो गया है। हालांकि बड़े पैमाने पर कारोबार अब भी महत्वपूर्ण है, लेकिन निवेशक तेजी से यह सवाल पूछ रहे हैं कि क्या इस वृद्धि से अच्छा रिटर्न भी हासिल हो सकता है।
ब्लिंकिट अब तक इस बात का सबसे मजबूत उदाहरण पेश कर रहा है है कि क्विक कॉमर्स का कारोबारी मॉडल काम कर सकता है। रिपोर्टों के अनुसार, यह भारत की एकमात्र बड़ी क्विक कॉमर्स कंपनी है, जिसने परिचालन स्तर पर मुनाफा हासिल किया है। हालांकि, इसके प्रतिस्पर्धियों के सामने अब भी कई बड़ी चुनौतियां हैं। जेप्टो ने शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने की अपनी योजना टाल दी है। वहीं, स्विगी ने इंस्टामार्ट के नेतृत्व में बदलाव किया है और बिगबास्केट नए प्रबंधन के तहत खुद को नए सिरे से स्थापित कर रही है।
भारत में ऑनलाइन किराना बाजार की पहुंच अभी भी कम है। ऐसे में क्विक कॉमर्स के लिए छोटे शहरों और कस्बों तक विस्तार की काफी गुंजाइश है। अंततः इस क्षेत्र में जीत उन प्लेटफॉर्म की नहीं होगी, जिनके पास सबसे बड़ा ग्राहक आधार या सबसे व्यापक पहुंच है, बल्कि उन कंपनियों की होगी, जो बेहद कुशलता से काम करेंगी और बड़े पैमाने पर कारोबार को लगातार मजबूत नकदी प्रवाह में बदल सकेंगी।
इस बीच, प्रियंका संगानी ने टेक महिंद्रा के उस महत्वाकांक्षी लक्ष्य की स्थिति का जायजा लिया है, जिसके तहत कंपनी अपने प्रतिस्पर्धियों से तेज गति से विकास करते हुए मुनाफे में भी सुधार करना चाहती है। कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) मोहित जोशी के नेतृत्व में, जो अब कंपनी का संचालन करते हुए अपने नौवें तिमाही दौर में हैं, परिणाम उत्साहजनक रहे हैं।
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कर्मचारियों और प्रतिभाओं को मजबूत करना भी मोहित जोशी की कायापलट योजना का एक महत्वपूर्ण स्तंभ रहा है। कंपनी ने कर्मचारियों के नौकरी छोड़ने की दर को स्थिर रखते हुए अपने वरिष्ठ नेतृत्व दल को मजबूत किया है। हालांकि, अगला चरण अधिक चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है, क्योंकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी कृत्रिम बुद्धिमत्ता के कारण होने वाले बदलाव कंपनी के कायापलट की प्रक्रिया की परीक्षा ले सकते हैं।
दूसरी ओर, सुरभि ने भारत में क्रिप्टोकरेंसी से जुड़ी विरोधाभासी स्थिति का विश्लेषण किया है। भारत दुनिया के सबसे बड़े क्रिप्टो बाजारों में शामिल रहा है। यहां लाखों निवेशक, जिनमें बड़ी संख्या युवाओं और छोटे शहरों से आने वाले लोगों की है, क्रिप्टोकरेंसी की दौड़ में शामिल हुए हैं। हालांकि, भारत के नियामकीय रुख ने ऊंचे करों और अनुपालन संबंधी सख्त आवश्यकताओं के जरिए इस क्षेत्र के औपचारिक विकास को प्रभावित किया है। इसके परिणामस्वरूप, कारोबार का एक हिस्सा अब विदेशी प्लेटफॉर्म पर ट्रांसफर हो गया है।

