BT India@100 2026: भारत ने मैन्युफैक्चरिंग का मौका नहीं गंवाया आगे बढ़ने के लिए सेक्टर को और तेज करना होगा
BT India@100 2026:प्रोफेसर डे ने कहा विकसित भारत के लिए मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट की भूमिका सबसे अहम

भारत ने मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में आगे बढ़ने का मौका नहीं गंवाया है। प्रोफेसर डे के मुताबिक देश को विकसित अर्थव्यवस्था बनाने के लिए मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर बेहद जरूरी है। भले ही जीडीपी में इस सेक्टर की हिस्सेदारी लंबे समय से ज्यादा नहीं बढ़ी है, लेकिन ग्रोथ के मामले में यह रुका हुआ नहीं है। अब जरूरत है कि भारत मैन्युफैक्चरिंग की रफ्तार को और तेज करे।
BT India@100 2026 में प्रोफेसर डे ने कहा कि भारत के विकसित देश बनने की राह में दो सबसे बड़े आधार निवेश दर और एक्सपोर्ट हैं। उन्होंने कहा कि भारत को अपनी निवेश दर को करीब 35% तक बढ़ाना होगा और एक्सपोर्ट को भी मजबूत करना होगा। यह लक्ष्य सिर्फ सर्विस सेक्टर के दम पर हासिल नहीं किया जा सकता, इसके लिए मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत बनाना जरूरी है।
मैन्युफैक्चरिंग की हिस्सेदारी स्थिर है ग्रोथ नहीं रुकी
प्रोफेसर डे ने उस सोच को खारिज किया जिसमें कहा जाता है कि भारत का मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर रुक गया है। उन्होंने कहा कि सेक्टर की हिस्सेदारी स्थिर है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इसमें बढ़ोतरी नहीं हुई है। उनके मुताबिक हाल के वर्षों में मैन्युफैक्चरिंग GVA ग्रोथ 10% से ज्यादा रही है।
उन्होंने बताया कि सर्विस सेक्टर भी तेजी से बढ़ा है, इसलिए कुल जीडीपी में मैन्युफैक्चरिंग की हिस्सेदारी बहुत ज्यादा नहीं बढ़ी। लेकिन असल में सेक्टर लगातार विस्तार कर रहा है।
असेंबली से आगे बढ़कर पूरी वैल्यू चेन बनाने की जरूरत
प्रोफेसर डे ने कहा कि भारत को अब सिर्फ असेंबली तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि पूरी वैल्यू चेन में अपनी भागीदारी बढ़ानी होगी। उन्होंने लागत, क्वालिटी और स्केल को बेहतर बनाने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि क्वालिटी सबसे ज्यादा जरूरी है। एमएसएमई, घरेलू ग्राहकों और एक्सपोर्ट मार्केट सभी के लिए एक जैसे क्वालिटी स्टैंडर्ड बनाए रखने होंगे।
मोबाइल इलेक्ट्रॉनिक्स और डिफेंस में दिख रही प्रगति
उन्होंने कहा कि मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, अप्रूव्ड सेमीकंडक्टर यूनिट्स और घरेलू डिफेंस प्रोडक्शन में भारत की क्षमता बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि नीति आयोग ने एडवांस मैन्युफैक्चरिंग के साथ टेक्सटाइल और फुटवियर जैसे रोजगार देने वाले सेक्टरों की पहचान की है।
प्रोफेसर डे ने कहा कि मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। मैन्युफैक्चरिंग से लॉजिस्टिक्स और ट्रेड जैसी सर्विसेज को बढ़ावा मिलता है, जबकि सर्विस सेक्टर इंडस्ट्री की प्रोडक्टिविटी बढ़ाता है। भारत को अब 16% जीडीपी हिस्सेदारी वाले मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को लंबे समय से तय 25% के लक्ष्य तक पहुंचाने के लिए तेजी से काम करना होगा।

